<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293</id><updated>2011-07-31T07:59:35.638+05:30</updated><title type='text'>टोस्ट विद टू होस्ट</title><subtitle type='html'>सीजन टू ऑफ कॉफी विद कुश</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>15</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-5893397474121952087</id><published>2009-04-08T18:14:00.003+05:30</published><updated>2009-04-08T18:30:23.560+05:30</updated><title type='text'>टोस्ट विद टू होस्ट : एलो जी सनम हम आ गए..</title><content type='html'>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;span&gt;नमस्कार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दोस्तों&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लम्बे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इन्तेज़ार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बाद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फिर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हाज़िर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;कॉफी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अरोमा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;स्वागत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपका&lt;/span&gt;&lt;span&gt;  कॉफी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीजन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टू&lt;/span&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;'&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टोस्ट&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;विद&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टू&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;होस्ट&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; '&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आज&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेहमान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;परिचय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मैं&lt;/span&gt;&lt;span&gt;गुजारिश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करूँगा&lt;/span&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;शिव&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुमार&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मिश्रा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सभी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आज&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेहमान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;परिचय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करवाए&lt;/span&gt;..&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyW0vpKuBI/AAAAAAAABcU/XVVtE-pwFtc/s1600-h/DSC00739.JPG"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 89px; height: 113px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyW0vpKuBI/AAAAAAAABcU/XVVtE-pwFtc/s400/DSC00739.JPG" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5322294692531582994" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;दोस्तों, इस बार टोस्ट विद टू होस्ट के मेहमान है &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डॉक्टर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुमार&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जी&lt;/span&gt;... पूरे ब्लॉग-जगत में अपनी बेबाक राय के लिए लोकप्रिय डॉक्टर साहब तीन सक्रिय चिट्ठों के स्वामी हैं. ब्लॉग का नाम भले ही &lt;a href="http://binavajah.blogspot.com/"&gt;बिनावजह&lt;/a&gt; हो, लेकिन डॉक्टर साहब बिनावजह कुछ नहीं लिखते. चिट्ठाकारी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टर साहब को तीन बजे सुबह भी लिखने में कोई गुरेज नहीं है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने एक और चिट्ठे &lt;a href="http://kakorikand.wordpress.com/"&gt;काकोरी के शहीद&lt;/a&gt; पर आप इतिहास से जुड़े उस महत्वपूर्ण घटना के बारे में लिखते हैं, जिसका देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान है. स्वभाव से संजीदा मगर बालपन वाली मस्ती के मालिक. उनका यह मालिकाना अंदाज़ उनके चिट्ठे &lt;a href="http://amar2you.blogspot.com/"&gt;अचपन पचपनबचपन&lt;/a&gt;  पर बखूबी दीखता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ उर्दू पर भी सामान अधिकार रखनेवाले डॉक्टर साहब आज हमारे साथ हैं...&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; शुक्रिया मिश्रा जी..  बहुत बहुत शुक्रिया आपका..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; स्वागत है आपका डा साहब टोस्ट विद टू होस्ट के पहले एपिसोड में.. ऐसा पहली बार हुआ कि हम दो मेजबान कॉफी हाथ में लिए बैठे है ऑर मेहमान ही गायब ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; इतना इंतेज़ार करवाने के लिये माफ़ी मागूँगा तो तुम कहोगे कोई बात नहीं.. सो इनको बरबाद न करते हुये माफ़ी नहीं माँगता !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या करता, अचानक अम्मा अस्वस्थ हो गयीं.. और तेरे शो की हिरोईन बन बैठीं... वह अब ठीक हैं.. सो हाज़िर हूँ !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; सबसे पहले तो आप उस सवाल का जवाब दीजिए जिसने मुझे बहुत परेशान किया .. शायद और लोगो को भी किया हो.. आख़िर आपके कितने ब्लॉग है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; पहले तो आप मेरे सवाल का ज़वाब दीजिये कि मैं धमाकेदार कहां से दिख रहा हूं, ब्लाग जगत में एक से एक धमाके पहले से ही है और मेरी शख्सियत तो महज़ कुछेक टेराबाईट डाटा और सिगनल में ही अँट जाती है !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे अपुन के नवाबी हरम में ५ ब्लागी फटीचर -बेगम होती थीं, पर अब तीन बच रही हैं, आजकल निठल्ले जी कुछ तो जी को बाहर से समर्थन दे रहे हैं । अपने शहीद को उपेक्षा के इन्क्यूबेटर से निकाल रहा हूँ.. तेरे को तकलीफ़ ? ऎई अनुराग, यूँ क्यों देखे जा रहा है ? मुझे सरम लगती है, तू भी जितनी चाहे बटोर ले न ? मोफ़त का माल है, इस हरम की बेगमें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; अलग अलग ब्लॉग बनाने की कोई खास वजह ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; अभी बतलाया तो.. ब्लागर तो तीन स्टेप में ही निकाह कबूल लेता है, जितनी बन पड़े रखों । वैसे यह थीम ओरियेन्टेड दृष्टिकोण से बनाये गये हैं, अगर डा. अनुराग, ज्ञानोदय या कथादेश में सत्यकथायें देखना पसंद करेंगे, मैं भी सभी को एक मंच पर समेट लूँगा.. है, कि नहीं अनुराग ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अरे मुस्कुरा क्यो रहे हो ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; शुरुआत बचपन से करते है.. किस तरह रहा बचपन ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;: यूँ देखो तो कोई खास नहीं.. हर दिन एक खास तर्जुबे से ग़ुज़रता रहा.. सबका गुज़रता है.. हाँ, वाणीदोष या हकलापन के यंत्रणादायक अनुभव ने मुझे पुस्तकोन्मुख व अंर्तमुखी बना दिया था । इस अवगुण ने इतना कुछ दिया कि इससे मुझे कोई शिकायत भी नहीं है !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; तो.. किस विषय पर लिखना अधिक पसंद है आपको ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; सामयिक विसंगतियों एवं पाखंड को मैं अधिक देर झेल नहीं पाता, सो उसी पर कुछ लिख-ऊख लेता हूँ !&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="border-top: 2px solid rgb(0, 0, 0); border-bottom: 2px solid rgb(0, 0, 0); padding: 5px 5px 2px 12px; float: right; width: 200px; height: 210px;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color: rgb(153, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;&lt;strong&gt;" अघोषित खेमे यहाँ भी है "&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color: rgb(153, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;  ..सार्थक बहसों का अभाव भी ....बुद्दिजीवी इनसे कटते है ...ओर  बाकी लोग अपने निजी सरोकार से ऊपर नही उठते  क्या अभिव्यक्ति  हो पा रही है ? आपको क्या लगता है कुछ जरूरी बहसे....कुछ विचार विमर्श क्या यहाँ देखने को मिले है ? या सिर्फ़ उनकी उम्र २४ घंटे  ही है &lt;span style="font-size:130%;"&gt;?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; ड़ा अमर कुमार, ब्लॉगर अमर कुमार और सिर्फ़ अमर कुमार में क्या फ़र्क देखते है आप ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; इनको मायावती, अडवानी और मनमोहन समझ लो ! सबको फ़ोड़ कर मेरी चौथे विकल्प की सरकार चल रही है.. पर, यह भी लिख दोगे क्या ?&lt;br /&gt;लिखना मत.. एक्सक्लूसिवली तम्हारे पाठकों तुमको बताता हूँ, कि यदि अपने पति.. पिता.. मातहत.. लेखक.. बास.. एण्ड आफ़कोर्स ईगो वगैरह वगैरह को एक डिब्बे में घुसेड़ने का प्रयास करोगे तो बिलबिला कर सभी तुमसे भाग खड़े होंगे । सो किसी को एक दूसरे से मिलने ही न दो !&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; क्या हमेशा से आप डॉक्टर ही बनना चाहते थे ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; यदि कहूं हां, तो ? यह न होता तो हिन्दी अंग्रेजी साहित्य या फूलपत्ती का डाक्टर होता। पर यह हुआ नहीं, पहले झटके में ही मेडिकल कालेज ने खींच लिया और यह दिन देखने पड़े !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; (आश्चर्य से..) हिन्दी अंग्रेज़ी का..?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; हाँ, यार ! निराला के काव्य में ' छ ' का महत्व.. या केशर और इमली -एक तुलनात्मक अध्ययन की लस्सी फेंट लो.. एक डाक्टर तैयार ! कुश को हँसी बहुत आती है.. टेलिंग यू सीरियसली.. साहित्य वनस्पतिशास्त्र और मनोविज्ञान आज भी मेरे पसंदीदा विषय हैं !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; क्या बात है..! अच्छा ये बताइए ब्लोगिंग में ऐसा कुछ हुआ आपके साथ जो हमेशा याद रहे?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; ब्लोगिंग में अगस्त २००७ में आगमन हुआ था मेरा.. उसके बाद काफ़ी कुछ देखा है वैसे.. ब्लागिंग खुद ही मौज़ा ही मौज़ा है..&lt;br /&gt;बोले तोऽऽऽ.. हैंक होने से मेरे बंद पड़े ब्लाग पर अब तक आती हुई टिप्पणियाँ&lt;br /&gt;और बढ़ता हुआ पेज़रैंक और फ़ीड !! ज्ञान दद्दा इसे हल करिये !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्रीमती लवली गोस्वामी जी की रख़्शंदा को लेकर पुत्रीवत गुहार, डा. कविता की सदाशयता और निजता को लेकर उसकी चीख-पुकार..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और.. तब, जबकि सच नाम से चल रहे ब्लाग का सच सामने लाया था !&lt;br /&gt;बाद में मोहन वशिष्ठ ने इस नाम से एक ब्लाग बनाया है इन सबमें मज़ेदार तो कुछ भी नहीं है, बस याद रहेगा !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sdye26dKmGI/AAAAAAAABcs/AMdqjNRyuI0/s1600-h/ak.jpg"&gt;&lt;/a&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sdye26dKmGI/AAAAAAAABcs/AMdqjNRyuI0/s1600-h/ak.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 148px; height: 151px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sdye26dKmGI/AAAAAAAABcs/AMdqjNRyuI0/s400/ak.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5322303525886793826" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बकौल&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुमार&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; को अभी तक डिस्कवर करने की मश्शकत में हूँ, बड़ा दुरूह है अभी कुछ बताना । एक छोटे उनींदे शहर के चिकित्सक को यहाँ से आकाश का जितना भी टुकड़ा दिख पाता है, उसी के कुछ रंग साझी करने की तलब यहाँ मेरे मौज़ूद होने का सबब है । साहित्य मेरा व्यसन है और संवेदनायें मेरी पूँजी ! कुल मिला कर एक बेचैन आत्मा... और कुछ ?&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; आपकी टिप्पणिया बहुत उत्साहवर्धक होती है.. टिप्पणी करते वक़्त आप किस बात का ध्यान रखते है&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; पोस्ट के चरित्र के अनुसार थोड़े व्यक्तिगत स्पर्श से यह टिप्पणियां स्वतः बन जाती है । टिप्पणी गढ़ता नहीं हूं, बशर्ते पोस्ट ही आपको टिप्पणी में चिढ़ाने को न कहती हो !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;..&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; किसी ब्लॉग पर टिप्पणी करना कितना मत्वपूर्ण मानते है आप ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; कुछ कह नहीं सकता ! यह वर्गीकरण के हिसाब से है.. दुआ सलाम वाली रस्मी टिप्पणियाँ ,पूर्वग्रसित मन की टिप्पणियाँ, चाटुकार टिप्पणियाँ, और विवेचनात्मक टिप्पणियाँ इत्यादि सबके अपने गुण-दोष हैं, पर विचारों को आगे बढ़ाने वाली टिप्पणियों का सर्वथा अभाव है, और मातृभाषा को आगे बढ़ाने की गरज़ से तो कोई टिप्पणी अब तक तो न देखी, हाँ, यदाकदा नारे अवश्य दिख जाते हैं.. .तिस पर भी, इस दौर में टिप्पणी का महत्व है…एडसेन्स की परसी हुई थाली छिन गई तो क्या हिन्दी ब्लागर टिप्पणी-कोला से भी गये ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; ब्लॉगर्स में आप किसे पढ़ना अधिक पसंद करते है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; पा. ना. सुब्रहमणियम, रिज़वाना कश्यप और सुप्रतिम बनर्जी तो अभी याद आ रहे हैं, और भी कई हैं&lt;br /&gt;हिन्दीभाषी क्षेत्र से यदि डा. अरविन्द, हिमाँशु अभिषेक और पल्लवी इत्यादि का नाम न लूँ, मन ऎसा भी नहीं चाहता,&lt;br /&gt;पूजा मैडम तो ऎसे चौके छक्के लगा रहीं हैं, कि युनूस भाई शरमा कर लिहाज़ में पैवेलियन ही पहुँच गये ।&lt;br /&gt;पर अपने पठन को पसंद तक सीमित कर लूं तो आते हुए लोगों को कौन पढ़ेगा ? पोस्ट की विषयवस्तु, भाषाशिल्प प्रमुख है, ब्लागर गौण।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; और ख्यातिप्राप्त लेखको में मंटो से इतर आपके पसंदीदा लेखक ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;: इस्मत चुग़ताई.. ज़ीलानी बानो.. मंज़ूर एहतेशाम.. विमल मित्र, रेणु, भीष्म साहनी, समरेश बसु, सामरसेट माम. एमिले ब्राँटे.. अरे देखो मालगुडी डेज़ के लेखक का नाम ही नहीं याद आ रहा है .. हर लेखक अपने आपमें अच्छा है.. पढ़ने का धैर्य होना चाहिये !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; आप अपनी हर पोस्ट में आपकी धर्मपत्नी 'पंडिताइन' का भी ज़िक्र करते है.. क्या वे भी आपका ब्लॉग पढ़ती है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; हाँ, क्यों नहीं ? अपने पति की गतिविधियों की निगरानी करना हर पत्नी का अधिकार है, सो उनका पढ़ना लाज़िमी है । वह मेरी पहली आलोचक और प्रशंसक भी हैं.. एण्ड समटाइम्स सेंसर भी.. वैसे श्रीमान जी ! पंडित के घर पंडिताइन होती ही हैं.. पर कायस्थ के घर पंडिताइन होने पर इतनी उत्सुकता क्यों ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;: यह कुश फिर हँस रहा है.. ब्रदर हँसोगे तो तुम भी फँसोगे ! अनुराग और हम  'वीर ज़वानों' के ज़ोशीले गाने पर नाचेंगे.. फ़ुरसतिया सुकुल तालियाँ बजायेंगे समीर भाई कमर मटकाने की बुकिंग ले चुके हैं..पहले आओ तो पहाड़ के नीचे :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; हा हा चिंता मत करिए ज्यादा देर नहीं लगाऊंगा.. तो आपके बच्चे  भी पढ़ते है आपका ब्लॉग?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; बेटी यदा कदा ही पढ़ती है और बेटा चोरी छिपे पढ़ पाता है, क्योंकि चीन में ब्लागर नहीं खुलता या बैन है सो वह प्राक्सीसर्वर से जुगाड़ लगा कर पढ़ पाता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; अच्छा ये बताइए ज्ञान जी का नाम अक्सर आपकी पोस्ट में दिख जाता है.. क्या इसकी कोई खास वजह है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; श्री गुरुचरण सरोज रज़ निज मन मुकुरु सुधारि.. पढ़ते हैं, फिर ?&lt;br /&gt;उनके  मानसिक हलचल ब्लाग के ट्रांसलिटरेशन टूल में सेंधमारी कर मैंनें कई पोस्ट लिखी है । उन्होंनें ही बरहा का लिंक दिया, बात दीगर है कि अपने मन का आईना ही न पोंछ सका तो, चरणों के रज में कमल की आभा कैसे दिखे ? पर, आपके व्हाट एन आइडिया मन में यह इनडीजीनियस  प्रश्न उठा ही क्यों ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; अजी वो छोडिये.. ये बताइए ज्ञान जी का एक लेख था की कॉपी पेस्ट लेखन ज़्यादा नही चलता है.. क्या आप भी यही मानते है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; इसको न मानने का कोई ज़ायज़ कारण भी नहीं है । मौलिक लेखन, यदि वह असाधारण न हो, तो अपनी पहचान बनाने में समय लेता है.. जबकि ऎसा जुगाड़ु लेखन तात्कालिक रूप से तो हिट हो ही जाता है .. आगे ? अल्लाह जाने क्या होगा आगे ..&lt;br /&gt;संदर्भों एवं साक्ष्यों के तौर पर कट-पेस्टीय तकनीक आपकी सहायता तो कर सकती है, पर सोच की एक निश्चित दिशा नहीं दे सकती ।&lt;br /&gt;पर, भाई मेरे .. मेरा भेजा फ़्राई करने के प्रयास में आपकी पाठक दीर्घा उखड़ जायेगी ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उनको गुदगुदाने वाले सवाल दागिये.. पर दूसरी क़ाफ़ी भी मँगवाईये । मैं मीनाक्षी से तक़लीफ़ के लिये माफ़ी माँग लूँगा,&lt;br /&gt;पर एक कप क़ाफ़ी वसूलने की भी कोई हद होती है, न कुश ? :)&lt;br /&gt;बाई द वे, अब तक तो पहली भी नहीं आई है.. हा हा हा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; जी वह क़ाफ़ी..&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;: अरे, चिट्ठाचर्चाकार की तरह घिघिया क्यों रहा है, बोल दे ब्लैक क़ाफ़ी पीता हूँ, दूध चीनी नहीं..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; जी.. ब्लैक कॉफी??&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; अरे ब्लैक का ज़लवा है.. ब्लैक इज़ अ हैपेनिंग थिंग.. ओबामा के आने से क्या चारचाँद लगे हैं, ब्लैक में.. कि पूछो ही मत ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; हाँ ये तो सही है.. वैसे आपने ब्लॉग घोस्ट बसटर के बारे में बहुत कुछ लिखा था.. क्या आप उन्हे जानते है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; यार मानोगे नहीं तुम ? फिर मैं गरिष्ठ हो जाऊँगा.. यह सोच लो ! घोस्टबस्टर जी इतने हल्के नहीं हैं,  इसका ज़वाब एक कप क़ाफ़ी पर नहीं.. बल्कि नेस्ले इंडिया  के हज़ार - दो हज़ार शेयर हों, तभी कोई हिन्ट देने के विषय में सोचा भी जा सकता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; ये तो सोचना पड़ेगा.. खैर..! क्या आपको लगता है कि हिन्दी ब्लॉग जगत में गुट बने हुए है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; पूछते क्यों हैं ? आप स्वयं ही ऎसा न मानने का कोई एक कारण बताइये !&lt;br /&gt;मैं तो ज़वाब पेश करके संभावित पादुका-प्रहार से निवृत हो लूँगा, लेकिन आप लँगड़ाते हुये बारात लेकर जायें.. यह तो आपके दुश्मन भी न चाहते होंगे ।&lt;br /&gt;हा हा हा, डा. अनुराग, जरा सोचो यार कि यह तुम्हारे कँधे के सहारे उचक उचक कर सात फ़ेरे ले लें, तो इनका हक़ कितने प्रतिशत का बनेगा..