कॉफी विद कुश.. (सातवाँ एपिसोड)

नमस्कार दोस्तो,

स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' के सातवें एपिसोड में.. आज हम आपको जिनसे मिलवाने जा रहे है.. वो ब्लॉग जगत की एक जानी मानी शख्सियत है.. जिनके ब्लॉग पर हर नयी पोस्ट का पाठको को बेसब्री से इंतेज़ार रहता है.. जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू अमेरिका में रहते हुए भी भारत के दिल में रची बसी श्रीमती लावन्या शाह जी की ..

कुश : नमस्ते लावन्या जी कैसी है आप?
लावण्या जी: मैं अच्छी हू कुश, शुक्रिया

कुश : कैसा लग रहा है आपको यहा आकर ?
लावण्या जी: जयपुर के गुलाबी शहर मेँ , हम ,कुश जी के सँग, कोफी पी रहे हैँ ..तो " सेलेब्रिटी ' जैसा ही लग रहा है जी ! आपसे रुबरु होने का मौका मिला है ~ शुक्रिया !


कुश : सबसे पहले तो ये बताइए ब्लॉग्गिंग में कैसे आना हुआ आपका ?
लावण्या जी: " Blogging " is like "sitting in the " Piolet's Seat ..& flying the plain solo ..मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ - एक दिन रात का भोजन, निपटा के, मैँ ,कम्प्युटर पे बैठी थी और गुगल पे ब्लोग बनाने की सूचनाएँ पढते हुए मैँने मेरा प्रथम ब्लोग " अन्तर्मन " बना दिया जो अँग्रेज़ी मेँ था और तभी से ," सोलो प्लेन" समझिये," इन ट्रेँनीँग" - सीखते हुए, चला रहे हैँ :-)


कुश : हिन्दी ब्लॉग जगत में किसे पढ़ना पसंद करती है आप ?
लावण्या जी: मैँने प्रयास किया था इस पोस्ट मेँ कि जितने भी जाल घरोँ का नाम एकत्रित करके यहाँ दे सकूँ - वो करूँ अब कोई नाम अगर रह गया हो तो क्षमा करियेगा पर मुझे सभी का लिखा पसँद है सिवा उसके जो पढनेवाले का दिल दुखा जाये बाकि कई नये ब्लोग पर रोचक और ज्ञानवर्धक सामग्री भी मिल ही जातीँ हैँ,सभी को मेरी सच्चे ह्र्दय से , शुभ कामनाएँ दे रही हूँ - स्वीकारियेगा !

कृपया, यहा क्लिक करे
http://www.lavanyashah.com/2008/06/blog-post.html


कुश : क्या आप किसी कम्यूनिटी ब्लॉग पे भी लिखती है?
लावण्या जी: नहीँ तो ...ये अफवाह किसने उडायी ? :)

कुश : बाकी सवालो का सिलसिला आगे बढ़ते हुए पीते है गरमा गरम कॉफी ये लीजिए
लावण्या जी:वाह मैं तो इसी के इंतेज़ार में थी.. बढ़िया कॉफी है


कुश : ब्लॉगिंग के लिए इतना वक्त कैसे निकाल पाती है आप?
लावण्या जी: घर के काम शीघ्रता से करने की आदत हो गई है अब और काफी समय , जितना वक्त है उसे , सही तरीके से
उपयोग मेँ लाने की कोशिश करती हूँ और हाँ, यहाँ (अमेरिका मेँ) बिजली कम ही जाती है :-)..घर मेँ , आधुनिक उपकरण ही ज्यादातर काम पूरा करते हैँ ..पर, खाना,अब भी , मैँ ही बानाती हूँ ! क्यूँके ,अभी ऐसा कोई "रोबोट= यँत्र मानव " मिला ही नहीँ !! :-))


कुश : शुरुआत में ब्लॉगिंग के वक़्त कुछ तकनीकी समस्याए भी आई होंगी उन्हे कैसे दूर किया करती थी आप?
लावण्या जी : तकनीकी मामलोँ मेँ अभी सीख रही हूँ ...नहीँ तो एक बार समीर भाई से नारद, चिठ्ठा जगत और ब्लोगवाणी मेँ रजिस्टर करवाया था - भला हो उनका ..ये अह्सान कभी नहीँ भूलूँगी ..और दिनेश भाई जी ने रवि रतलामी जी से फोन्ट भिजवाये थे ..सब की मेहरबानी है ..आपने " कोफी वीथ कुश " पे बुलाया,, तरुण भाई ने " आमने -सामने " मेँ और अजित भाई ने " बकलमखुद " मेँ और सभी का शुक्रिया !


