नमस्कार दोस्तो, स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' के तीसरे एपिसोड में.. आज की जो हमारी मेहमान है उनके बारे में एक बात कहना बहुत मुश्किल है. की उनकी कलम उर्दू में बेहतर लिखती है या हिन्दी में.. उनके पसंदीदा गीत तो हम उनके ब्लॉग पर सुनते ही आए है.. साथ ही उनकी अपनी आवाज़ में भी हमे काफ़ी गीत मिल चुके है.. जी हा दोस्तो में बात कर रहा हू.. ब्लॉग 'पुखराज का चाँद' वाली पारूल जी की..
कुश: आप कॉफी विद कुश के तीसरे एपिसोड की गेस्ट है.. कैसा लग रहा है आपको यहा आकर ?
पारुल: सच कहु तो बहुत खुशी है लेकिन थोड़ा डर भी लग रहा है..
कुश: सबसे पहले तो ये बताइए ब्लॉग्गिंग में कैसे आना हुआ आपका ?
पारुल: ओर्कूट,राहे अदब मे युही मस्ती मज़ाक मे लिखती थी,एक दो बार आवारा बंजारा वाले संजीत जी ने उनके अपने ब्लाग के बारे मे चर्चा की्। बस वही से शौक़ जग गया ।
कुश: ब्लॉग का नाम चाँद पुखराज का रखने की कोई खास वजह ?
पारुल: गुलज़ार का लिखा एक शेर मुझे बहुत पसंद है
“एक सबब मरने का ,एक तलब जीने की
चाँद पुखराज का रात पश्मीने की “
कुश: हिन्दी ब्लॉग जगत में किसे पढ़ना पसंद करती है आप ?
पारुल: अनगिनत नाम हैं- ज्ञान जी, बेजी, प्रत्यक्षा, मीनाक्षी दी, लावण्या दी, नीरज जी, प्रमोद जी, यूनुस, कंचन, मनीष जोशिम, मनीष [एक शाम मेरे नाम], ममता, समीर जी, शिव कुमार जी, सागर नाहर जी, अजीत जी, प्रियंकर जी, राकेश खंडेलवाल जी, सई, मीता, प्रियेश, रामलाल(कुश), मनीषा, अनुराग, कबाड़खाना के गीत और मीत । अरे बाबा कितने नाम लिखूं ? सभी प्रिय हैं, सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है । जिन मित्रों के नाम छू्ट गये हैं उनसे माफ़ी चाहूंगी ।
कुश : इतने सारे नाम!! एक सही पाठक मालूम होती है आप.. खैर! बातो का सिलसिला बढ़ाने से पहले ये लीजिए आपकी गरमा गर्म कॉफी..
पारूल : शुक्रिया कुश! मैं इसी का इंतेज़ार कर रही थी की कब तुम कॉफी के लिए बोलो... ह्म्म कॉफी वाकई अच्छी है..
कुश: हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको ?
पारुल: मुझे ब्लाग जगत से बहुत स्नेह मिला । जैसे मिनाक्षी दी कहती है कि अब ये परिवार सा लगता है ।
कुश: सबसे पहले आपके बचपन से शुरू करते है.. ये बताइए कैसी स्टूडेंट थी आप ?
पारुल: 8th तक गणित के साये तले दबी कुचली –9th से अंको से मुक्ति मिली तो नाम सदा टापर्स मे रहा ।
कुश: सुना है स्कूल जाते वक़्त बहुत रोती थी आप ?
पारुल: अरे पूछो मत!! स्कूल से बहुत डर लगता था । जो घर का बंदा मुझे पहुंचाने जाता था उसके साथ ही रो धो कर वापस आ जाती थी । और जिस दिन रुक गयी तो क्लास टीचर के प्यार से बुलाने पर मै उनहे चिकोटी काटने लगती थी ।
कुश: आप शरारती भी बहुत रही बचपन में.. बहनो के साथ खूब मस्ती किया करती थी ?
पारुल: जी हाँ!! बाबा की गोल्ड फ्लेक चुपके से पीते थे.. कभी कभी तो धोबी से बीड़ी माँग कर बहनो के साथ बीड़ी पिया करते थे.. अब तो बस यादें बाकी रह गयी है।
कुश : आपने संगीत सीखा है.. क्या कोई डिग्री ली है ?