&lt;br /&gt;यह तो समीर भाई और शिवकुमार जी भी नहीं हल कर पायेंगे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; आपने समीरलाल के लिये भाई और शिवकुमार जी के लिये...&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; कोई संबोधन नहीं, यही न ? मैं जानता था कि पकड़ा जाऊँगा । ई अनुरगवा बड़ी घुटी चीज है, अरे यार उन्होंने मेमो तो भेज दिया कि आपके साथ एक रिश्ता यही सही... पर क्या रिश्ता, यह उनकी एक सदस्यीय जाँच समिति, आज तक निर्धारित ही न कर पाई । हे हे हे हा हा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; अमूमन आपकी टिप्पणियो में सीधी सपाट बात कही गयी होती है... क्या कभी किसी ने इसकी शिकायत की आपसे ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;:&lt;/span&gt; आप तो ऎसे पूछ रहे हैं, जैसे कि ब्लागर पर गाँधीवादी बसते हों ? वह लिखें, ' कृपया मेरी अगली पोस्ट पर अवश्य पधार कर एक कटु टिप्पणी से अनुगृहीत करें ।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बार संगीता पुरी और मसिजीवी जी के बीच के कुछ कुछ हो गया .. देखने मैं भी पहुँच गया, टिप्पणी कर दी कि ब्लाग के निचले दायें कोने में पड़े तिरंगे को उचित सम्मान तो दीजिये, बोहन जी..फिर, क्या हुआ होगा ?  झुमका तो गिरना ही था । ज़ायज़ है भई, मैं देश के सम्मान का ठेकेदार न सही, पर  भी तो नहीं ?भला बताओ, मैं कोई अमेरीकन हूँ क्या ? जो अपने झंडे का कच्छा बना लें, या ट्रेंडी नाइट गाऊन, उन्हें कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; लगता है आपकी बातो को समझने के लिए अलग से डिक्शनरी लेनी पड़ेगी.. वैसे अभी आप ये कॉफी लीजिये.. बिना दूध वाली.. मैं अपने लिए दूध वाली कॉफी ही लूँगा.. मैं अपनी कॉफी बनाता हूँ.. तब तक आपको अनुराग जी के हवाले करते हूँ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; भई, यह क़ाफ़ी सुशील कुमार छौक्कर जी के नाम !&lt;br /&gt;कपाट खुलते ही,&lt;a href="http://kushkikalam.blogspot.com/2009/02/blog-post_25.html#comment-1885319502622392752"&gt;(पहली टिपण्णी)&lt;/a&gt; तैय्यार होकर क़ाफ़ी का आर्डर दे दिया.. देखो, कहीं ज़म्हुआई लेते लेते सो तो नहीं गये ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; जी बिल्कुल.. अनुराग जी.. आपके लिए भी एक स्ट्रोंग काफ़ी बना देता हु..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; शुक्रिया कुश..!  मेरे लिए शक्कर ज्यादा रखना..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो शुरू करने से पहले देखते है विडियो कांफ्रेंसिंग से हमारे साथ जुड़े &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनूप&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;जी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; '&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;फुरसतिया&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;'&lt;/span&gt; आपके बारे में क्या फरमा रहे है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनूप उवाच &lt;/span&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;/div&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyW8Fvh3II/AAAAAAAABcc/BpJq2a96vHg/s1600-h/anshkl.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 75px; height: 100px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyW8Fvh3II/AAAAAAAABcc/BpJq2a96vHg/s400/anshkl.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5322294818722929794" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नारी&lt;/span&gt; – &lt;span&gt;नितम्बों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अंतर्यात्रा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेखन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यादगार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बताने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;काफ़ी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकिन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लफ़ड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उन्होंने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऐसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिखे।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लागरों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लफ़ड़ों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जसदेव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सिंह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टाइप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शानदार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कमेंट्री&lt;/span&gt; &lt;span&gt;काफ़ी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दो&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;तीन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बजे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बीच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिखने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गजब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणीकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कभी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुंह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देखी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करते।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमेशा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रयास&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अलग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अक्सर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगाना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुश्किल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऐसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अबूझा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खासकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिट्ठाचर्चा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मामले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खतरा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इसका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नोटिस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमेशा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चर्चाकारों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्लास&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;लिखना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नियमित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रूप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अनियमित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एच&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;टी&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;एम&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;एल&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;सीखकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लाग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जिस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तरह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इतना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खूबसूरत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनाये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उससे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अन्दर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खूबसूरत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्त्री&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सौन्दर्य&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चेतना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विद्यमान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनसे&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लाग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निरंतर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;श्रंगार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करवाती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;.&lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उपस्थिति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लाग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जगत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिये&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;जरूरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उपस्थिति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;!&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शुक्रिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अनूप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ख़ुशी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शब्द&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहे&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बताइए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सोच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;ब्लॉग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेखन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाये&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;स्वान्त&lt;/span&gt;: &lt;span&gt;सुखाय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साधन&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुम्हार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिट्टी&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;सलीका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गढ़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लो&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;स्वान्त&lt;/span&gt;: &lt;span&gt;सुखाय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कपट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;फिर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डायरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिखो&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लाग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पासवर्ड&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डाल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;स्वान्त&lt;/span&gt;: &lt;span&gt;सुखाय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;छाती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्यों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पीटे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मरे&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;भाई&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;लिखोगे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऎसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सुगबुगाह्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;टिप्पणी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;आलोचना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सुझाव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्वातः&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सुखाय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;हुँह&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;: &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निजी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जीवन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इतने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्पष्टवादी&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;: &lt;span&gt;इससे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;खुद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नियंत्रण&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहता&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;मेरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पालिश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कमी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ज़रूर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;span&gt;पर&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;मेरा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पाठकों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रश्न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्पष्ट्वादी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्पष्टवादिता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;घबड़ाते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्यों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;कई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सार्थक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुण&lt;/span&gt; ( &lt;span&gt;सेंस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऑफ़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ह्यूमर&lt;/span&gt; ) &lt;span&gt;आपको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जींस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;विरासत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिला&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अर्जित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हुआ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;छोड़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यार&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;सार्थक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मतलब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मोडरेशन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अज़दहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समझा&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;अनमनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणियाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सार्थक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सार्थक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहलायी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाली&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अज़दहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पेट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;लोचा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;पहले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समझ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लूँ&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;तब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणीबाजी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बन्द&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रखा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इंग्लिश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लॉग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कोई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीमा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रेखा&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;नही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ...&lt;span&gt;स्त्री&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चेतना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ज्यादा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुखर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ..&lt;span&gt;अच्छे&lt;/span&gt; -&lt;span&gt;बुरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दोनों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रूपों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; ...&lt;span&gt;हिन्दी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लॉग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरोकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीमित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरोकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीमित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;अजी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरोकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;सरोकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बक्से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गया&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;हा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हा&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="border-top: 2px solid rgb(0, 0, 0); border-bottom: 2px solid rgb(0, 0, 0); padding: 5px 5px 2px 12px; float: right; width: 200px; height: 210px;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color: rgb(153, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;&lt;strong&gt;" बहुत खूब...उत्तम "&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="color: rgb(153, 0, 0);"&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt; कहने वाले  लोग क्या इसलिए ज्यादा है की  लिखने वाले भी  आत्म-मुग्ध है? आलोचना  स्वीकारते  नही ? या वास्तव में  एक "विजन" की कमी है? स्वस्थ विचारधारा का अभाव है?&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सबमे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कोई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ख़ास&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कारण&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;देखते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;..?&lt;br /&gt;&lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; : &lt;span&gt;चिट्ठाकारी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रतिमान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्थापित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बड़े&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भाई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बचपन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इन्ज़्वाय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इससे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पूछियेगा&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पूछते&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;लेकिन&lt;/span&gt; " &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खूब&lt;/span&gt;...