कुश : हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको ?
लावण्या जी: हिन्दी ब्लोग जगत मेरे भारत की माटी से जुडा हुआ है- कयी सतहोँ पर जहाँ आपको मनोरँजन भी मिलेगा, ज्ञानपूर्ण बातेँ भी, राजनीति से लेकर,शब्दोँ की व्युत्त्पति या खगोल शास्त्र, पर्यटन, सदाबहार नगमे, या नये गीत,एक से एक बढकर गज़ल, शायरी, गीत और नज़्म्, व्यँग्य,विचारोत्तेजक लेख,एक छोटे से कस्बे मेँ जीता भारत या विदेश का कोई कोना, यादेँ, सँस्मरण सभी कुछ पढने को मिअ जाता है जो नावीन्य से भरपूर होता है, जिसका मूल कारण है व्यक्तित्व की स्वतँत्रता और अनुभवोँ को दर्शाने की आज़ादी ( Freedom of expression ) जो एक लोकताँत्रिक विधा है - यही ब्लोगिंग की प्राण शक्ति और उसमेँ समायी उर्जा है..


कुश : एक बार आप पार्क में खो भी गयी थी ?
लावण्या जी: ३ साल की एक नन्ही लडकी , शिवाजी पार्क की भीडभाड मेँ , शाम के धुँधलके मेँ , अब लोग घर वापस जाने के लिये,पार्क के दरवाजोँ से बाहर यातायात के व्यस्त वाहनोँ के बीच से रास्ता ढूँढते निकल लिये हैँ और ये लडकी , अपने आपको अकेला,असहाय पाती है ..घर का नौकर शम्भु, बाई बहनोँ को लेकर,कहीँ भीड मेँ ओझल हो गया है और अपने को अकेला पाकर,जीवन मेँ पहली बार डर का अहसास हुआ है .. उसे देख २ नवयुवक रुक जाते हैँ और पूछते है, " बेबी, क्या तुम घूम गई हो ? अकेली क्यूँ हो ? " थरथराते स्वर मेँ अपनी ढोडी उपर किये स्वाभिमान से उत्तर देती हुई वो कहती है," मैँ नहीँ हमारा शम्भु भाई घूम गया है ! और वो ३ बरस की नन्ही कन्या, मैँ ही थी :-)ईश्वर कृपा से वे दोनोँ युवक, मेरे रास्ता बताने से ,मुझे घर तक छोड गये और दरवाजा खुलते ही," अम्मा .." की पुकार करते ही अममा की गोद मेँ मैँ फिर सुरक्षित थी और उन दोनोँ युवको ने अम्म को खूब डाँटा था और अम्मा ने उनसे माफी माँगते खूब अहसान जताया था, आज सोचती हूँ अगर मैँ घर ना पहुँची होती तो ?!


कुश :
कॉलेज की कोई बात जो अब तक याद हो?
लावण्या जी: अगर बचपन के दिन सुबह हैँ तो कोलिज के दिन मध्याह्न हैँ -एक दिन कोलिज मेँ अफघानिस्तान से आये एक नूर महम्मद ने,मेरे सहेली रुपा के लिये, दूसरे लडके को कोलेज के बाहर सडक पर, चाकू से घायल कर लहू लुहान कर दिया था - हम लडकियाम सहम गईँ थीँ - घर गये तब १०१ * ताप ने आ घेरा !दूसरे दिन एक मित्र जिसका नाम अनिल था और वो सबसे सुँदर था उसका दोस्त आया और बतलाया कि अनिल ने खुदकुशी कर ली ! शायद उसके पर्चे ठीक नहीँ गये थे और फेल होने की आशँका से उसने ऐसा कदम उठाया था, ये दोनोँ किस्से मुझे आज तक भूलाये नहीँ भूलते -

Do see this link below ~
http://www.lavanyashah.com/2007/04/blog-post.html


कुश : अपने परिवार के बारे में बताइए ?
लावण्या जी: मेरे परिवार मेँ हैँ - मेरी बिटिया सिँदुर, दामाद ब्रायन, नाती नोआ और बेटा सोपान और बहु मोनिका देव मेरे पति दीपक और मैँ !