पारुल: मैने संगीत गायन मे एम. ए. किया है, वैसे निज़ी तौर पे मेरा मानना ये है की संगीत की रूह तक पहुँचने के लिए किसी डिग्री की ज़रूरत नही होती.. ये तो नूर की बूँद है
कुश: सुना है कॉलेज में संगीत सीखते वक़्त आप काफ़ी धार्मिक हो गयी थी ?
पारुल: कॉलेज मे संगीत की गुरू थोड़ी गर्म मिज़ाज की थीं । गुस्सा आने पर तबला दुरूस्त करने वाली हथौड़ी तक खीँच कर हम सब की तरफ़ फ़ेंक देती थी । इसलिये क्लास से पहले हमेशा हनुमान जी का ध्यान कर के जाते थे हम सब ।
कुश: आपके परिवार में बहुत दिलचस्प बाते होती थी?
पारुल: जी हा बहुत सारी.. बल्कि कुछ समय पहले तक तो हमारे यहां 40 लोगों की रसोई एक साथ बनती थी । पूरा का पूरा मेला ।
कुश: क्या कोई ऐसी बात है जो अब तक आप भूल नही पाई हो ?
पारुल: मेरी एक बेहद करीबी मित्र का निधन । जिससे मैने जीवन जीना सीखा..
कुश: ओह!
अपनी बीती हुई ज़िंदगी में अगर कुछ बदलने का मौका मिले तो क्या बदलना चाहेंगी आप ?
पारुल: बी ए के लिये घर मे ज़िद कर के दया्लबाग यूनिवर्सिटी आगरा मे दाखिला लिया था और होम सिक्नेस की वजह से वापस लौट आयी थी ---वो मलाल आज तक है दिल में और हसरत भी ।
कुश: सुना है जब आपने ब्लॉगिंग शुरू की तो कई समस्याए आई थी..
पारुल: क्या क्या बताऊ.. सबसे ज़्यादा मुश्किले तो चिट्ठाजगत में पंजीकरण के वक़्त आई संत्राभ,चटकायें,अधिकृत , आदि शब्दों ने शुरूआत मे बहुत सताया । अभी भी सोच कर पसीना आ जाता है ।
कुश: कैसा लगता है जब लोगो की टिप्पणिया मिलती है.. शानदार पोस्ट ?
पारुल: संशय होता है । फ़िर उपर वाले का शुक्रिया करती हूं ।
कुश: हमारे पिछले एपिसोड के गेस्ट और उम्दा लेखन के धनी अनुराग जी आपको "लेडी गुलज़ार" कहते है, क्या कहेंगी आप इसके बारे में ?
पारुल: अनुराग बहुत अच्छे और पुराने दोस्त हैं ..और दोस्तों को मज़ाक़ करने का पूरा हक़ होता है..
कुश: आज से दस साल पहले की पारूल में ओर आज की पारूल में क्या फ़र्क़ है ?
पारुल: वजन और अनुभव...दोनो बढ़ गये है..
कुश: आप ही की लिखी हुई आपकी कोई पसंदीदा रचना ?
पारुल: यू तो सारी ही पसंद है.. मगर "प्रीत को बनवास क्यो" मुझे अधिक पसंद है.. ये मेरे दिल के करीब सी लगती है
कुश: आप अपनी आवाज़ में संगीत के सुरो को भी सिखाती है.. सरगम ब्लॉग पर.. उसकी आवश्यकता क्यो महसूस हुई?
पारुल: बस कुछ मित्रों का सुझाव था की ऐसा ब्लॉग बनाया जाए तो मैने शुरू किया…संगीत मे रूचि है और अगर अंतरजाल पर शास्त्रीय संगीत की छोटी छोटी परिभाषाएँ आदि हिन्दी मे मिल जाएँ तो ये बहुत अच्छा काम होगा.. मेरा प्रयास होगा की इस ब्लॉग को आगे बढ़ाऊं…
कुश: कोई फिल्म है जो आपको बहुत पसंद हो?
पारुल: खामोशी (वहीदा रहमान की) क्यों बता पाना मुश्किल है । बाज़ बाते सिर्फ़ महसूस की जा सकती हैं ।
कुश: क्या कोई ऐसी पुस्तक भी है जो दिल के करीब हो ?
पारुल: जी हा! आशापूर्णा देवी की सिरीज़ थी –प्रथम प्रति्श्रुति,स्वर्णलता,बकुल कथा ।मुझे बहुत पसंद आई..
कुश: क्या कोई ऐसी आदत है आपमे जो आप बदलना चाहेंगे ?