&lt;span&gt;उत्तम&lt;/span&gt; " &lt;span&gt;कहने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाले&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इसलिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ज्यादा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;लिखने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;आत्म&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;मुग्ध&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;? &lt;span&gt;आलोचना&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;स्वीकारते&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;नही&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वास्तव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; "&lt;span&gt;विजन&lt;/span&gt;" &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कमी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;? &lt;span&gt;स्वस्थ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विचारधारा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभाव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आत्ममुग्ध&lt;/span&gt; ??? &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सैकड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शीर्षक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;याद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भाई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्टों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिंक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तरह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उवाचते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;..&lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;...&lt;span&gt;शर्म&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;आलोचना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;a href="http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/03/blog-post_27.html"&gt;27 मार्च की चिट्ठाचर्चा&lt;/a&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कविता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नोंक&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;झोंक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लीजिये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;उनकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मज़बूरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लीजिये&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;फिर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पूछियेगा&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;चिट्ठाकारी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आमोद&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;प्रमोद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;युग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विज़न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बेमानी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;स्वस्थ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विचारधारा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभाव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;किन्तु&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्वस्थ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विचारधारा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मीडिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तरह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मायोपिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शिकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मसलन&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तुमने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फँसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दिया&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;कुश&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;मसलन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खुद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;मैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लागजगत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हफ़्तों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दूर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;था&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिट्ठाचर्चा&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चुनावी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;माहौल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नेता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अधिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लागर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टर्रा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होंगे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इतनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उतनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीट&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पीएम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पीएम&lt;/span&gt;..&lt;span&gt;किसको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिन्ता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पार्टी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एज़ेन्डा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कौन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कितना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ईमानदार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;हिन्दी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लोगिंग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शैशव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अवस्था&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कितनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लम्बी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ?..&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;: &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शैशव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अवस्था&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह्ननी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहिये&lt;/span&gt;..&lt;span&gt;इसके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लाभ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देखो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;जैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भारत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गरीब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनाये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाँदी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;काटो&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;अलबत्ता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहूँगा&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हिन्दी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लागिंग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मूँछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रेख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निकल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;देखते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बेबात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मूँछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लड़ाई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;छिड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;span&gt;ऎई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हँसो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;खतरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाओगे&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निपट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेंगे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खतरों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बताइए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऐसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्यों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;६०००&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिट्ठो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;केवल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;६०&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पठनीय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहुँच&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुणवत्ता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;निरंतरता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभाव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;६१&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पढ़िये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कौन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रोकता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;वैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दूँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;६०००&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आंकड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भारत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रगति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आँकड़ों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ज़्यादा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जहां&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुणवत्ता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रश्न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.., &lt;span&gt;मैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मानता&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;मैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रैन्डमली&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिट्ठे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चुनता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हूँ&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;१०&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;६&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निराश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जैसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहा&lt;/span&gt;..  &lt;span&gt;अघोषित&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खेमे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ..&lt;span&gt;सार्थक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहसों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभाव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; ....&lt;span&gt;बुद्दिजीवी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इनसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कटते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ...&lt;span&gt;ओर&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;बाकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निजी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरोकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ऊपर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उठते&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;आपको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जरूरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहसे&lt;/span&gt;....&lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विचार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विमर्श&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देखने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सिर्फ़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उम्र&lt;/span&gt; &lt;span&gt;२४&lt;/span&gt; &lt;span&gt;घंटे&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;  !&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुटबाजी&lt;/span&gt; ;&lt;span&gt;क्यूं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;? &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्वाभाविक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पड़ोस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; 10 &lt;span&gt;अबोध&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बच्चों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मजा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कराने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निकलता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हूं।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इंदिरा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गार्डेन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहुंचते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहुंचते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाउमीन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुट&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;समोसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुट&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;मम्मी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बंट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अनुराग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तुम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;परेशान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करो।&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निर्गुटों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभिव्यक्ति&lt;/span&gt;  &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;बस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उसी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;स्तर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;जैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नवेले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कवि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;महोदय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कविता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;संग्रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बगल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दाब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोगों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बाँटते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फिरते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उल्टा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पुल्टा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अच्छा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;अति&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;उत्तम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;जिसकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जितनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उम्र&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रखना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहे&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;वैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तीन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दर्ज़न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कालजयी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;पुराने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुल्लों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्याज़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तरफ़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लपक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पड़ने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उम्मीद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्यों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भई&lt;/span&gt; ?&lt;br /&gt;&lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जैसा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;अघाये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;डकार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निकल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पड़ेगी&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;span&gt;हमारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुल्ले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्याज़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तलाशते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;..&lt;span&gt;प्याज़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बिना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अंडे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आमलेट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनाने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कला&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीखो&lt;/span&gt; ! &lt;span&gt;मेरे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ट्रेन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टाइम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;कुश&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बिलकुल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ज्यादा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेंगे&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चलने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देखते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चहेते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समीर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लालजी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अभी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वीडियो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कांफ्रेंसिंग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जुड़े&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;..  &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;समीर लाल  &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उवाच&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyXGHIAdFI/AAAAAAAABck/jPFJPgTff74/s1600-h/smr.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 91px; height: 107px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyXGHIAdFI/AAAAAAAABck/jPFJPgTff74/s400/smr.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5322294990892725330" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span&gt;डॉ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यूँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दिनों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चिट्ठे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आलेख&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिप्पणियों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;माध्यम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;संपर्क&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;. &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बेबाकीपन&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;साफगोई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अख्खड़पन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमेशा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भाता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहो&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;साफ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वरना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;निति&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चलते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सबके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चहेते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ब्लॉगर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गये&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;लोग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पाये&lt;/span&gt;.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;फिर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फोन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चर्चा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दौर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शुरु&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हुआ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ईमेल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;माध्यमों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बातचीत&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;. &lt;span&gt;जो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेखन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;वही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ईमेल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फोन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;एकदम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साफ&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;सीधी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सच्ची&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बात&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;इतनी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सच्ची&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शायद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अक्सर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोगों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बुरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;काम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रुक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हरफनमौला&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मस्त&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बाबा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इसकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;फिकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कहाँ&lt;/span&gt;?&lt;br /&gt;&lt;span&gt;मेरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नजर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जहाँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गुण&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तारीफेकाबिल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;, &lt;span&gt;वही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उन्हें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आज&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विंडोड्रेसिंग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाली&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दुनिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिसफिट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;ऑड&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मैन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आउट&lt;/span&gt;.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;मैं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;न&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सिर्फ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनके&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेखन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बल्कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उनका&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुरीद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हूँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बस&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सलाह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चाहत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टीस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पैदा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देती&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दूँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt;-&lt;span&gt;यार&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;कुछ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बनावटीपन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सीखो&lt;/span&gt;..&lt;span&gt;वरना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चलेगा&lt;/span&gt;!!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;लेकिन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चुप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जाता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हूँ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;!!!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;मेरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;असीम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शुभकामनाऐं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अल्लहड़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बिंदास&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेखक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;इंसान&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt;!!&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शुक्रिया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समीर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भाई&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;एई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेजबानों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तुम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दोनों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कितने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सरप्राइज़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बैठे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बाद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;धुरंधरो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;रहे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हो&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;कॉफी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिलेगा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपुन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पता&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; &lt;span&gt;था&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बढ़िया&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगा&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डा&lt;/span&gt;. &lt;span&gt;साहब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ख़ुशी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हुई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दिया&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;धन्यवाद्&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपका&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शिव&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिश्र&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;अनूप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समीर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लाल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बहुत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आभार&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;अपना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अमूल्य&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समय&lt;/span&gt; &lt;span&gt;देने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अनुराग&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;विद&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टू&lt;/span&gt; &lt;span&gt;होस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गेस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आप&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमारी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;और&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गिफ्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैम्पर&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;अमर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; :&lt;/span&gt; &lt;span&gt;शुक्रिया&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;वैसे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt; &lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;इसमें&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;कही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किताबे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;span&gt;क्या&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करूँगा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किताबें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेकर&lt;/span&gt; ? &lt;span&gt;इसी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पढ़&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मुआ&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;span&gt;पाठक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यदि&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ढाई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आखर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दें&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बेहतर&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;वरना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बैग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मेरी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नज़र&lt;/span&gt; &lt;span&gt;टिकी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;शब्द&lt;/span&gt; &lt;span&gt;गिरते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;वह&lt;/span&gt; &lt;span&gt;उठा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पोस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बना&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लेते&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हैं&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;काम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;चीज&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है&lt;/span&gt;, &lt;span&gt;यहाँ&lt;/span&gt; !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;तो&lt;/span&gt; &lt;span&gt;दोस्तों&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;था&lt;/span&gt; &lt;span&gt;हमारा&lt;/span&gt; &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टोस्ट&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;विद&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;टू&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;होस्ट&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पहला&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एपिसोड&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जिंदादिल&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सख्शियत&lt;/span&gt; &lt;span&gt;डा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अमर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कुमार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;कैसी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लगा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;आपको&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कॉफी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ये&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खुमार&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;जरुर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बताईएगा&lt;/span&gt;..  &lt;span&gt;फिर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मिलेंगे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जल्द&lt;/span&gt; &lt;span&gt;ही&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अगली&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कॉफी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;साथ&lt;/span&gt;.. &lt;span&gt;तब&lt;/span&gt; &lt;span&gt;तक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लिए&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नमस्कार&lt;/span&gt;..&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-5893397474121952087?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/5893397474121952087/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2009/04/blog-post.html#comment-form' title='37 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/5893397474121952087'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/5893397474121952087'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='टोस्ट विद टू होस्ट : एलो जी सनम हम आ गए..'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SdyW0vpKuBI/AAAAAAAABcU/XVVtE-pwFtc/s72-c/DSC00739.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>37</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-3182884757217959021</id><published>2009-03-17T18:21:00.000+05:30</published><updated>2009-03-17T18:22:18.062+05:30</updated><title type='text'>फर्स्ट लुक ऑफ़ काफ़ी विद कुश सीजन 2</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;नमस्कार दोस्तो..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जानता हू कॉफी क़ी महक कब से आ रही है.. पर कॉफी नही आ रही है.. आपको भी लग रहा होगा कि इतना टाइम क्यो लग रहा है.. अब क्या करे आचार सहिता लग चुकी है.. ऊपर से सारी पुलिस फोर्स नेताओ के पीछे लग गयी है.. इसी चक्कर में पल्लवी जी भी कही नज़र नही आ रही.. तो भैया जब आई पी एल पर गाज गिरने का चानस है तो कॉफी के बारे में क्या कहे..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिर हमारे मेहमान भी तो दमदार है.. उनकी सिक्योरिटी का भी तो ख्याल करना पड़ता है..&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sb-bLYi7zVI/AAAAAAAABas/HKD77sy5FU8/s1600-h/A_small_cup_of_coffee.JPG"&gt;&lt;img style="cursor: pointer; width: 217px; height: 162px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sb-bLYi7zVI/AAAAAAAABas/HKD77sy5FU8/s400/A_small_cup_of_coffee.JPG" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5314136705190317394" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर ये तो रही मस्ती मज़ाक वाली बात पर वाकई में थोड़ी देरी इस वजह से भी हो रही है कि &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा. अमर कुमार&lt;/span&gt; जी जो की हमारे मेहमान है, उनकी माताजी का स्वास्थ कुछ दिनो से ठीक नही है.. इसलिए वे समय नही दे पा रहे है .. हमारी यही कामना है कि जल्द से जल्द उनकी माताजी का स्वास्थ ठीक हो और वे हमे समय दे..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नया ले आउट तो आ ही चुका है ज़रा बतलाते जाइए.. और किस तरह से सुधारा जा सकता है.. सुझाव तो आपके बनते ही है.. तब तक यदि आप कोई प्रश्न पूछना चाहते है या फिर कोई आइडिया देना चाहते है.. तो इसी पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में दे सकते है.. आपके सभी सुझाव या सवाल इसी पोस्ट में शामिल किए जायेंगे.. &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;मैं&lt;/span&gt; और &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;डा. अनुराग&lt;/span&gt; बने रहेंगे आपके साथ.. आपकी किसी भी प्रकार के प्रश्नो का उत्तर देने के लिए और आपके सुझाओ का स्वागत करने के लिए.