कुश : जीवन की कोई अविस्मरणिय घटना ?
लावण्या जी: मेरी पहली सँतान बिटिया सिँदुर का ९ वाँ महीना चल रहा था उसे शाम के खाने पे बुलाया तो वो सेल फोन से नर्स को पूछ रही थी " क्या मैँ मेरा फेवरीट शो देखने के बाद वहाँ आ सकती हूँ ? " नर्स ने कहा नहीँ जी फौरन आओ और दूसरे दिन हम भी वहाँ गये ..उसका लेबर पेन चल रहा था और मैँ प्रभु नाम स्मरण करते जाप कर रही थी, मन मेँ एक डर था कि अभी नर्स , डाक्टर आकर कहेँगेँ कि हम इसे ओपरेशन के लिये ले जा रहे हैँ परँतु,हेड नर्स ने हमेँ कहा, " आप लोग बाहर प्रतीक्षा कीजिये..अब समय हो रहा है " हम बाहर गये और मानोँ कुछ पल मेँ , मुस्कुराती हुई वो लौट आई और कहा, " अब आप लोग आ सकते हैँ " भीतर सिँदुर थी और मेरा नाती " नोआ" Noah था उस सध्यस्नात, नवजात शिशुको हाथोँ मेँ उठाया तो वह पल मुझे मेरे जीवन का सबसे अविस्मरीणीय पल लगा..



कुश : सुना है आपकी ब्लॉग पर कुछ लोगो के बारे में लिखे जाने पर उनके रिश्तेदारो ने आपसे संपर्क किया था?
लावण्या जी: हम जब ब्लोगिँग करते हैँ तब निताँत एकाँत मेँ, अपने विचारोँ को की बोर्ड के जरिये , खाली पन्ने पे उजागर करते हैँ, उसके बाद आपका लिखा कौन , कहाँ पढता है इस पे आपका कोई अधिकार नहीँ - इस नजर से ये सर्व जन हिताय हो गया एक पोस्ट श्रध्धेय अमृतलाल नागर जी ( मशहूर कथाकार हैँ ) उन के पापाजी पे लिखे सँस्मरण को पोस्ट करने से पहले,उनपे नेट पर सामग्री ढूँडते , रीचा नागर के बारे मेँ पता चला और सँपर्क हुआ जिसकी खुशी है -


और कवि प्रदीपजी वाली पोस्ट को उनकी बिटिया ने पढकर मुझे ई मेल भेजा उसकी भी खुशी है



कुश : आप अब तक कई बड़े बड़े लोगो से मिल चुकी है, किसका आपके जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव पढ़ा?
लावण्या जी : पापा जी के गुरु थे ~ महर्षि धुरँधर विनोद जी ! " " धवलगिरि " पुस्तक के लेखक ~ प्रकाँड पँडित,पहुँचे हुए महायोगी, पुणे निवासी, सँस्कृत के मर्मज्ञ,त्रिकालदर्शी कवीँद्र रविन्द्रनाथ की हुबहु शक्लवाले, धवल दाढी, गोरे,रहस्यमय, विलक्षणात्मा थे वे..मुझे उनके दर्शन हुए तब मैँ, १८ साल की रही होउँगी ..उन्होँने मुझे देखते ही कहा, " ये मानसिक रुपसे २८ वर्ष की है ! " माने उम्र से १० साल ज्यादा ..राज कपूर जी की बडी बिटिया ऋतु भी साथ थी उसे बतलाया, " हम लोग पहले वियेना ( युरोपे का एक शहर ) मेँ मिले थे ! " वो घबरा के बोली, " मैँ तो वहाँ गई ही नहीँ ! " तो वे सिर्फ मुस्कुरा दिये ..कैयोँ के असाध्य रोगोँ को उन्होँने ठीक किया था ..उनहेँ कभी भूल न पाऊँगी ..


कुश : आप ही की लिखी हुई आपकी कोई पसंदीदा रचना ?
लावण्या जी: रात कहती बात प्रियतम,
तुम भी हमारी बात सुन लो,
थक गये हो, जानती हूँ,
प्रेम के अधिकार गुन लो !
है रात की बेला सुहानी,
इस धरा पर हमारी,
नीँद से बोझिल हैँ नैना,
नमन मैँ प्रभु मनुज के!
रात कहती है कहानी,
थीस्वर्ग की शीतल कली,
छोड जिसको आ गये थे-
उस पुरानी - सखी की !
रात कहती बात प्रियतम !
तुम भी सुनो, मैँ भी सुनुँ !
हाथ का तकिया लगाये,
पास मैँ लेटी रहूँ !