पारुल: मैं लोगो पर विश्वास बहुत जल्दी कर लेती हू।
कुश: जब आपकी शादी होने वाली थी तो आपको क्या कोई डर लगा था.. ?
पारुल: सोचा अगर बार इस होम सिकनेस हुई तो क्या करूँगी?
कुश: बहुत अच्छा लगा पारूल जी आपके बारे में इतनी सारी बाते जानकार.. चलिए अब शुरू करते है एक रॅपिड फायर राउंड
कुश: ससुराल - मायका
पारुल:मायके जैसा ससुराल
कुश: गोल्ड फ्लेक - धोबी की बीड़ी
पारुल: बीड़ी
कुश: लिखना - गाना
पारुल: खुद का लिखा गुनगुनाना
कुश: लव मैरिज - अरेंज मैरिज
पारुल: अरेंज मैरिज
कुश: सास बहू - रियलिटी शो
पारुल: सारेगामा पा
कुश: हिन्दी लेखन - उर्दू लेखन
पारुल: दोनो
कुश: चलिए अब चलते है हमारे वन लाइनर राउंड की तरफ मैं एक शब्द दूँगा और आपको उसका जवाब एक लाइन में देना है..
कुश: दाल, रोटी, चावल -
पारुल: पसंदीदा ब्लॉग है
कुश: नारी -
पारुल: बहस का मुद्दा नही
कुश: गुलज़ार -
पारुल: खूबसूरत आवाज़,नायाब अंदाज़
कुश: पातिदेव -
पारुल: श श श!!!
कुश: गणित की क्लास -
पारुल: नाइट मेर
कुश: कुश की कॉफी -
पारुल: लाजवाब मगर चीनी कम है.. हा हा हा
कुश: अब वक़्त है हमारे यहा की स्पेशल 'खुराफाती कॉफी' का.. इस कॉफी के साथ चलेगा कुछ खुराफाती सवालो का दौर.. आइए शुरू करते है
कुश : अगर ब्लॉग जगत में भी हड़ताल होने लगे तो ?
पारूल : यहाँ सब नशे मे हैं ..हड़ताल करेगा कौन?
कुश : यदि सारे न्यूज़ चैनल बंद हो जाए तो ?
पारूल : सनसनी फैलाने वाले दूसरे चैनल्स उग आएँगे
कुश : कभी आपको रियलिटी शो में जज बनाया जाता तो ?
पारूल : मै जजमेंट क्या खाक करती ..प्रतिभागियों के साथ सुर मे सुर मिला कर गा रही होती..
कुश : यदि ऐश्वर्या की शादी सलमान से हो जाती तो?
पारूल :ऐश ग़लत फ़ैसले नही लेती ...उसने मुझे फोन पर बताया
कुश : चलिए पारूल जी.. हमे बहुत अच्छा लगा आप यहा आयी.. ये लीजिए आपके लिए 'कॉफी विद कुश' की तरफ से गिफ्ट हैम्पर और ये एक बीड़ी का बंडल.. उमीद है आपको यहा आकर उतनी ही खुशी हुई होगी..
पारूल : शुक्रिया कुश! मुझे भी बहुत अच्छा लगा यहा आकर.. कॉफी वाकई अच्छी थी चलते चलते 'बशीर बद्र' साहब का एक शेर अर्ज़ करना चाहूँगी..
सितारों को आँखों मे महफूज़ रखना
बड़ी देर तक रात ही रात होगी...
मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी..
कुश : शुक्रिया पारूल जी.. बहुत बहुत शुक्रिया.. तो दोस्तो ये था हमारा 'कॉफी विद कुश' का तीसरा एपिसोड ज़रूर बताईएगा कैसा लगा आपको.. अगले सोमवार को फिर मिलेंगे हमारे ही बीच के और ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए अलविदा..
39 comments:
parul di ka interview padhke bahut mazaa aaya..wo jitni sanvedansheel hai..utni hai mazaakiya aur shaitaani bhi reh chuki hai..
unka ye pehlu dikhaane ke liye kushji aapka shukriya...
मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी..
बहुत बहुत अच्छी लगी यह मुलाक़ात ..और गोल्ड फ्लेक बीडी :) बहुत खूब
aare wah sangeet ki aapko maharat hai ye pata tha magar parul ji bachpan mein itni sharati thi aap bhi:):) bahut khub,kush ji har bar ki tarah ye bhi :):)bahut badhiya:),aakhari sher bahut pasand aaya.
कुश: आज से दस साल पहले की पारूल में ओर आज की पारूल में क्या फ़र्क़ है ?