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तब तक के लिए नमस्कार &lt;br /&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-3182884757217959021?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/3182884757217959021/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2009/03/2_17.html#comment-form' title='32 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/3182884757217959021'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/3182884757217959021'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2009/03/2_17.html' title='फर्स्ट लुक ऑफ़ काफ़ी विद कुश सीजन 2'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Sb-bLYi7zVI/AAAAAAAABas/HKD77sy5FU8/s72-c/A_small_cup_of_coffee.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>32</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-3993511425875446781</id><published>2008-08-26T13:53:00.002+05:30</published><updated>2008-08-26T13:55:49.056+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश का नया एपिसोड</title><content type='html'>नमस्कार दोस्तो..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बार फिर हाज़िर है हम कॉफी विद कुशमें एक और ब्लॉगर के साथ.. जी हा दोस्तो इस बार हम आपको मिलवा रहे है.. 'एक उच्च कोटि के व्यंग्यकार, कलकता निवासी शिव कुमार मिश्रा जी से.. तो बस आप लोग भी कॉफी हाथ में लेकर बैठ जाइए.. और लुत्फ़ लीजिए इस मज़ेदार इंटरव्यू का..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूरा इंटरव्यू देखने के लिए &lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href="http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_23.html"&gt;यहा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; क्लिक करे&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-3993511425875446781?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/3993511425875446781/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_26.html#comment-form' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/3993511425875446781'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/3993511425875446781'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_26.html' title='कॉफी विद कुश का नया एपिसोड'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-1300554019390448281</id><published>2008-08-23T08:53:00.009+05:30</published><updated>2009-01-01T17:29:48.266+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश में मिलिए शिव कुमार मिश्रा जी से</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;नमस्कार दोस्तो..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बार फिर हाज़िर है हम &lt;a href="http://coffeewithkush.blogspot.com/"&gt;कॉफी विद कुश&lt;/a&gt;में एक &lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SLI1bjhm2BI/AAAAAAAAAqY/0HqdnSnuUlg/s1600-h/DSC00739.JPG"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SLI1bjhm2BI/AAAAAAAAAqY/0HqdnSnuUlg/s320/DSC00739.JPG" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5238308064094246930" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;और ब्लॉगर के साथ.. जी हा दोस्तो इस बार हम आपको मिलवा रहे है.. 'एक उच्च कोटि के व्यंग्यकार, कलकता निवासी &lt;strong&gt;&lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt; से.. तो बस आप लोग भी कॉफी हाथ में लेकर बैठ जाइए.. और लुत्फ़ लीजिए इस मज़ेदार इंटरव्यू का.. तो आपका ज़्यादा वक़्त ना लेते हुए.. मैं बुलाता हू श्री शिव कुमार जी को.. &lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;नमस्कार मिश्रा जी स्वागत है आपका कॉफी विद कुश में.. कैसा लगा आपको यहा आकर?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी: &lt;/strong&gt;धन्यवाद कुश. बहुत बढ़िया लग रहा है. कितने दिनों की साध आज जाकर मिटी. असल में जब भी दूसरों को तुम्हारी काफ़ी पीकर मस्त होते देखा, यही बात मन में आती थी कि पता नहीं कब पीने का मौका मिलेगा? और देखो कि आज तुमने बुला ही लिया. बहुत खुश हूँ. जल्दी से काफ़ी मंगाओ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जी बिल्कुल! ये लीजिए आपकी गरमा गरम कॉफी तैयार है..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; वाह लाजवाब.. वाकई मज़ा आ गया..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सबसे पहले तो ये बताइए की ब्लॉगिंग में कैसे आना हुआ आपका?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  ये तो मज़बूरी की वजह से हुआ. हम कहीं जा नहीं पाते. हम केवल आने के आदी हैं. लिहाजा ब्लॉग-जगत में आना लगा रहता था. &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञान भइया&lt;/a&gt; ने ब्लॉग बनाया था और हम वहां टिप्पणी करने आते थे. फिर एक दिन उन्होंने कहा कि ब्लागिंग में आ जाओ. मैंने सोचा टिप्पणी करने आते ही हैं. ब्लागिंग करने भी आ जाते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पांडे जी के साथ &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;साझा ब्लॉग&lt;/a&gt; बनाने की ज़रूरत क्यो महसूस हुई?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी:&lt;/strong&gt;  साझा ब्लॉग बनाने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि मुझे कुछ पता ही नहीं था ब्लागिंग के बारे में. ज्ञान भइया को तब तक कुछ-कुछ पता हो गया था. उन्हें लगा कि वे भी साथ रहेंगे तो टेक्निकल बातें बता सकेंगे. फोटो लगाना, पोस्ट सजाना वगैरह मैं नहीं कर पाटा था.&lt;br /&gt;वैसे एक और बात है. हमदोनों हिन्दी ब्लागिंग के इतिहास में अमर होना चाहते थे. हमें इस बात की ललक थी कि हमारा ब्लाग इतिहास में हिन्दी के प्रथम साझा (मतलब दो लोगों का) ब्लॉग के रूप में दर्ज हो. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर आपको एक और जोड़ी ब्लॉग बनाने का मौका मिले तो किसके साथ बनाएँगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;&lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/"&gt;नीरज भइया&lt;/a&gt; &lt;/strong&gt;(नीरज गोस्वामी जी) के साथ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बचपन के बारे में तो हमने सबसे सवाल किए है.. ये बताइए आपका बचपन कायस गुज़रा?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  गुजरा कहाँ? वो तो हमने गुजार लिया. गुल्ली-डंडा, हॉकी और क्रिकेट वगैरह खेलकर और थोड़ी पढाई करके. हमें बचपन गुजारने का बड़ा शौक था. जब छोटे थे तो हमेशा यही सोचते कि कब बड़े होंगे? उस समय इस बात का रोना है. अब इस बात का रोना है कि कभी छोटे नहीं हो सकेंगे. इंसान का जीवन रोने के लिए ही बना है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप सारी शराराते अपनी ब्लॉग पर ही करते है या बचपन में भी करते थे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  लोगों ने हमें शरारती नहीं समझा कभी.. हमारे ऊपर अच्छे बच्चे होने की तोहमत लगा दी. वैसे शरारतों के नाम पर हम लोगों के बगीचे से आम तोड़ लेते थे.. कभी-कभी किसी के घर पर चढ़ी हुई ककड़ी की बेल पर बैठी ककड़ी तोड़ लाते थे.. गाँव में रहने वाला बच्चा शरारतों के मामले में बड़ा गरीब होता है. हाँ, कभी-कभी किसी से मार-पीट कर लेते थे..&lt;br /&gt;क्रिकेट भी खेलते थे तो गाँव के मैदान में. मैदान में इतनी जगह कि गेंद भी खुश रहती थी. बड़ा पछतावा होता है कि बचपन में क्रिकेट खेलकर किसी के घर की खिड़की का शीशा नहीं तोड़ सके.. &lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बचपन में किस बात से डर लगता था?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; अंधेरे से.. गाँव का मकान ऐसा था कि द्वार और घर के आँगन के बीच एक बड़ा सा हाल था. शाम होने के बाद जब भी उससे गुजरते थे तो डर लगता था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपके छोटे भाई साहब ने स्वेटर के बारे में प्रश्न पूछने को कहा है? ज़रा बताइए उस बारे में..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  मेरा छोटा भाई दार्जिलिंग गया था. वहां से मेरे लिए एक स्वेटर ले आया था. मुझे देते हुए बोला; "किसी ख़ास दिन पहनना इसे." स्वेटर बहुत पसंद था मुझे. जिस दिन मैं अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने घर से सुबह-सुबह निकला, उसदिन मैंने वो स्वेटर पहन लिया.&lt;br /&gt;जब मैं अपनी शादी के बारे में उसे बता रहा था तो मुझे लग रहा था कि शादी के बात सुनकर वो भौचक्का रह जायेगा. लेकिन मेरी बात सुनकर हंसने लगा और बोला; "मुझे मालूम है. तुमने मेरा दिया हुआ स्वेटर पहना उसी दिन मुझे पता चल गया था." उसकी ये बात मैं कभी नहीं भूलता..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; दोस्तो की नज़र में शिव कुमार मिश्रा कैसे है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी:&lt;/strong&gt;  मैं दोस्तों से पूछने का रिस्क नहीं उठाता. कभी नहीं पूछता कि वे मेरे बारे में क्या सोचते हैं? इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि सबकुछ ढंका-तुपा रहता है. गलतफहमी दोनों की नहीं टूटती. न दोस्तों की और न मेरी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/02/blog-post_25.html"&gt;दुर्योधन की डायरी&lt;/a&gt; के बारे में बताइए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  एक दिन आफिस में बैठे हमलोग एक रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करने के बारे में सोच रहे थे. जिस तरह से रीयल इस्टेट के दाम बढे हैं, उसके बारे में चर्चा करते हुए मैंने कहा; "दुर्योधन ने पांडवों के पाँच गाँव देने की मांग शायद इसलिए ठुकरा दी थी कि इन पाँच गावों में एक गुडगाँव भी था." मेरी इस बात विक्रम और सुदर्शन खूब हँसे. ये कोई चार बजे की बात होगी. और मैंने उसी दिन करीब एक घंटे बाद पहली बार &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/02/blog-post_25.html"&gt;दुर्योधन की डायरी - पेज ३३५०&lt;/a&gt; लिखा. उसके बाद लिखते गए.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; दुर्योधन के अलावा और भी किसी की डायरी है आपके पास?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; नहीं, डायरी तो नहीं है. हाँ एक दिन मैंने ब्लॉगर हलकान 'विद्रोही' की डायरी के कुछ पेज जरूर पढ़ लिए थे. उसमें जो कुछ पढने को मिला था उसे मैंने अपनी एक पोस्ट में छापा था. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हाल ही में आपको मिली &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/08/blog-post_18.html"&gt;जेंटल मैन की उपाधि &lt;/a&gt;के बारे में क्या कहेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  क्या कहें, कुश? मानव शरीर धारण किया है तो उपाधियों से बच पाना मुश्किल काम है. वैसे भी मेरा जेंटलमैनत्व को प्राप्त होना अनूप भइया को नहीं सोहाया और उन्होंने अपनी कानपुरी व्याख्या से साबित कर दिया कि जेंटलमैनी एक छलावा है.  नतीजा ये हुआ कि जेंटलमैनी एक दिन में ही टें बोल गयी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी पोस्ट का एक किरदार &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/07/blog-post_30.html"&gt;'सुदामा'&lt;/a&gt; बहुत लोक प्रिय हुआ.. उसके बारे में क्या कहेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; बड़े बेचारे किस्म के इंसान थे सुदामा जी. लेकिन जब से उन्होंने गुरुदेव का सिलिंडर ब्लैक किया है, वे मानवीय समर्थता की अद्भुत ऊंचाई पर पहुँच गए हैं. अब तो क्लर्क से लेकर पत्रकार और पीएच डी के स्टुडेंट तक बन जाते हैं. ठीक उसी सहजता से जैसे हिन्दी फिल्मों का हीरो कुछ भी बन सकता है. सुदामा अब बहुत आगे निकल चुके हैं. फरीदाबाद तक.   &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; राजेश रोशन जी के ब्लॉग पर एक जुमला लिखा था.. उस पर आपने &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/06/blog-post_13.html"&gt;एक पोस्ट &lt;/a&gt;भी लिखी, उस बारे में बताइए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  अब पोस्ट लिख ही दी तो और क्या नया बताऊँ, कुश? वैसे मेरा मानना है कि किसी को छोटा कह देना उचित नहीं है. और अगर आप उस उस इंसान के बारे में केवल उसके लेखन से जानते हैं तो कोई भी जजमेंट पास करना अच्छी बात नहीं. खैर, मुझे अब राजेश रोशन जी से शिकायत नहीं है. उनका सेंस ऑफ़ जजमेंट शायद उन्हें यही करने को कहता है. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या ये सच है की &lt;a href="http://www.balkishan.blogspot.com/"&gt;बाल किशन जी&lt;/a&gt; जब भी आपके पास आते है.. आपको कोई नया टॉपिक मिल जाता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  नहीं ये सच नहीं है. सच तो ये है कि जब भी मेरे पास कोई टॉपिक नहीं होता तो मैं उन्हें अपने ऑफिस बुला लेता हूँ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आपने एक पोस्ट लिखी थी की कुछ ब्लॉगरो ने अपनी &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/2008/08/blog-post_11.html"&gt;प्रोफाइल में दर्शन शास्त्र &lt;/a&gt;का प्रयोग किया है.. क्या आप इसे ग़लत समझते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  मैंने ग़लत नहीं समझा. वो तो लालमुकुंद जी ने ग़लत समझा था. मैंने तो केवल उनकी आपत्ति पर पोस्ट लिखी थी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अब तक आप कितने ब्लॉगर्स से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके है? क्या खास लगा आपको उनमे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; अभी तक मैं &lt;strong&gt;प्रत्यक्षा जी&lt;/strong&gt; से,  &lt;strong&gt;प्रियंकर भइया &lt;/strong&gt;से, &lt;strong&gt;बालकिशन&lt;/strong&gt; से, &lt;strong&gt;ज्ञान भइया &lt;/strong&gt;से और &lt;strong&gt;मीत साहब &lt;/strong&gt;से मिला हूँ. सभी 'जेंटलमैन' हैं. इनलोगों में सबकुछ ख़ास ही है. अगर ख़ास नहीं होता तो ये लोग ब्लॉगर कैसे बनते? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या आपको लगता है की ब्लॉगर्स को इस तरह से मिलते रहना चाहिए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  हाँ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप अधिकतर व्यंग्य ही लिखते है, कितना मुश्किल होता है व्यंग्य लिखना?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  जरा भी मुश्किल नहीं है. व्यंग तो बहुत सस्ते में मिल जाता है. वैसे, इसका मतलब ये मत समझना कि मैं किसी को कम पैसे देकर व्यंग लिखवा लेता हूँ. इसका केवल इतना मतलब है कि व्यंग बिखरा पड़ा है. जहाँ देखो, व्यंग ही व्यंग है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगर्स में किसके व्यंग्य आप ज़्यादा पढ़ते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  &lt;strong&gt;अनूप शुक्ल जी&lt;/strong&gt;, &lt;strong&gt;आलोक पुराणिक जी&lt;/strong&gt;, &lt;strong&gt;पल्लवी जी&lt;/strong&gt; और &lt;strong&gt;नीरज बधवार&lt;/strong&gt; के. मुझे एक बात अच्छी नहीं लगती कि &lt;strong&gt;काकेश जी&lt;/strong&gt; आजकल नहीं लिखते.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अधिकांश ब्लॉगरो को आपसे टिप्पणी ना मिलने की शिकायत रहती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  नहीं. किसी ने मुझसे शिकायत नहीं की. एक दिन एक ब्लॉगर बता रहे थे कि अच्छा है जो आप मेरी पोस्ट पर टिप्पणी नहीं करते. उन्होंने बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि एक पोस्ट पर आपने सबसे पहली टिप्पणी की थी. नतीजा ये हुआ कि उसपर और कोई टिप्पणी नहीं आई.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगिंग में आपके लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  ब्लागिंग के टेक्निकल आस्पेक्ट की जानकारी. करीब एक साल तीन महीने बाद पिछले महीने ही मैंने लिंक लगाना सीखा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; यही कि इस जगत में सब हिन्दी में लिखते हैं और हिन्दी में पढ़ते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉग पर कुछ लिखते समय आप क्या ध्यान में रखते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी:&lt;/strong&gt; टिप्पणियां. पिछली पोस्ट में जितनी मिली थीं, उतनी मिलेंगी तो? हे भगवान एक ज्यादा दिला देना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; किसी ब्लॉग पर टिप्पणी करना कितना ज़रूरी है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  हम अभी पाठक ढूंढ रहे हैं. दूसरी बात ये कि अभी शुरुआती दौर में है हिन्दी ब्लागिंग. बहुत सारे लोगों को इसके टेक्निकल आस्पेक्ट्स नहीं मालूम हैं. ज्यादातर लोगों के पास जानकारी नहीं रहती कि उनके ब्लॉग पर कौन लोग आए. ऐसे में अगर टिप्पणियां मिल जाएँ तो लिखने वाले को थोड़ी राहत मिलती है कि लोग उसका लिखा हुआ पढ़ रहे हैं.&lt;br /&gt;नए आए लोगों का हौसला बढ़ाना बहुत ज़रूरी है. और कुछ पढने के बाद अगर अच्छा लगा तो क्या अच्छा लगा, ये बता देना एक अच्छा काम है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आजकल आपके नाम पर बहुत &lt;a href="http://hindini.com/fursatiya/?p=501"&gt;चिट्ठिया&lt;/a&gt; भी आ रही है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  लोग चिट्ठी लिखना भूल गए थे. मुझे चिट्ठी लिखकर लोग चिट्ठी लिखने की नेट प्रैक्टिस कर रहे हैं. वैसे, मैंने अगर जवाब देने का मन बना लिया तो थोड़ी प्रैक्टिस मेरी भी हो जायेगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत का भविष्य कैसा देखते है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  भविष्य तो उज्जवल ही दिखाई देता है. हमें अपनी भाषा में कुछ कहने का मौका मिल रहा है. हम कोशिश करके अच्छा लिखें तो मामला आगे बढेगा. हाँ, ये बात ज़रूर है कि लिखनेवाले और पढने वाले, दोनों मेच्योर्ड हो जाएँ तो बहस वगैरह चलाने का औचित्य रहेगा. अगर तीन-चार लोग जो एक-दूसरे को जानते हैं, बहस चलायें तो ऐसी बहस का कोई ख़ास मतलब नहीं है.  हाँ, अगर पाठकों की संख्या बढ़े. बहस में भाग लेने वालों की मेच्योरिटी बढ़े तो बहस चलने का मतलब बनेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलिए अब चलते है हमारे अगले राउंड की तरफ और देखते है की पाठको ने आपसे क्या सवाल किए है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्‍लॉगजगत में इन दिनों उनकी सज्‍जनता की चर्चा खूब है। वे खुद से भी अधिक सज्‍जन किन्‍हीं को मानते हैं क्‍या, यदि हां तो किन्‍हें - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://khetibaari.blogspot.com/"&gt;अशोक पाण्डेय जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  अशोक पाण्डेय जी को. जिस देश में कई देश होने के दावे किए जा रहे हैं, और ये बताया जा रहा है कि इंडिया अलग है और भारत अलग. साथ में ये भी बताया जा रहा है कि इन्टरनेट जैसे हथियार इंडिया के हाथ में हैं. अब अगर अशोक जी ऐसे हथियार का इस्तेमाल करके 'भारत' की समस्याओं को उठा रहे हैं तो उनसे बड़ा सज्जन और कौन हो सकता है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सिर्फ ब्लॉग जगत के चर्चों के बारे में ही लिखना क्यों पसंद करते हैं। क्यों सिर्फ कुछ ही ब्लॉगर्स के बारे में लिखते हैं। कुछ अलग क्यों नहीं और अकेले अकेले क्यों मीट ऑर्गनाइज करते हैं? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://poemofsoul.blogspot.com/"&gt;नीतीश राज जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; नहीं-नहीं नीतीश जी, ऐसी बात नहीं है.  मैं ब्लागर्स के बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखता. मैं ब्लॉग जगत के चर्चों के बारे में भी लिखना पसंद नहीं करता. जहाँ तक कुछ अलग लिखने की बात है तो मैं आजतक यही समझता था कि मैंने बहुत सारे विषयों पर लिखा है. खासकर हर समसामयिक मुद्दे पर. लेकिन मेरी इस गलतफहमी को नीतीश भाई ने तोड़ दिया. ग़लतफहमी टूटनी ही चाहिए. एक बार फिर से सोचने की जरूरत है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शिव भाई, आपके शहर कलकता की सबसे प्रिय बात क्या लगती है आपको ? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://www.lavanyashah.com/"&gt;लावण्या जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  बहुत कठिन सवाल है लावण्या जी. मुझे पूरा शहर अच्छा लगता है. सबसे प्रिय एक बात जो है वो है यहाँ के लोगों का संस्कृति के प्रति प्यार.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शिव बाबू यह बतायें कि ब्लॉगर्स के संबंध में ऐसा कौन सा प्रश्न उनसे पूछा जा सकता है जिसका जबाब देने में उनके पसीने छूट जायेंगे और उसका जबाब वो क्या देंगे? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर लाल जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  सवाल है, "ये बेनामी टिप्पणी तो तुम्हारे आई पी एड्रेस से मिली है. तुम अब भी कहोगे कि तुम बेनामी कमेन्ट नहीं करते?"  जवाब होगा; "क्या समीर भाई? मैं आपकी कितनी इज्ज़त करता हूँ. मैं ऐसा लिख सकता हूँ भला? किसी ने मेरा आई पी एड्रेस चोरी कर लिया होगा."&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; भद्रपुरुष ने अपनी याददाश्त में पिछली अभद्रता किससे, कब और क्यों की थी"? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://bastercg.blogspot.com/"&gt;बस्तर&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  ये सवाल तो किसी भद्रपुरुष से है. शायद अगले एपिसोड के किसी ब्लॉगर से. वैसे कौन आ रहा है अगले एपिसोड में, कुश?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आख़िर ऎसा कौन सा यक्षप्रश्न है.. जो केवल आप पर ही लागू हो रहा है, और तुर्रा यह कि.. पूछा भी न जाये, बिन पूछे रहा भी न जाये - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://binavajah.blogspot.com/"&gt;डा. अमर कुमार जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  क्या कह रहे हैं? यक्ष अभी तक है इस भूमंडल पर!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शिव के साथ व्यंगकार का टैग चिपक लिया है। वह दूर हो सकता है क्या? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञानदत्त जी&lt;/a&gt; &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; जी भैया, मैं प्रयासरत हू..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शिवजी, नये ब्लॉगरों को हिट पोस्टें देने के लिए क्या गुरुमंत्र देंगे? उत्तर में गीता का उपदेश नहीं चलेगा। - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://www.blogger.com/profile/04825484506335597800"&gt;सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; हिट पोस्ट से क्या मतलब है सिद्धार्थ जी का? हिट का मतलब ये तो नहीं कि आपने लिखा और लोग आकर उसे अपनी टिप्पणियों से हिट कर गए? टिप्पणियों की हिट से पोस्ट और ब्लॉगर दोनों धरासायी.&lt;br /&gt;वैसे हिट का मतलब अगर सुपरहिट, मेगाहिट है, जैसे फिल्में होती हैं तो मैं यही सोचता हूँ कि कोई गुरुमंत्र नहीं है. कौन से पोस्ट 'हिट' जाए और कौन सी सुपरहिट, कोई नहीं जानता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलिए पाठको के सवाल तो बड़े दिलचस्प रहे.. अब चलते है हमारे वन लाइनर राउंड की तरफ.. और इस बार एक वन लाइनर राउंड में आपको एक लाइन में बताना है हमारे ब्लॉगर मित्रो के बारे में..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt; -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; टिप्पणी सम्राट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पांडे जी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;भइया.&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://pangebaj.com/"&gt;पंगेबाज&lt;/a&gt; -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt; एक बेहतरीन इंसान.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://www.balkishan.blogspot.com/"&gt;बॉल किशन जी&lt;/a&gt;-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  डिप्टी टिप्पणी सम्राट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://kuchehsaas.blogspot.com/"&gt;पल्लवी जी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  संवेदनशील 'हुकुम'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://hindini.com/fursatiya/"&gt;अनूप जी&lt;/a&gt; :&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  मौज सम्राट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://kushkikalam.blogspot.com/"&gt;और हम&lt;/a&gt;, अजी हमारे बारे में भी तो बताइए..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  आईडिया सम्राट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब चलते है हमारे अगले राउंड खुराफाती सवालो की तरफ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पुलिस का फ़ोन नंबर 100 क्यो होता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  इशारा है. मतलब सौ से नीचे? कभी नहीं.  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; खिस्यानी बिल्ली खंबा ही क्यो नोचती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  बिल्ली को हर उस चीज से प्यार नहीं होता जिस चीज से कुत्ते को प्यार होता है. दुश्मनी पुरानी है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि किसी दिन अंतरिक्ष से एक ऊडन तश्तरी आपके घर पर उतरे तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  समीर भाई के स्वागत में पलकें बिछा देंगे. साथ में नारा....धन्यभाग हमारे जो समीर भाई पधारे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; गंजे के सर पर बाल क्यो नही होते?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  फिसल कर गिर पड़ते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि आपको एक ब्लॉग को डिलीट करने का मौका मिले तो किसका ब्लॉग डिलीट करेंगे? और क्यो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  ऐसा सवाल मत करो. मैं एक ब्लॉग का नाम लूँगा तो बाकी के नाराज़ हो जायेंगे कि उनके ब्लॉग का नाम क्यों नहीं लिया? मैं किसी को नाराज़ नहीं करना चाहता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलते चलते एक और प्रश्न..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हमारे ब्लॉगर मित्रो से क्या कहना चाहेंगे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  कुश की काफ़ी पीने आईये. काफ़ी तो अच्छी है ही, कुश की 'मेहमानियत' भी अद्भुत है. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शुक्रिया शिव जी आपने हमारा निमंत्रण स्वीकार किया और कॉफी पीने आए.. ये लीजिए हामरी तरफ से एक गिफ्ट हेम्पर.. घर जाकर खोलिएगा.. और अपनी अगली पोस्ट में बताएगा की क्या मिला आपको?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिव जी :&lt;/strong&gt;  यहीं खोलने दो न यार. क्या कहा? यहाँ नहीं! अच्छा ठीक है. घर ले जाकर खोलूँगा और उसपर एक पोस्ट भी लिखूंगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का एक और एपिसोड एक बेजोड़ प्रतिभा के धनी शिव कुमार मिश्रा जी के साथ.. उमीद है आपको पसंद आया होगा.. अगले एपिसोड में हम फिर मिलेंगे.. हमारे ही बीच के एक और ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए... 'कीप ब्लॉगिंग'... &lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-1300554019390448281?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/1300554019390448281/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_23.html#comment-form' title='39 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/1300554019390448281'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/1300554019390448281'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_23.html' title='कॉफी विद कुश में मिलिए शिव कुमार मिश्रा जी से'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SLI1bjhm2BI/AAAAAAAAAqY/0HqdnSnuUlg/s72-c/DSC00739.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>39</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-9176576223685227542</id><published>2008-08-22T19:28:00.002+05:30</published><updated>2008-08-22T19:45:06.423+05:30</updated><title type='text'>जानिए कौन है कॉफी विद कुश के अगले मेहमान</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SK7Iw_BcZ6I/AAAAAAAAApY/7hHgX_eovrI/s1600-h/coffee_skm.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SK7Iw_BcZ6I/AAAAAAAAApY/7hHgX_eovrI/s320/coffee_skm.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5237344160555231138" /&gt;&lt;/a&gt;नमस्कार दोस्तो..  &lt;br /&gt;इस बार &lt;a href="http://coffeewithkush.blogspot.com/"&gt;कॉफी विद कुश &lt;/a&gt;में हम लेकर आने वाले है एक ऐसा ब्लॉगर जिनसे पूरा ब्लॉग जगत परेशान है.. जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू..  &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt; के शब्दो में 'एक उच्च कोटि के व्यंग्यकार' कलकता निवासी &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा&lt;/a&gt; की..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो तैयार रहिए पिछले पंद्रह दिनो के प्रयास से चले आ रहे इस इंटरव्यू के लिए.. सोमवार दिनांक 25 अगस्त को आपके अपने ब्लॉग &lt;strong&gt;कॉफी विद कुश &lt;/strong&gt;पर..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और हाँ देर मत करिए जल्द से जल्द लिख भेजिए आपके सवाल जो आप पूछना चाहते है शिव कुमार मिश्रा जी से.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तब तक के लिए आप आनंद लीजिए एक नये कम्यूनिटी ब्लॉग &lt;strong&gt;&lt;a href="http://nesbee.blogspot.com/"&gt;नेस्बी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt; का..&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-9176576223685227542?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/9176576223685227542/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_22.html#comment-form' title='15 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/9176576223685227542'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/9176576223685227542'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_22.html' title='जानिए कौन है कॉफी विद कुश के अगले मेहमान'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SK7Iw_BcZ6I/AAAAAAAAApY/7hHgX_eovrI/s72-c/coffee_skm.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>15</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-586016767158720949</id><published>2008-08-03T10:07:00.009+05:30</published><updated>2008-08-04T12:11:16.376+05:30</updated><title type='text'>एक मुलाकात अनोनामस से.. (कॉफी विद कुश)</title><content type='html'>नमस्कार दोस्तो, &lt;br /&gt;स्वागत है आपका &lt;a href="http://coffeewithkush.blogspot.com"&gt;'कॉफी विद कुश' &lt;/a&gt;के नौवें एपिसोड में.. आज हम आपको मिलवाने वाले है एक ऐसी सख्शियत से जिनसे परिचित तो सब है मगर नाम कोई नही जानता.. ब्लॉगर्स की डिमांड पर हम लेके आए है हम सबके प्यारे &lt;strong&gt;"अनोनामस जी"&lt;/strong&gt; को ..जो यहा वहा कही पर भी टिप्पणी देने पहुँच जाते है.. टिप्पणियो में तो कई बार आपकी इनसे मुलाकात हुई होगी.. पर आज पहली बार &lt;strong&gt;कॉफी विद कुश &lt;/strong&gt;के मंच पर हम आपको मिलवाते है खुद &lt;strong&gt;अनोनामस जी&lt;/strong&gt; से..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; नमस्कार अनोनामस जी.. स्वागत है आपका कॉफी विद कुश में..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश, बहुत अच्छा लगा की हमे भी कोई कॉफी पिलाने वाला है.. हमे तो लगा की आप सिर्फ़ नामदार ब्लॉगरो को ही कॉफी पिलाते है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; नही नही ऐसी बात नही हमारी कॉफी तो सबके लिए है.. बस जो पहले मिल जाए उसी को पकड़ लेते है..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; फिर भी आप एक अच्छा कार्य कर रहे है, मुझे खुशी हुई इस तरह का अनूठा प्रयोग देखकर.. मगर आप कुछ ब्लॉगर्स को मत बुलाइएगा वो यहा आने के लायक नही है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अच्छा? और वे ब्लॉगर कौन है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; इतनी जल्दी सब कुछ बोल दु, बिना कॉफी पिलाए भगाना चाहते है क्या? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरे नही नही, आप तो हमारे मेहमान है.. ये लीजिए आपकी गरमा गरम कॉफी तैयार है.. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया, वाह बड़ी शानदार कॉफी है ये तो..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; वैसे तो मैं सबसे यही सवाल करता हू की उन्हे कौनसे ब्लॉग पसंद है.. पर मुझे लगता है आपको कोई ब्लॉग पसंद नही तो आप अपनी नापसन्द वाले ब्लॉग बता दीजिए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; नही जी, ऐसी बात नही है की मुझे कोई ब्लॉग पसंद नही.. मैं &lt;strong&gt;अशोक पांडे जी&lt;/strong&gt; का कबाड़खाना पढ़ता हू, &lt;strong&gt;राजेंद्र त्यागी जी&lt;/strong&gt; का ओशो चिन्‍तन मुझे पसंद है.. &lt;strong&gt;आलोक पुराणिक जी&lt;/strong&gt; की अगड़म बगड़म मुझे पसंद है.. &lt;strong&gt;राज भाटिया जी&lt;/strong&gt; का शिकायत वाला ब्लॉग बढ़िया है.. &lt;strong&gt;अमर कुमार जी &lt;/strong&gt;का बच्चो वाला ब्लॉग बढ़िया है.. अजीत जी का शब्दो का सफ़र..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरे वाह काफ़ी लंबी पसंद है आपकी.. और कौन से ब्लॉग नही पसंद है आपको? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; हा हा हा इतनी आसानी से पकड़ में नही आने वाले हम.. हा मगर हमको मैडम जी का ब्लॉग पसंद नही है.. फालतू की बात करती है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ये मैडम जी कौन है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी इस अनाम से नाम पूछना चाह रहे है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पर आपका कोई नाम तो रखा होगा आपके माँ बाप ने&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; जी हा रखा तो था पर वो हमने डूबा दिया.. इधर उधर घटिया से घटिया शब्दो में टीपिया टीपिया के.. सो अब लेना उचित नही लगता.. अब तो जब भी अपना नाम लेता हू तो लगता है गाली है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ये तो बड़ी विकट समस्या है.. खैर आपके बचपन के बारे में बताइए?  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी &lt;/strong&gt;: बचपन सारा अनामी में बिता.. अंधेरे में जामुन तोड़ के खाना, चंदा नही देने वाले के घर के दरवाजे पे गालिया लिखना.. लड़कियो के घरो में ब्लॅंक कॉल करना.. यू कह लीजिए अब तक जीवन हमने गुमनामी में ही बिताया है.. और यही आशा करते है की बाकी का भी यू ही बीते..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ज़रूर हम आशा करते है आपकी गुमनामी यूही बरकरार रहे.. अच्छा एक बात बताइए &lt;strong&gt;समीर जी&lt;/strong&gt; को आपने क्यो &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/2008/06/blog-post_16.html"target="_blank"&gt;&lt;strong&gt;कमेंट&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt; किया था वो तो सबके चहेते है..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; यही तो बात है की वो सबके चहेते है और हमे कोई पूछता ही नही.. बस खुन्नस के मारे कमेंट दे डाला.. पर वो भी बड़े चालक है उन्होने ब्लॉग पर टिप्पणी सक्षम लगा रखा है.. पर उन्होने जब दूसरे दिन &lt;strong&gt;हश हश नागराज वाली पोस्ट&lt;/strong&gt; लिख डाली तो हम शर्म से डूब कर पानी पानी हो गये.. हमे लगा ग़लत आदमी से पंगा ले लिया है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो इसका मतलब आपको टिप्पणी देने के बाद पछतावा भी होता है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; जी हा कभी कभी होता भी है पर क्या करू आदत से लाचार जो हू.. दिल है की मानता ही नही..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपने मेरी एक दूसरे ब्लॉग पर लिखी गयी पोस्ट पर भी टिपण्णी दी थी? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी साहब क्यो शर्मिंदा कर रहे है.. सौ जूते मार लीजिए सर पर, मगर उन बातो को याद मत कीजिए.. जीवन की सबसे बड़ी भूल थी वो, दरअसल कुछ ग़लतफहमी हो गयी थी.. मुझे लगा वो ब्लॉग आपने शुरू किया है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर मैं शुरू करता भी तो क्या बुरा था इसमे?  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी क्यो बुरा नही था. वहा पर नारी मुक्ति जैसे विषयो पर बात होनी थी.. इन विषयो पर पहले ही इतने ब्लॉग बने जा चुके है.. मुझे बुरा तब लगता है जब देखता हू की हमारी बहने ही आपस में एक नही है.. दो अलग अलग ब्लॉग बना रखे है.. इधर वाले उधर नही जाते उधर वाले इधर नही आते.. आपस में ही एकता नही है तो फिर क्या कहना.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरे मगर ब्लॉग तो स्वतंत्र माध्यम है.. कोई भी जितने चाहे उतने बना सकता है.. आप चाहो तो आप भी बना लो..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; हा मगर जब एक जैसे ही विषय हो और एक जैसी ही चर्चा तो दो अलग ब्लॉग क्यो? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; खैर इन सब बातो का फ़ैसला उन्हे ही लेने दीजिए जिनके वो ब्लॉग है.. आप तो ये बताइए की &lt;strong&gt;&lt;a href="http://prashant7aug.blogspot.com/2008/06/blog-post_25.html"target="_blank"&gt;प्रशांत के ब्लॉग&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt; में क्या कमी थी जो आप वहा भी टिप्पणी छोड़ आए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी आप कहा कहा से पुरानी पोस्ट उखाड़ उखाड़ के ला रहे है.. वो तो उस दिन यूही लिख दिया था.. मूड ठीक नही था.. बाद में अफ़सोस भी हुआ की क्या पूरे ब्लॉग जगत को सुधारने का ठेका मैने ले रखा है? मगर क्या करू जैसा मैने कहा आदत से लाचार हू.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप तो &lt;strong&gt;सुनील डोगरा 'जालिम'&lt;/strong&gt; की ब्लॉग पर भी हंगामा कर आए थे..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी उसकी तो बात ही ऐसी थी.. कितना घटिया शीर्षक था उसका.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मगर ये फ़ैसला करने वाले आप कौन है की शीर्षक कितना घटिया है और अच्छा? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; कैसी बाते कर रहे है कुश भाई, उसने वहा क्या लिखा था आपको मालूम है? ये सब पाठक बटोरने वाले काम है सस्ती पब्लिसिटी के सिवा कुछ नही..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ठीक बात है मगर देखिए उसने ये साबित कर दिया की लोग क्या पढ़ना चाहते है, उसने घटिया शीर्षक लिखा और आप वहा पहुँच गये.. क्यो आपने उसे इग्नोर नही किया.. कीचड़ में पत्थर उछाला जाता है क्या? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अरे लेकिन मुझसे रहा नही गया, शीर्षक ही ऐसा था&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश &lt;/strong&gt;: देखा आप लोग ही तो बढ़ावा देते हो पढ़कर पढ़कर.. उस दिन ब्लॉगवानी में वो सबसे ज़्यादा बार पढ़ा गया चिट्ठा था..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; लेकिन आपको कैसे पता इसका मतलब आप भी गये थे वहा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा बिल्कुल, मैं गया था मगर दूसरे दिन वो भी इतनी टिप्पणिया देखकर और सच मानिए जितनी जल्दी गया था उतनी जल्दी लौट आया.. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; हा मगर मैं आपकी तरह नही हू.. मैं तो सबकी ********** &lt;strong&gt;(कॉफी विद कुश में तरह के शब्दो पर रोक है, इसलिए आपको स्टार नज़र आ रहे है)&lt;/strong&gt;  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मगर ये सब करने से आपको का लाभ होता है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; आत्म संतुष्टि मिलती है और क्या?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सिर्फ़ यही कारण तो नही होगा इतना सबकुछ करने का? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; ठीक कहा आपने.. दरअसल मैं ये दिखाना चाहता हू की यहा पर कोई भी शरीफ नही है.. दिखने मैं चाहे कैसे भी हो पर हर एक के अंदर एक अनोनामस है यहा पर..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मैं समझा नही आपकी बात? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; देखिए ब्लॉगर बढ़िया रहता है जब तक की उसकी ब्लॉग पर अच्छी टिप्पणिया आती रहे.. मगर जैसे ही किसी ने अनोनामसली उसे कुछ कहा वो भी अशिष्ठता की हदे पर कर देता है.. और खुद भी अपशब्दो पर आ जाता है.. फिर मुझमे और उसमे कोई फ़र्क़ नही रहता.. मैं बस दुनिया को यही दिखाना चाहता हू की अंदर से हर ब्लॉगर अनोनामस है  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो इसका मतलब की आप कुछ भी लिख दे और सामने वाला जवाब भी ना दे? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी ऐसा हमने कब कहा, दे मगर अच्छे शब्दो में.. जैसे आपने दिया था. अजी मुझे तो काटो तो खून नही था.. मैने तो सोचा की आप भी मुझे गालिया दोगे और मैं ये साबित कर दूँगा की आप भी अंदर से वैसे ही हो .. पर आपने मुझे ग़लत साबित कर दिया.. इसीलिए आज यहा आपसे बात कर रहा हू..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मेरी बात छोड़िए आप उनकी बात करिए जिन्हे आपने बहुत ग़लत कमेंट दिए.. कुछ टिप्पणिया तो बहुत ही व्यक्तिगत थी? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; मैं समझ रहा हू आपका इशारा किस तरफ है.. मगर एक बात बताइए वो तो जाकर टिप्पणियो में उल्टा सीधा लिख आते है.. मगर मैं लिखू तो बेईमानी.. ये कैसा इंसाफ़? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश  :&lt;/strong&gt; क्या आपको कभी दुख नही होता? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी दुख तो तब होता है जब ये मुझसे मेरी पहचान भी छीन लेते है.. और खुद अनोनामसली मुझसे भी ज़्यादा गंदी भाषा में लोगो के यहाँ जाकर टीपिया आते है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लेकिन हम कैसे मान ले की ये वही ब्लॉगर है?  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी भूल गये आई पी एड्रेस से जैसे आपने हमको पकड़ा था.. वो दिल्ली वाले ब्लॉगर जी जो अनोनामसली सबको टीपियाते है सोचते है पकड़े नही जाएँगे.. पर चोर कभी बचा है क्या.. और फिर आप तो खुद वेबसाइट बनाने वाली कंपनी में हो.. आप से यहा कौन छुपा है.. आप तो दो मिनिट में पता लगते हो..जैसे हमे पता लगाया था&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मगर इन सब बातो से आप कहना क्या चाहते है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अजी मैं कौन होता हू साबित करने वाला.. यहा तो लोग ही एक दूसरे को साबित करने में लगे रहते है.. आपको क्या लगता है मैं अकेला ही अनोनामस हू.. गौर से देखिए कितने ही अनोनामस मिल जाएँगे आपको.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लेकिन क्यो? ये सब क्यो? कोई शांति से ब्लॉगिंग कर रहा है तो फिर आप उसे क्यो परेशान करते है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; अरे तो शांति से करे अशांति फैलने की क्या ज़रूरत है? कभी कोई दूसरी सीटे से कॉपी करके डाल देता है, कभी कोई मर्दो को गलिया देता है तो कोई औरतो को गलिया देते हुए पोस्ट लिख देता है.. सस्ते प्रचार के लिए लोग उल्टा सीधा करते रहे और मैं कुछ भी ना करू.. इस से तो मैं अपने ज़िम्मेदार ब्लॉगर कर्तव्य से विमुख हो रहा हू.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लेकिन आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है कोई कुछ भी लिखे, अगर आपको लगता है की उनका लिखा बकवास है तो ना जाए पर अपशब्दो का प्रयोग क्यो? बाकी लोग तो नही जाते&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; बाकी लोग ना जाए तो ना जाए पर मैं इसे अपना फ़र्ज़ समझता हू..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लेकिन इसे कौन निर्धारित करेगा की ब्लॉग पर क्या लिखा जाए और क्या नही? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी &lt;/strong&gt;: ये मैं कैसे बताऊ? मुझे तो ये पता है की ग़लत लिखोगे तो मैं आ रहा हू..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपके आने की ज़रूरत नही.. मेरी राय में पाठक खुद निर्धारित करते है की उन्हे क्या पढ़ना है और क्या नही.. सड़क पर खड़ा होकर कोई गाली बोले तो क्या उत्तर में आप भी उसे गाली बोलते है?  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; नही&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो फिर जब यहा कोई कुछ ग़लत लिखे तो आप क्यो बोलते है, पाठक उसे अपने आप बर्खास्त कर देंगे.. जैसा की वो करते आए है.. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; क्या ऐसा संभव है? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्यो नही? क्या आपने हमारे पाठको को इतना बेवकूफ़ समझा है की वो उलझलूल लिखने वालो की ब्लॉग पर कमेंट करते भी होंगे.. और यदि करते भी हो तो वो उनकी पसंद है.. जिसे जो पसंद हो वो वही करे.. हम ब्लॉगर है खुदा नही जो दूसरो की किस्मत बदले. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; मगर....... &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मगर क्या? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; मगर...., रहने दीजिए कुश भाई मैं अभी कुछ कहने की स्थिति में नही हू, पता नही अचानक मुझे क्या हो गया है.. क्या वाकई मैं ग़लत हू?  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप ग़लत नही है अनोनामस जी, आपने जो किया वो ब्लॉग जगत की भलाई के लिए किया.. कही कही पर खुन्नस भी थी परंतु वो मनुष्य का स्वाभाव है धीरे धीरे बदलता है.. आपने जो किया वो ग़लत नही किया पर ग़लत तरीके से किया.. सारे विवाद बातचीत से ही हल होते है..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; आपने ठीक कहा कुश जी मैं यूही बेवजह लोगो को उल्टे सीधे कमेंट देता था.. और यकीन मानिए मुझे रात को नींद भी नही आती थी.. पता नही मैं क्या से क्या हो गया..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप अगर मेरी सलाह माने तो एक बात कहु? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; हा कहिए कुश भाई&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप आज इस मंच पर यहा सभी से माफी माँगे और अपनी ग़लती का प्रायश्चित करे.. मैं जानता हू की हमारा ब्लॉग जगत का परिवार आपको माफ़ करेगा.. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; मैं आप सभी महानुभावो से अपने किए हुए सभी अभद्र टिप्पणियो के लिए क्षमा चाहता हू.. भूलवश यदि मैने आपको दुख पहुँचाया हो या आपको ठेस पहुँची हो तो मुझे नासमझ मान कर क्षमा करे.. भविष्य में आपको इस प्रकार का कोई अवसर नही दूँगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत बहुत शुक्रिया अनोनामस जी, ये मेरे लिए हर्ष की बात है की आज अपने &lt;strong&gt;कॉफी विद कुश&lt;/strong&gt; के मंच पर ब्लॉग जगत के कल्याण के लिए सभी से माफी माँगी.. इसके लिए मैं खड़े होकर आपका अभिवादन करता हू..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; कुश भाई इतना प्यार अगर मुझे पहले ही मिल जाता तो शायद मैं कभी अनोनामस बनता ही नही.. आज तो आपने मेरी आँखो में आँसू ला दिए..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मुझे उमीद है आपके इस निर्णय में ब्लॉगर परिवार के सभी सदस्य साथ होंगे.. मैं सभी से प्रार्थना करता हू की अनोनामस जी की भूल को माफ़ करके  हिन्दी ब्लॉग्गिंग को नया आयाम प्रदान करे.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो फिर अब चले वन लाइनर राउंड की तरफ? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; कुश भाई ये राउंड किसी और दिन कर ले? अभी तो दिल घबरा रहा है की सब लोग मुझे माफ़ करेंगे या नही..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कोई बात नही अनोनामस जी, ये हम किसी और दिन कर लेंगे.. जाते जाते आप हमारे ब्लॉगर मित्रो से कुछ कहना चाहेंगे? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; मैं अपने मित्रो को बस यही कहूँगा की जो भूल मैने की है वो आप कभी मत करे, बहुत आसान है किसी को बुरा बोलना.. मगर मुश्किल है किसी के बारे में दो शब्द प्यार के बोलना.. प्यार से सबके साथ मिलकर रहे बस मेरी यही कामना है..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत बहुत शुक्रिया अनोनामस जी आप यहा आए और इतनी बढ़िया बातचीत की.. ये हमारी तरफ से आपको एक गिफ्ट हेम्पर.. &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनोनामस जी :&lt;/strong&gt; बहुत बहुत शुक्रिया कुश जी, इतना प्यार और सम्मान देने के लिए शुक्रिया ये इंटरव्यू जीवन भर मेरी यादो से जुड़ा रहेगा.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का नौवाँ एपिसोड अनोनामस जी के साथ.. कैसा लगा आपको ज़रूर बताईएएगा.. और ये भी बताईएगा की आपने उन्हे माफ़ किया या नही.. अगले सोमवार हम फिर मिलेंगे हमारे ही बीच के एक और ब्लॉगर से.. तब तक के लिए शुभम!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-586016767158720949?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/586016767158720949/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_03.html#comment-form' title='27 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/586016767158720949'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/586016767158720949'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post_03.html' title='एक मुलाकात अनोनामस से.. (कॉफी विद कुश)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>27</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-1892699953368208932</id><published>2008-08-02T14:42:00.005+05:30</published><updated>2008-08-02T15:40:53.073+05:30</updated><title type='text'>ब्लॉग जगत में पहली बार आ रहे है अनोनामस जी</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SJQoGyDiw0I/AAAAAAAAAkM/4oyBGFkbe-Q/s1600-h/coffee_ann.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SJQoGyDiw0I/AAAAAAAAAkM/4oyBGFkbe-Q/s320/coffee_ann.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5229849164264948546" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नमस्कार मित्रो, &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कॉफी विद कुश&lt;/strong&gt; में अब तक आप मिल चुके है ब्लॉग जगत के कई ऐसे जाने माने ब्लॉगरो से जिनके नाम से सभी परिचित है.. मगर ये हमारा सौभाग्य है की पहली बार आ रहे है &lt;strong&gt;'कॉफी विद कुश'&lt;/strong&gt; के इतिहास में एक ऐसे ब्लॉगर जिनसे परिचित तो सब है मगर नाम कोई नही जानता .. जी हाँ दोस्तो इस सोमवार  हम मिलवाने वाले है आपको "यत्र तत्र सर्वत्र" पाए जाने वाले  ब्लॉगर &lt;strong&gt;"अनोनामस जी"&lt;/strong&gt; से ..  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और हा एक और बात ये अनोनामस जी ब्लॉग जगत के कई राज़ भी खोलने वाले है.. तो बस दिल थाम के बैठ जाइए.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नोट : आप भी पूछ सकते है अनोनामस जी से सवाल.. &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-1892699953368208932?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/1892699953368208932/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post.html#comment-form' title='21 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/1892699953368208932'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/1892699953368208932'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='ब्लॉग जगत में पहली बार आ रहे है अनोनामस जी'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SJQoGyDiw0I/AAAAAAAAAkM/4oyBGFkbe-Q/s72-c/coffee_ann.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>21</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-4464785101236565801</id><published>2008-07-26T17:15:00.013+05:30</published><updated>2009-01-01T17:31:25.993+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (आठवाँ एपिसोड) एक नये रूप में..</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;blockquote&gt;नमस्कार दोस्तो,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप सबके स्नेह और आशीर्वाद से एक बार फिर हाज़िर है &lt;a href="http://coffeewithkush.blogspot.com/"&gt;'कॉफी विद कुश'&lt;/a&gt; एक नयी साज़ सज्जा और नये रूप में..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बात की खुशी मुझे और है की इस नये रूप में हमारे मेहमान है अपनी नवीनताओ से परिपूर्ण ग़ज़लो और आलेखो के स्वामी &lt;strong&gt;&lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/"&gt;नीरज जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt; से.. ये कॉफी विद कुश का सौभाग्य है की नीरज जी हमारे साथ आए और कुछ देर रुबरु बैठे.. आप सबका अधिक समय ना लेते हुए.. मैं आमंत्रित करता हू एक कमाल के व्यक्तित्व् के धनी &lt;strong&gt;नीरज जी&lt;/strong&gt; को..&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आइए नीरज जी स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' में&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश, बहुत खुशी हुई यहाँ आकर आख़िर मेरा नंबर भी लग ही गया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सबसे पहले तो ये बताइए कैसा लगा आपको यहा आकर?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; वैसा ही जैसे शाहरुख़ खान को करण जोहर के सेट पर आ कर लगा था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हा हा शुक्रिया, ये बताइए ब्लोगिंग में कैसे आना हुआ आपका?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा&lt;/a&gt; की कृपा से...जब उन्होंने मुझे ब्लॉग्गिंग में घसीटा कोई दस महीने पहले तब तक ब्लॉग किस चिडिया का नाम है पता ही नहीं था.उन्होंने ख़ुद ही ब्लॉग खोल के दिया और फरमान जारी कर दिया की भईया लिखो...हम उस बैल की तरह जिसे कोल्हू में जोत देते हैं चलने लगे....शिव रुकने ही नहीं देते चलाये रखते हैं...अब इस कोल्हू से तेल निकल रहा है या खल ये तो आप भली भांति जानते होंगे...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हम तो तेल ही कहेंगे, ब्लॉगर्स में किसे पढ़ना पसंद करते है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; उन्हें जो मुझे पढ़ना पसंद करते हैं....याने जिनसे अपनी पसंद मिलती है...अब नाम ना पूछना भाई, बहुत सारे हैं..और जिनको मैं पढता हूँ वो बखूबी मुझे जानते हैं..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; प्राण साहब के बारे में क्या कहेंगे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; प्राण साहेब मेरे गुरु हैं...शायरी के पुराने उस्ताद हैं और बहुत बड़े मददगार हैं...मेरी बेवकूफी से भरी बातों पर भी गुस्सा नहीं करते...मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बढ़िया! लीजिए आपकी गरमा गरम कॉफी तैयार है..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; चीनी कुछ कम है, क्या है की हम खड़े चम्मच की काफी पीते हैं...चमचे मैं देख रहा हूँ आप रखते ही नहीं अपने पास.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हा हा आप बड़े शरारती है, अब ज़्यादा है या बचपन में भी थे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; अब की और बचपन की शरारत में कोई फर्क नहीं आया है...&lt;strong&gt;पत्नी(अरुणा)&lt;/strong&gt;कहती है क्या तुम मिष्टी जैसी शरारतें करते हो...स्कूल टाइम से ही अध्यापकों की हुबहू नक़ल उतर कर सबको हँसाना परम धर्म हुआ करता था...कालेज में भी इसी क्रिया के चलते बहुत वाहवाही मिली....प्रिंसिपल की नक़ल उतारी अस्सेम्बली में और तीन दिन क्लास के बाहर खड़े रहना पढ़ा...शरारतों का सारा कोटा कालेज में पूरा किया बाद में जो बच गया उसे विरासत के तौर पर अपने दोनों बेटों में बाँट दिया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; कैसे स्टूडेंट थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; मध्यम मार्गी...न कभी माउन्ट एवरेस्ट चढा और ना पाताल की गहराई नापी...बस सतह पर ही रहा...समझे ना आप???&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; स्कूल में शरारत नही कर पाते थे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; नहीं...मौका नहीं मिला क्यूँ की पापा उसी स्कूल में प्राध्यापक थे...उनके साथ ही साईकिल पर पीछे बैठ कर स्कूल जाता था...एक बार उनकी क्लास में बैठ कर इंद्रजाल कामिक्स पढ़ रहा था उन्होंने देख लिया और सारे क्लास के सामने चपत जड़ दी...जो शायद उनकी पहली और आखरी चपत थी क्यूँ की उसके बाद मैंने ऐसा मौका ही नहीं दिया उनको.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; फिर तो आप &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt; की तरह क्लास बंक करने से भी वंचित रहे होंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जी नही क्लास बंक करने के सारे सपने कालेज में पूरे किए. मालवीय कालेज से साईकिल पर बैठ कर पोलोविक्ट्री सिनेमा तक जो करीब आठ की.मी, था,सिनेमा देखने जाते और वापस लौट आते. सिनेमा नहीं तो कालेज के पीछे की पहाडी पर घूमना बहुत पसंद था. ये समझिये की क्लास बंक ज्यादा की और अटेंड कम की.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सिनेमा देखना बहुत पसंद था आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जी हा बहुत ... सिनेमा देखना बचपन से ही बहुत पसंद था और अभी भी है...मौका मिलते ही नयी फ़िल्म देखना अपना फ़र्ज़ समझता हूँ. घर पर फिल्मों की भरी पूरी लाइब्रेरी है...