कुश : कोई ऐसी फिल्म है जो बहुत पसंद हो आपको ?
लावण्या जी: " मुगल - ए - आज़म " मेरी पसँदीदा फिल्म है मधुबाला दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर दुर्गा खोटे और अन्य सभी सह कलाकारोँ का उत्कृष्ट अभिनय, नौशाद साहब का सुमधुर , लाजवाब सँगीत और एक से बढकर एक सारे गाने, वैभवशाली चित्राँकन, कथा की नायिका की मासूमियत और खूबसुरती जो उसके जीवन का अभिशाप बन गई और अनारकली का त्याग ..प्रेम के लिये आत्म समर्पण , बहुत सशक्त भावोँ को जगाते हैँ बस्स वही सब पसँद है ~~


कुश : यदि आपको आपकी पसंदीदा फिल्म मुग़ले आज़म बनाने का मौका मिले तो आप ब्लॉग जगत में से किसे मुख्या किरदार देगी?
लावण्या जी : आपको ही दूँगीँ ..अनारकली / माने मधुबाला आप चुन लीजियेगा :-)


कुश : क्या पढ़ना पसंद करती है आप ?
लावण्या जी: वैसे तो लम्बी लिस्ट है ..पर सच मेँ " सुँदर काँड " मेँ चमत्कारी शक्ति है ! हनुमान जी का सीता मैया को रावण की अशोक वाटीका मेँ खोजना और पाप का नाश और सत्य पर विजय हमेशा नई आशा का सँचार करता है ~और एक पुस्तक है " शेष - अशेष "मेरे पापाजी पर बहुत सारे सँस्मरणात्मक लेखवाली ..उसे पढते समय , अक्सर, छोड देती हूँ क्यूँकि ..आँसू आ ही जाते हैँ उनकी और अम्मा की यादेँ तीव्र हो उठतीँ हैँ


कुश : ठमको आँटी के बारे में बताइए ?
लावण्या जी: हमारे सामने एक आँटीजी आगरा से रहने बम्बई आयीँ थीँ ..रोज ही सिनेमा देखने चल देतीँ थीँ हम लोग उन्हेँ "ठमको आँटी " प्राइवेट मेँ बुलाते थे ..ना जाने एक दिन क्या सूझी कि उनके घर कुँकु से लिपटा नारीयल, फूल और डाकू भैँरोँ सिँह के नामवाली चिठ्ठी छोड आये ...खत का मजमूँ था .... "घर मेँ रहा करो नहीँ तो तुम्हारे जान की खैर नहीँ ! " आँटीजी ने पुलिस बुलवाने का उपक्रम किया तब जाकर अम्मा के सामने डाकूओँ ने आत्म समर्पण कर दिया था !!


कुश : क्या अमेरिका में आपको भारतीय माहौल की याद नही आती?
लावण्या जी : याद तो बहुत आती है..कैसे ना आये ?भारत मेरी आत्मा से जुडा हुआ जो है !


कुश : अमेरिका में आप भारत की कौनसी चीज़ सबसे ज़्यादा मिस करती है?
लावण्या जी : बेतकल्लुफ होकर जीना..किसी के घर पर फोन किये बिना जा धमकना..गर्मियोँ मेँ आम ..शाम को ताज़ा मोगरे के गजरे..और मघई पान का जोडा
आहा ....sigh...sigh......कितनी चीजेँ गिनाऊँ कुश भाई ?



कुश : आप को किस विषय पर लिखना सबसे अधिक प्रिय है?
लावण्या जी : भ्रमण, व्यक्ति विशेष, धर्म, समाज ..ये ज्यादा हैँ मेरे जाल घर पे , so i guess they are a recurring theme & part of the patten.


कुश : ये बताइए कोई नयी पोस्ट डालते वक़्त आप किन बतो का ध्यान रखती है?
लावण्या जी : मुझे सुँदर, अलग जरा हटके दीखेँ वैसे चित्र मेरी पोस्ट के साथ लगाना अच्छा लगता है..एकाध दफे चित्र को देखकर भी लेखन सूझा था जैसे " हम पँछी एक डाल के "वाली पोस्ट या अमरीका के शहरोँ मेँ घुमते हुए जो देखती हूँ वैसे चित्र ! और फिर लिखती हूँ , हमेशा ये सोच कर कि पढनेवालोँ को कुछ नया लगे और अच्छा भी लगे ..