पारुल: वजन और अनुभव...दोनो बढ़ गये है..
:
:D ... .mera bhi vahi haal hai parulji....aur aap aur bidi????? :O uff.........aapne khi kaha ..nari bahas ka mudda nahi.... ha ha ha
waah waah!!!
mazaa aa gayaa !!!!
:)
kushbhai...har baar coffee utni hi acchi lagti hain...hat-tric maar di aap ne...badhayiyan...
क्या बात है... शुक्रिया मेजबान और मेहमान दोनो का
उन्हे जानना करीब से जिनके विचारों को आप पढ़ना पसंद करते हैं अपने आप में सुखद अनुभव है!
संगीतमयी पारूल से मिलकर बहुत अच्छा लगा!
sunte hai.n Amrita ji ko smoking ki aadat sahir ki cigarate (spelling galat hai kabhi dhyan se dekhi nahi) ke tukado ko hotho se lagatelagate pad gai thi.. Parul se mai ye jaanana chaahungi ki unki ye aadat chhuti ya nahi...!:)
jaisi ummid thi vaisa hi interview. pata nhai kyo parul ki kavitae.n, parul ki baaten bahut kuchh apanai si lagati hai... is interview me bhi bahut kuchh vahi anubhav hue
hahaha kay baat hai parul ji shitani bhi kiya karti thi achha laga jaan kar
jitni saadgi se unhone jawaab diye hain jitne quick hai samjh aata hai ki wo jitni samvedansheel hai utni hi witty bhi hai
यहाँ सब नशे मे हैं ..हड़ताल करेगा कौन?
**************
भाई वाह! लाजवाब जवाब!
कमाल की प्रस्तुति.
आप के ये संक्षिप्त साक्षात्कार गजब कर रहे हैं।
पारुल जी बहुत शानदार लिखती हैं. काफ़ी विद कुश का ये एपिसोड भी शानदार रहा. पारुल जी के बारे में जानकारी पाकर बहुत अच्छा लगा.
बहुत बढिया रहा ये भी.. अब अगले मेहमान का इंतजार कर रहें हैं.. :)
कुश, कमाल कर रहे हैं आप. अब तक के तीनों episodes बहुत ही दिलचस्प रहे. पारुल के बारे में पढ़ कर - उन्हीं की कलम से - बहुत अच्छा लगा. बधाई. Keep the good work going.
"जो घर का बंदा मुझे पहुंचाने जाता था उसके साथ ही रो धो कर वापस आ जाती थी / "
"संगीत की रूह तक पहुँचने के लिए किसी डिग्री की ज़रूरत नही होती.. ये तो नूर की बूँद है"
"हमेशा हनुमान जी का ध्यान कर के जाते थे हम सब ।"
"मायके जैसा ससुराल" [जानदार ज़बाब ! ]
"नारी - बहस का मुद्दा नही"[शानदार जबाब ! ]
सुंदर सवाल के अतिसुन्दर ज़बाब !
कुश आपकी जितनी तारीफ की जाए कम है... एक के बाद एक तीनों एपिसोड बेहद दिलचस्प....
और नटखट प्यारी पारुल के बारे में जानकर तो मज़ा कई गुना बढ गया...
वाह वाह ! कमाल हो रहा है इस श्रृंखला में तो.
ये काफी विथ कुश कमाल का है....आई लव द आइडिया...
पारुल जी गुलजार की फैन हैं मेरे लिए यही बड़ी बात है... बीडी सिगरेट पढ़ कर मजा आया
bahut khoob, lage raho kush bhai....
चलिये एक बात तो हमारी दोस्ती में common हुई की उन्हें भी मेरी तरह गणित से मुहब्बत थी.. ...पर बीडी ......सुनकर झटका लग गया ...वे विनम्र है इसलिए अपने बारे में कम बताती है ...उनकी कई नज्म इतनी खूबसूरती से लिखी गई है की सीधी रूह में उतर जाती है ओर मुझे उनका वही रूप ज्यादा अच्छा लगता है .
कुश जी
आप जो काम कर रहें हैं, सच कहूँ अगर मुझे अधिकार होता तो, इसके लिए आप को "ब्लॉग-रत्न" की उपाधि से शुशोभित कर देता. बहुत आनंद आया पारुल जी के बारे में जान कर, जैसा मैंने सोचा था वैसा ही महसूस हुआ मुझे. उनमें एक नटखट छोटी सी प्यारी शैतान लड़की छुपी नजर आयी , ये एक विशेषता है जो आसानी से इंसानों में नहीं दिखाई देती. बहुत दिलचस्प जवाब दिए उन्होंने जो सिर्फ़ वो ही दे सकती हैं. लाजवाब प्रस्तुति.