कुश : क्या कोई ऐसी जगह है जो आपको दिली सुकून देती हो?
लावण्या जी : इत्ते बरस हो गये ..वो जगह मेरी अम्मा की गोद ही थी जिस पे सर रखते ही, दुनिया भर के गम हवा हो जाते थे ! आज, मेरे बच्चोँ को वही देने का प्रयास करती हूँ घर पर इसी तरह का सुकुन बकरार रहे उसी के लिये, मेरा समस्त जीवन अर्पित है --


कुश : किस तरह का संगीत सुनती है आप?
लावण्या जी : ज्यादातर, हिन्दुस्तानी सँगीत ही सुनती हूँ ...ब्लोग जगत के शायद सभी गीतोँ के लिन्क और युट्युब पर भी , बहुत से गीत खोजने पे मिल जाते हैँ और एक मित्र हैँ वे बहुत उम्दा गीतोँ को चुनकर सी.डी. बनाकर भेजते हैँ ..सुबह पँडित जसराज जी ,पँडित भीमसेन जोशी जी जैसे शास्त्रीय गीत ~ और मेरी लतादीदी की बहुत बडी फेन हूँ उनको भी सुनती हूँ !


कुश : ब्लॉग पर होने वाली बहस को आप कितना उचित मनती है?
लावण्या जी : कभी बहस से, जानकारियाँ मिलतीँ हैँ तो कभी बहस से किसी के दिल को जबर्दस्त ठेस भी पहुँचती है...हरेक को आज़ादी है ना, जो चाहे लिखे अपने ब्लोग के सभी "मालिक " हैँ !



कुश : बहुत बढ़िया जवाब रहे आपके.. चलिए अब बारी है हमारे पाठको के सवालो की आइए देखे हमारे पाठको ने आपके लए क्या सवाल भेजे है..

कुश : आप इतने लंबे समय से ब्लॉग पर सक्रिय है ,नए ब्लोगर्स के बारे में आपका क्या कहना है ?
आपकी सोच में कौन सा ऐसा प्रयास नये पुराने ब्लोगर्स को जोड़ सकता है ? - अनुराग जी
लावण्या जी : अनुराग भाई, आप पुराने ब्लोगरोँ से किस प्रकार का सहयोग चाहते हैँ ? इसके लिये तो दोनोँ को एक एक कदम आगे बढना होगा और दोस्ती का हाथ बढाना होगा तभी तो ये सँभव होगा --


कुश : अपनी दिनचर्या के बारे में कुछ बताइए - मीनाक्षी जी
लावण्या जी : सुबह, सैर, फिर चाय,नाश्ता, दिनके लँच के लिये प्रबँध, फिर न्युज , फिर थोडा टीवी , फिर नेट पे , दुपहर तक ईश्वर पूजा फिर पेट पूजा, आराम और फिर शाम की तैयारी , टहलना और न्युज देख के भोजन, कीचन समेटना, फिर सुस्ताना ..ये तो घर पर रहूँ तब, जब बाहर काम से जाते हैँ तब यात्रा और बाहर ही खा लेते हैँ ..


कुश : क्या आप फिर से भारत आकर बसना चाहेंगी या आभासी सम्पर्कों के जरियेही भारत को महसूस
करके संतुष्ट हैं - अजीत जी
लावण्या जी : अजित भाई, १९७४, ७५, ७६ हम युवावस्था मेँ लोस एन्जिलिस रहे और फिर परिवार के बडोँ के आग्रह से भारत लौट आये ..१४ वर्ष बीते और अचानक सँजोग ही ऐसे बने कि दुबारा अमरीका आकर बसे ..मेरा मन तो आज भी भारत मेँ है परँतु ऐसा लगता है कि नसीब मेँ जहाँ रहना लिखा है वही होके रह्ता है - पूरे परिवार का निर्णय रहेगा ये तो - आगे की क्या खबर क्या हो !


कुश : यदि आपके 'वो' नाराज़ हो जाए तो आप उन्हे मनाने के लिए कौनसा गाना गाएँगी? - अभिजीत जी
लावण्या जी : !" हमेँ तुमसे प्यार कितना ये हम नहीँ जानते ..मगर जी नहीँ सकते, तुम्हारे बिना " फिल्म : कुदरत का गीत कैसा रहेगा अभिजीत भाई चलेगा ना ? ;-)



चलिए अब चलते है रॅपिड फायर राउंड की ओर

कुश :अमेरिका - भारत
लावण्या जी : मेरा भारत


कुश :अमिताभ बच्चन - अभिषेक बच्चन
लावण्या जी : अमित भैया


कुश :सोच में बदलाव - बदली हुई सोच
लावण्या जी : सोच के बतलायेँगे :)



कुश : मिठाई - नमकीन
लावण्या जी : नमकीन



कुश : पुरानी फ़िल्मे - नयी फ़िल्मे
लावण्या जी : Both / दोनोँ



चलिए अब चलते है हमारे वन लाइनर राउंड की तरफ

कुश :हिन्दी ब्लॉग जगत -
लावण्या जी : ज़िँदाबाद ...ज़िँदाबाद


कुश : मीनाक्षी जी -
लावण्या जी : सेहरा मेँ गँगा की धारा

कुश :भारत -
लावण्या जी : नित प्रियम भारत भारतम

कुश :नोआ-
लावण्या जी : My सोनु, मोनु / Sonu Monu :)


कुश :कुश की कॉफी -
लावण्या जी : बस पीते ही रहो ऐसी दिलकश और लज़ीज !



अब बारी है हमारी खुराफाती कॉफी की.. तो हम पूछेंगे आपसे कुछ खुराफाती सवाल जिनके खुराफाती जवाब आपको देने होंगे..

कुश :यदि एक दिन के लिए सभी ब्लॉग्स की कमांड आपके हाथ में आ जाए तो?
लावण्या जी : कमाँडो बन जायेँ सभी


कुश :चंदा को मामा क्यो कहते है?
लावण्या जी : माँ के जैसा शीतल , चमकीला और प्यारा है ना चँदा मामा इसलिये


कुश :सियार रात में रोते क्यो है?
लावण्या जी : सारे नेता ऊँघते हैँ तो वे अपने भाइ लोगोँ को "मीस" जो करते हैँ


कुश :पानी हमेशा गीला क्यो होता है?
लावण्या जी : सूखे दिलोँ को भिगाने की कोशिश करता है



कुश : यदि रेल गाड़ी में से आख़िरी डिब्बा हटा दिया जाए तो?
लावण्या जी : तो बेचारे यात्री ईँजनवाले हिस्से मेँ , सबसे आगे बैठ जायेँगेँ !गड्डी छोट्टी हो जाईगी पुत्तर ! LOL


कुश : बहुत अच्छे जवाब रहे है आपके लावण्या जी, मुझे बहुत अच्छा लगा आज आपसे बात करके.. ये लीजिए हमारी तरफ से एक गिफ्ट हेम्पर..
लावण्या जी : Wow ! Let me open it ...अरे वाह ! इतनी बेशकिमती Gifts आपने रखीँ हैँ कुश जी की ...I'm speechless !! Thank you sooo very much ,appreciate your kindness Sir !


लावण्या जी :
चलते चलते ..एक प्रशन मेरा भी : "कुश जी " आपको भी ये खेल खेलना होगा -
बतायेँ , "कोफी वीथ कुश " मेँ आप को कोफी कौन पीलाये ? हम सभी मिलकर या आप चुनेगेँ ? We all want "Kush ji " to play this game too very soon ~~



कुश : हा हा मुझे बहुत खुशी होगी.. खैर अंत में हमारे ब्लॉगर मित्रो को क्या कहना चाहेंगी आप?
लावण्या जी : " बने चाहे दुशमन जमाना हमारा ..सलामत रहे...दोस्ताना हमारा " ..खुश रहो, मौज मनाओ, अपने भीतर के शिशु को हमेशा हँसता रखो thanx for your patience . God Bless you all.

तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का एक ओर एपिसोड .. ज़रूर बताएगा कैसा लगा आपको.. फिर मिलेंगे इस ब्लॉग पर अगले सोमवार हमारे ही बीच के एक ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए शुभम

42 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

काफी विद कुश में लावण्या जी को जानना बहुत अच्छा रहा. खासकर उनके परिवार के बारे में जानना. बहुत शानदार पोस्ट रही. हमेशा की तरह.

mahashakti said...

काफियों का सिलसिला जारी रहे, लावण्‍या जी के बारके जान कर अच्‍छा लगा।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

कुश की काफ़ी और लावण्या जी की बातें बहुत रोचक रही नोहा के बारे में पढ़ना अच्छा लगा

vipinkizindagi said...

रोचक

अशोक पाण्डेय said...