नीरज
bhai..har episode ke saath aapke ye coffee with kush parvaan chadh raha hai....bahut bahut badhai...aur ab agle episode ki intezaar me hain
अरे वाह ...
शाबाशी,
कुश जी को दी जाये
या पारुल को ?....
दोनोँ ही को !!
मज़ेदार् + जानदार
सवाल और जवाब रहे ..
और ये बीडी जलाइले की क्या बात है हम्म्म ? ...
इत्ती शैतानी ? :)
बाबा रे !! :-)
खूब अच्छा रहा ये ऐपिसोड भी ..आगे का इँतज़ार रहेगा अब तो ..
स स्नेह्,
-लावण्या
sab se pahle KUSH ko dher sari badhayee ki itna achcha interview le rahe ho-aur ek achchee Kadi ki shuraat ki hai.
Parul ji ke baare mein itna jan.ne ko mila bahut achcha laga--sach hai=blog-jagat ab ek pariwar sa hi lagne laga hai.
Parul ji aap to pratibha ki dhani hain..ap ko sun.na aur padhana achcha lagta hai--aap se mulaqat kar ke bahut achcha laga.
कुश भाई पारुल जी से मिलवाने का शुक्रिया। आरकुट पर मैं एक बार अपनी पसंदीदा लेखिका आशापूर्णा देवी के बारे में सर्च कर रहा था कि वो और किन लोगों को पसंद हैं तो पारुल का प्रोफाइल मिला। थोड़ी बहुत बात तो उनसे होती रही पर नई बात बीड़ी वाली इस पोस्ट से ही पता चली।
पारुल के विषय में बहुत सी जानकारी आपके माध्यम से मिली, मैं आपके इस प्रयास की हृदय से सराहना करता हूँ।
***राजीव रंजन प्रसाद
जैसे बेहतरीन सवाल, वैसे ही बेहतरीन जबाब. क्या कह्ने!! आनन्द आ गया..पारुल जी से आपकी बातचीत में. बहुत उम्दा चल रही है यह कॉफी विथ कुश..बधाई.
भई शानदार रही पारुलजी के साथ मुलाकात । खूब जम रहा है मुलाकातों का ये सिलसिला।
ज़रा पूछ कर बताइयेगा कि पारुलजी ने बीड़ी को वो बंडल अब तक खोला या नहीं :)
क्या मेरी तारीफ़ की भी ज़रूरत है ?
शायद नहीं, शायद हाँ !
दोनों ही हालत में तुम दोनों भारी पड़ रहे हो, बधाई !
सभी मित्रों के स्नेह की अत्यंत आभारी हूँ । कुश को ढ़ेरों धन्यवाद व शुभकामनायें । :))
कुश की कॉफी के साथ तो पारुल भी बहुत खुश लगी....
चहकती और बिंदास...
बधाई आप दोनो को..
पारुल का ये एपिसोड तो बहुत ही बढ़िया लगा।
क्या बात है धोबी की बीडी और गोल्ड फ्लेक सिगरेट।
पारुल को पहली बार हमने सरगम ब्लॉग पर ही सुना था । और टिप्पणी भी छोड़ी थी। :)
kush ji har baar aapki kaafi ka jaayka badhta ja raha hai . ek baar phir badhaai ho.
आप सभी महानुभावो का हार्दिक धन्यवाद...आप सभी की प्रतिक्रियो को देखकर उत्साह और दुगुना हो गया.. ऐसे ही प्यार बरसाते रहिए.. साथ ही आप सभी के सुझाव भी आमंत्रित है..
पारूल जी का आभार जिन्होने मुझे अपना अमूल्य समय दिया..
एक बार फिर आप सभी ब्लॉगर मित्रो को मेरी ओर से हार्दिक धन्यवाद...
वाह...बहुत शानदार रहा पारुल का साक्षात्कार...जवाब बहुत अच्छे रहे और बीड़ी ने तो बस मज़ा ला दिया.....
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parul di ka interview padhke bahut mazaa aaya kush bhai
बहुत बहुत अच्छी लगी यह मुलाक़ात ..और गोल्ड फ्लेक बहुत खूब!!!
बधाई आप दोनो को..!!!
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