लावण्‍या दी तो भारतीय संस्‍कृति की जीती-जागती प्रतिरूप हैं। उनकी कही बातें पढ़ाने के लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद।

अभिषेक ओझा said...

लावण्या जी के बारे में तो उनका ब्लॉग पढ़ते-पढ़ते ही बहुत कुछ जान गए थे... पर ये मुलाकात बहुत अच्छी रही. शुक्रिया.

Parul said...

लावण्‍या दी,यूँ ही सदा खिली खिली रहिये:)

Udan Tashtari said...

अरे वाह!! आनन्द आ गया लावण्या जी से आपकी बातचीत पढ़कर. यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे, अनेकों शुभकामनाऐं.

दिनेशराय द्विवेदी said...

सुन्दर साक्षात्कार।

अनूप भार्गव said...

अरे ! ये लावण्या जी गुलाबी नगरी ’जयपुर’ कैसे पहुँच गई (या ये सब virtual interview था) ?
पढ कर अच्छा लगा ।

अनूप शुक्ल said...

अच्छा लगा काफ़ी का सत्र। लावण्या जी अपने ब्लाग पर तमाम कालजयी रचनाकारों के संस्मरण देती रहती हैं। आज उनके बारे में और जानकारी मिली।

नीरज गोस्वामी said...

वाह कुश जी अमेरिका में आप ने भारत के दर्शन करवा दिए...धन्य हैं ऐसे लोग जो इतने वर्षों तक अपने वतन से दूर रह कर भी अपने वतन की मिटटी की खुशबू संभाले हुए हैं...हमें उन पर गर्व है...लावण्या जी के बारे में जान कर बहुत अच्छा लगा, उनके पूरे परिवार को हमारी शुभकामनाएं.
नीरज

Harshad Jangla said...

Lavanya Di
You have to make an audio CD for such a wonderful interview.If you do, I will be the first to demand from you.

Enjoyed the whole interview.
Thanx & Rgds.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA

पंगेबाज said...

लावण्या जी काफ़ी मे चीनी कैसी थी . जरूर बताये? उस दिन को कुश जी पहले डालना ही भूल गये बाद मे पाच छै चम्मचे डाल दी थी :)

Lavanyam - Antarman said...

आप सभी की टीप्पणीयोँ का
बहोत बहोत शुक्रिया ~~
कुश भाई का भी -
जो मुझे यहाँ बुलाया
Harshad bhai, If Kush bhai is ready for a podcast, I'll be willing to make a Cd or do a podcast - thank you so much for your suggestion & kind comments -
और पँगेबाज जी ( arun bhai ) मैँने तो शक्कर कोफी या Tea मेँ लेना बरसोँ से बँद कर रखा है -
हम वैसे ही मीठे हैँ :)
- लावण्या

सजीव सारथी said...

अच्छा लगा लावण्या जी से मिलकर, कुश का धन्येवाद

संजय बेंगाणी said...

वाह! खुब रहा यह अंक भी.

अनुराग said...

थोड़ा लेट हो गया .......लावण्या जी को पढ़कर ऐसा लगा अभी भी भारत अपने भीतर बसाये हुए है ,३ साल की लड़की का पार्क में खोना.......सहमा गया था .....ओर अनिल का पढ़कर भी बहुत दुःख हुआ ....पर आप के मन में आज भी काफी ममता है.....

pallavi trivedi said...

लावण्या जी से मुलाकात बहुत बढ़िया रही...उनके संस्मरण ,सवाल जवाब खूब रहे! खासकर सियार रात में क्यों रोते हैं? इसका जवाब बेहतरीन था!

Abhijit said...

bahut maza aaya Lavanya ji se baat karke...aur Lavanya ji...aapke gaane ki choice kaafi lajawab rahi.

ye coffee ka silsila yonhi chalta rahe :)

मीनाक्षी said...

देरी से आने के लिए क्षमा...लेकिन लावण्याजी की मुस्कान तो अभी भी कुश के कॉफी हाउस में खिली हुई है...न्यारे नोहा के बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगा.. हमें रेगिस्तान की गंगा कह दिया,,,क्या कहें...आपका बड़प्पन है...

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

बहुत अच्छे, यह अंदाज़ अच्छे हैं!

Gyandutt Pandey said...

वाह! लावण्या जी तो इतनी अपनी हो गयी हैं कि परिवार के सदस्य सी लगती हैं।

राज भाटिय़ा said...

कुश भाई मे हमेशा देर से ही आता हु, माफ़ करना,
बाकी काफी विद कुश में लावण्या जी से मिलना बहुत अच्छा लगा, सच कहु, तो लावण्या जी तो अब अपनी सी लगती हे, एक दोस्त,एक बहिन, एक मां ओर एक सहेली सी, सब कुछ मिलता हे इन के लेखो मे,बस ज्यादा नही बोलुगा,काफी विद कुश में लावण्या जी के परिवार से भी जान पहचान हो गई बहुत धन्यवाद

Manish Kumar said...

अच्छी रही ये मुलाकात भी !

Lavanyam - Antarman said...

कुश भाई के साथ सभी का पुन: धन्यवाद --
आप लोग देरी से आये तो भी कोई बात नही -
आये तो सही :-)
कल के बाद यात्रा पर हूँ -- इसलिये , अभी इतना ही..फिर मिलते हैँ..
- लावण्या

Power of Words said...

pehli baar aapke blog par nazar padi.. coffee shabd se maine socha padhun ise, bahut achcha laga. haalanki bahut kuch abhi padhna baaki hai. par bahut achcha laga. i am coffee lover.. and I believe in cliche that CCD gives : A lot can happen over a coffee.

Saee_K said...

lavynaji ka interview..padkhkar mazaa aaya .....unke personal experiences..unhone baante..
bahut rochak..

'ताइर' said...

kushbhai...sabhi apni apni jeevani khol dete hain aap ke saamne...aur woh bhi bade pyar se...badhiya hain...

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

आप सभी महानुभावो का हार्दिक धन्यवाद...आप सभी की प्रतिक्रियो को देखकर उत्साह और दुगुना हो गया.. ऐसे ही प्यार बरसाते रहिए.. साथ ही आप सभी के सुझाव भी आमंत्रित है..

लावण्या जी का आभार जिन्होने मुझे अपना अमूल्य समय दिया..

एक बार फिर आप सभी ब्लॉगर मित्रो को मेरी ओर से हार्दिक धन्यवाद...

श्रद्धा जैन said...

lavanya ji ko padhna aur unse baatcheet karna bahut achha laga

डा० अमर कुमार said...

आह..लगता है,
लावण्या जी को लाकर
कुश का एक उपकार और दर्ज़ हुआ मेरे खाते में ।

shama said...

Ye episode padhna achha laga!!Lawanya jee ko mai bilkulbhi nahi jaanti thi...! Intezaar hai aageke episodes kaa!!
Anuraagji kobhi shukriya kehte hue badhaai dena chahti hun!
Shama

हर्षवर्धन said...

कॉफी का स्वाद बेहतर होता जा रहा है। लावण्याजी का साक्षात्कार शानदार

सुजाता said...

लावण्या जी से यूँ मिलना मज़ेदार रहा । बहुत इच्छा है कि उन्हें साक्षात भी मिल पाएँ ! कब आ रही हैं आप भारत !!

meeta said...

hmmm...kush...coffee achchi blend ho rahi hai ab to.... :) ..achche se pahechan karwa dete ho tum....

swati said...

bahut hi badhiya raha yeh sakshatkaar.....lavanya ji meri bhi favourite hain..

अजित वडनेरकर said...

बहुत शानदार रहा ये साक्षात्कार।
बकलमखुद लिखते वक्त लावण्यादी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था सो वे ज्यादा नहीं लिख पाईं थी, वह कसर यहां पूरी हो गई।
काफी का स्वाद खूब भा रहा है सबको....

Lavanyam - Antarman said...

Aap Sabhee ka Fir ek baar Dil se Shukriya ....

Main, Los Angeles, California aayee hoon.

Kuch dino ke liye ...

It is the Entertainment Capital of the World

Hollywood ...hai na yehan !

Aur aaj kal, Kareena Kapoor aayeen hain,

Sylvester Stallone ke sath ek Pic. mei kaam karengeen ....

Aur Bachchan Pariwaar bhee aaya hua hai

Uske bare mei aage ...baat hogee ...

Kush ji ...aapka Bahot bahot aabhar !

Sa sneh,

-- Lavanya

soul said...

आप हिंदी ब्लाग जगत की सारा पॉलिन हैं।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

SOUL jee, ..really ??
I'm surprised to read that !!

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

लावण्या जी को जानना बहुत अच्छा रहा. खासकर उनके परिवार के बारे में जानना. बहुत शानदार पोस्ट !!!

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