&lt;br /&gt;कोई आठ साल का रहा होऊंगा जब एक दिन मम्मी और मेरी बुआ करवा चौथ के दिन दोपहर का शो देखने रिक्शा पर सिनेमा घर गयीं और मैं छुप छुप के उनका पीछा करता पहुँच गया...मुझे देख कर वो हैरान हो गयीं...झक मार कर मुझे भी फ़िल्म दिखाई...फ़िल्म थी. "दिया और तूफ़ान"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;हा हा हा !! सुना है एक ही दिन में दो दो फिल्म देखने का भी रिकॉर्ड बनाया है आपने?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जी हाँ कालेज से भाग कर शायद "राम और श्याम" और "फ़र्ज़" दोनों एक ही दिन एक के बाद एक शो में देखीं.फिल्मों का भारी शौक हुआ करता था ,शौक तो अभी भी है लेकिन कालेज से भाग कर फ़िल्म देखने में जो आनंद आया करता था वो अब नहीं आता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉग जगत के राम और श्याम किसे कहेंगे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt;&lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञान भईया&lt;/a&gt; और &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा&lt;/a&gt; को...जहाँ ज्ञान भईया धीर गंभीर हैं वहीँ शिव मनमौजी हैं..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश: &lt;/strong&gt;बचपन में किसी बात से डरते भी थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;गणित के होम वर्क से....राक्षस से भिड़ना मंजूर था लेकिन गणित के सवाल से सिट्टी पिट्टी गम हो जाती थी...बाद में गणित के करण ही इंजीनियरिंग में प्रवेश मिला...प्रभु की लीला अपरम्पार है...जिससे डरो वो ही पार लगाती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश: &lt;/strong&gt;कहते है गुलाबी नगरी वाले बड़े दिलवाले होते है आपका दिल पहली बार किस पर आया था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;पहली और आखरी बार जिस पर दिल आया वो &lt;strong&gt;"अरुणा"&lt;/strong&gt;, अब मेरी पत्नी है, दूर दृष्टि कमजोर होने के करण पड़ोस की लड़की पर दिल आया....दोनों घरों के बीच सिर्फ़ चार फुट ऊंची दीवार ही है....हम दोनों जब कक्षा सात में थे तब से एक दूसरे के पड़ोस में रहने आए...एक साथ खेले, बड़े हुए, पढ़े और अब जीवन साथी हैं...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;वाह कितनी प्यारी बात है, ये बताइए आपके पुराने शहर और हमारे वर्तमान शहर 'जयपुर' के बारे में क्या कहेंगे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;पुराना शहर जैसे "मधुबाला" और नया जैसे "ऐश्वर्या..."&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश: &lt;/strong&gt;बहुत खूब! ये बताइए लिखने का शौक कब से हुआ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;पिछले दो साल से...इससे पहले कालेज में छोटे मोटे हास्य नाटक लिखे, मंचित किए, खूब चर्चित हुए...एक आध तुकबन्दियाँ भी की...लेकिन..लिखना अभी शुरू किया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश: &lt;/strong&gt;आप जिस पोस्ट पर हैं उस में इन सब कामों के लिए समय कैसे निकाल लेते हैं? &lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;जहाँ चाह वहां राह...अपनी रुचियों को कभी मरने नहीं देना चाहिए....रही बात समय की तो अगर आप के पास अपनी एक टीम है जिसे आप ने काम करने की पूर्ण स्वतंत्रता दे रखी है, तो फ़िर आप के पास करने को कुछ नहीं रह जाता सिवाय ब्लॉग्गिंग करने के.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश: &lt;/strong&gt;तो ब्लॉग्गिंग से आप को क्या लाभ हुआ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;पूछिए मत...सबसे बड़ा लाभ तो ये की एक गुमनाम व्यक्ति को इस लायक बनाया की उसका इंटरव्यू आप द्वारा लिया जाए.....ब्लॉग्गिंग से मुझे बहुत ही विलक्षण लोगों के संपर्क में आने और उन्हें पढने का मौका मिला...मुझे लगता है की अगर मैं उनके संपर्क में ना आता तो शायद जीवन में बहुत कमी रह जाती. अनजान व्यक्तियों ने ना मुझे अपनाया बल्कि इतना प्यार दिया की उस से हमेशा अभिभूत रहता हूँ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आपके ब्लॉग की सबसे पॉपुलर पोस्ट &lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/2008/06/1.html"&gt;'खोपोली'&lt;/a&gt; के बारे में बताइए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी : &lt;/strong&gt;नौकरी के सिलसिले में पाँच साल पहले यहाँ आया. खोपोली एक छोटी सी खूबसूरत जगह है जिसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है...मुझे लगा की प्रसिद्द जगहों के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन एक अनजान जगह जो इतनी खूबसूरत है लोगों की नज़रों से बची हुई है... इसीलिए ये श्रृंखला शुरू की थी...सबने रूचि तो दिखाई लेकिन आया कोई नहीं...मुझे इस बात का दुःख है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; रेल गाड़ी से भी ख़ासा लगाव है आपका ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जी हाँ मेरे नाना रेलवे के इंजिनियर और दादा गार्ड थे...बचपन से ही रेल ने सम्मोहित किया मुझे..उसकी चलने से होने वाली संगीत की ध्वनि मुझे अभी भी अपनी और खींचती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपको गाने का शौक भी है!&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; बहुत...लेकिन बाथरूम में...संगीत से मेरा लगाव पागलपन की हद तक है...विशेष रूप से भारतीय शास्त्रीय संगीत.. मेरी माँ और मौसी बहुत अच्छा गाती हैं..अभी भी उनसे आप फिल्मी या गैर फिल्मी गीत सुन सकते हैं...मम्मी जो अब करीब अस्सी वर्ष की हैं,तो आपको एक दम ताजा फिल्मी गीत सुना कर चकित कर सकती हैं. पापा को सितार बजाने का शौक था...घर में उनके समय बहुत से साज़ रखे रहते थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपने विश्व में इतनी जगह पर भ्रमण किया है सबसे बढ़िया अनुभव कब रहा?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी:&lt;/strong&gt; एक बात मैंने अनुभव की, जो बहुत बढ़िया लगी.....दुनिया के सारे इंसान एक जैसे हैं.....मैं जहाँ कहीं गया...लोग मुझको देख कर हँसे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा हा..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; देखिए आप भी हँसने लगे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सुना है विदेशी पुलिस ने पकड़ भी लिया था आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; अरे मत पूछिए, हुआ यूँ की जकार्ता की एक भीड़ भाड़ वाली मुख्य सड़क है...जालान सुधीर मान...छे लेन वाली सड़क है...उसके एक तरफ़ हम खड़े थे और हमें दूसरी दिशा में जाना था...ओवर ब्रिज कोई आधा की.मी. दूर था..सोचा चलो दौड़ के पार करते हैं...आधा रास्ता पार किया और बीच में बने डिवाईडर पर खड़े थे की पुलिस आगयी...और हमें गाड़ी में बिठा कर थाने ले गयी...क्यूँ की हम वहां विदेशी थे सो सीधे इंचार्ज ने बुलाया और कहा की अगर आप सड़क दुर्घटना में मर जाते तो? मैंने निडर हो कर कहा की "सर हमारे देश में सड़क ऐसे ही पार करनी सिखाई जाती है."..वो बोला क्यूँ? तो मैंने कहा "क्यूँ की हमारे देश की जनसँख्या बहुत जयादा है..."मेरे जवाब को सुन कर वो बहुत देर तक हँसता रहा और बाद में हमें छोड़ दिया. लेकिन एक बार तो विदेशी धरती पर पुलिस के हाथ पकड़े जाने पर हमारी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी थी...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हा हा! सुना है आप बहुत खुल कर हँसते हैं.&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; हा हा हा ...जो व्यक्ति खुल के हंस नहीं सकता वो खुल कर रो भी नहीं सकता...जीवन जीने का नाम है...हंसने के लिए किसी चुटकले या घटना की जरुरत नहीं पढ़ती...रोज की छोटी छोटी घटनाओं में हास्य भरा रहता है...आप अपने देखने, आंकने का नजरिया बदलिए देखिये फ़िर कैसे हास्य आप के चारों और बिखरता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; खाने में क्या पसंद नही आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; बैंगन... बाकि सबकुछ खा लेता हूँ...कब बुला रहे हैं आप? लेकिन शाकाहारी भोजन होना चाहिए..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कॉलेज की मेगज़ीन में आपकी फोटो भी छपी थी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; तीन साल तक लगातार हमारी फोटो "प्राइड ऑफ़ आवर कालेज" शीर्षक के साथ कालेज मैगजीन में छपती रही थी. उनदिनों कालेज का कोई फंक्सन हमारी टांग अढ़ाये बिना सफल नहीं होता था. कालेज छोड़ने के दस साल बाद तक के छात्र हमारे नाम से वाकिफ थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;मशहूर अभिनेता उत्पल दत्त जी से मुलाकात के बारे में बताइए?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष के दौरान सन 1972 जयपुर में "पृथ्वीराज मेमोरियल प्ले कम्पीटीशन "मनाया गया था, जिसमें उत्पल दत्त, मनमोहन, ऐ.के.हंगल, कादर खान, शबाना आजमी, कीमती आनंद, बादल सरकार, विजय तेंदुलकर और शशि कपूर जैसी हस्तियां आयीं. उस वक्त हम जयपुर थिएटर में बहुत सक्रिय थे. उत्पल दत्त जी से मुलाकात हुई और उनसे बहुत कुछ सीखा. इतने प्यार से मिले जैसे बरसों की पहचान हो. मैं उनकी सादगी और थिएटर के ज्ञान से बहुत प्रभावित हुआ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; साइकल का बड़ा योगदान रहा आपकी ज़िंदगी में?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; सही कहा. साईकिल ना होती तो पता नहीं क्या होता...कालेज के अन्तिम&lt;br /&gt;वर्ष की बात है अपनी पडोसन (अरुणा...अब तो आप पहचान ही गए होंगे) से उसकी नई की नई साईकिल मांग कर कालेज फ़िल्म देखने गया वहां नई साईकिल कोई चुरा ले गया...वापस मुहं लटका के घर आया तो पडोसन ने कहा कोई बात नहीं...मैंने कहा मैं इसकी भरपायी कैसे कर पाउँगा...??? उसने कुछ कहा नहीं....लेकिन बाद में मेरी पत्नी बन के घर आगयी...साइकिल की भरपायी करने जो अभी तक नहीं हो पायी है. हा हा हा...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हा हा हा! बहुत बढ़िया रही साइकल दास्तान, अब वक़्त आ गया है हमारे प्यारे प्यारे पाठको के न्यारे न्यारे सवालो का&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी सदाबहार मुस्कुराहट का राज़ क्या है? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/"&gt;पारूल जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt;" कल किसने देखा है...आए या ना आए" गीत हमेशा याद रखना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; नीरज जी , आप अपने को क्या कहेंगे रूमानी या रूहानी? - &lt;strong&gt;&lt;a href="http://abhijitlekhni.blogspot.com/"&gt;अभिजीत जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt;ना रूमानी ना रूहानी काम अपुन का बस शैतानी....अभी जी रूह के बिना रूमानी आप हो नहीं सकते.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; खोपोली दिखलाय के लीयो है मनवा जीत&lt;br /&gt;जो पहुच गये हम सारे तो कहा जाओगे मीत ? -&lt;strong&gt;"&lt;a href="http://pangebaj.com/"&gt;अरुण जी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; आप के हियाँ....और कहाँ?&lt;br /&gt;मजाक की बात अलग है अरुण जी, आप सब आयें कम से कम मेरा एक सपना तो सच हो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वाह जी बढ़िया जवाब रहे आपके अब चलते है रॅपिड फायर राउंड की तरफ&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;लेडीज़ साइकल - जेंट्‍स साइकल&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जेंट्स साइकल. लेडीज साईकल चलाकर बहुत भारी कीमत अदा करनी पढ़ी थी बंधू.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जयपुर - मुंबई&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जयपुर...आज भी है और कल भी रहेगा.(अपुन की चोइस)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; स्कूल लाइफ - कॉलेज लाइफ&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी &lt;/strong&gt;: कॉलेज लाइफ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शाहिद करीना - सैफ करीना&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; सिर्फ़ करीना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; गुलज़ार जगजीत सिंह - गुलज़ार पंचम&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी &lt;/strong&gt;:&lt;a href="http://guljar.blogspot.com/"&gt;गुलज़ार गुलज़ार गुलज़ार&lt;/a&gt;...किसी के साथ भी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब बारी है हमारे वन लाइनर राउंड की&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; उस्तादों के उस्ताद&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरुणा जी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; अंधे की लाठी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मिष्टी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; इश्वर का रूप&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/2008/06/1.html"&gt;खोपोली&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; जहाँ कोई नहीं आता&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुश की कॉफी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; सबसे स्वाद&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब वक़्त है हमारी खुराफाती कॉफी का जिसे पीकर आपको देने होंगे कुछ खुराफाती सवालो के जवाब&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि आप पी एम होते तो सरकार गिरने से कैसे बचाते?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; बोलता जिसने सरकार के लिए वोट नहीं दिया उसे मेरी ग़ज़लें पढ़नी पड़ेंगी. मायावती जी सबसे पहले सरकार के समर्थन में आ जातीं .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर आपको किसी ब्रांड का एड करना हो तो किसका करेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; काफी का जो आप पिला रहे हैं&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पहाड़ खोदने पर चूहा ही कयो निकलता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; क्यूँ की हाथी को बिल खोदना नहीं आता .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि आपके भी रावण की तरह दस सर होते तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; आप की परेशानी बढ़ जाती...सवाल कौनसे सर से पूछते?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; गुलाब जामुन का नाम 'गुलाब जामुन' क्यो पड़ा?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; क्यूँ की हलवाई "गुलाब चंद" ने जामुन खाते हुए उसका अविष्कार किया था. सन्दर्भ: पुस्तक"भारतीय मिठाई का इतिहास" पृष्ठ ३९&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलते चलते ये बताइए हिन्दी ब्लॉग जगत का भविष्य कैसा देखते है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी:&lt;/strong&gt; आप जैसे युवाओं के ब्लॉग्गिंग करने से भविष्य उज्जवल है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरे आपने ये तो बताया नही की कॉफी विद कुश का नया रूप कैसा लगा आपको?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी:&lt;/strong&gt; बहुत ही बढ़िया.. जैसे ब्राइडल मेकअप के बाद दुल्हन&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; और अंत में हमारे ब्लॉगर मित्रो से क्या कहेंगे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; कमेन्ट करने जैसा पावन कार्य हमेशा संपन्न किया करें..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जाने से पहले आप हमारे गेस्ट बुक में अपने ऑटो ग्राफ देते जाइए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; क्यो नही.. मुझे खुशी होगी.. ये लीजिए&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SI1qa6aXPqI/AAAAAAAAAi8/Ku4s6AZ0-3g/s1600-h/sign-neerajji2.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5227951753035988642" style="CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SI1qa6aXPqI/AAAAAAAAAi8/Ku4s6AZ0-3g/s320/sign-neerajji2.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत बहुत धन्यवाद आपका, वाकई आज आपसे बात करके हमे बहुत अच्छा लगा नीरज जी ये रहा आपका गिफ्ट हेम्पर और साथ में एक बेक्ड समोसा..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नीरज जी :&lt;/strong&gt; मेरा भी सौभाग्य रहा की आप के साथ मुझे भी अपने अतीत में झाँकने का सुनहरी अवसर मिला...पुरानी दिलचस्प यादों को दुहराना हमेशा अच्छा लगता है. बेक्ड समोसा तो ग़ज़ब का बनाया है आपने लेकिन रूबी को धन्यवाद दिया की नहीं जिसने बनाना सिखाया है ???&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जी ज़रूर, एक बार फिर आपका बहुत बहुत शुक्रिया नीरज जी, यहा आने के लिए और हमारे एपिसोड में चार चाँद लगाने के लिए..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का आठवाँ एपिसोड एक नये रंग रूप में ब्लॉग जगत की एक जानी मानी हस्ती नीरज गोस्वामी जी के साथ, ज़रूर बताएगा कैसा लगा आपको.. अगले सोमवार को हम फिर मिलेंगे हमारे ही बीच के एक और ब्लॉगर के साथ तब तक के लिए शुभम!&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-4464785101236565801?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/4464785101236565801/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_26.html#comment-form' title='49 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/4464785101236565801'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/4464785101236565801'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_26.html' title='कॉफी विद कुश.. (आठवाँ एपिसोड) एक नये रूप में..'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SI1qa6aXPqI/AAAAAAAAAi8/Ku4s6AZ0-3g/s72-c/sign-neerajji2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>49</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-2620978163420878003</id><published>2008-07-18T18:41:00.007+05:30</published><updated>2008-07-26T10:00:25.000+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (सातवाँ एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;नमस्कार दोस्तो,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' के सातवें एपिसोड में.. आज हम आपको जिनसे मिलवाने जा रहे है.. वो ब्लॉग जगत की एक जानी मानी शख्सियत है.. जिनके ब्लॉग पर हर नयी पोस्ट का पाठको को बेसब्री से इंतेज़ार रहता है.. जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू अमेरिका में रहते हुए भी भारत के दिल में रची बसी श्रीमती लावन्या शाह जी की ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; नमस्ते लावन्या जी कैसी है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; मैं अच्छी हू कुश, शुक्रिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कैसा लग रहा है आपको यहा आकर ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; जयपुर के गुलाबी शहर मेँ , हम ,कुश जी के सँग, कोफी पी रहे हैँ ..तो " सेलेब्रिटी ' जैसा ही लग रहा है जी ! आपसे रुबरु होने का मौका मिला है ~ शुक्रिया !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सबसे पहले तो ये बताइए ब्लॉग्गिंग में कैसे आना हुआ आपका ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; " Blogging " is like "sitting in the " Piolet's Seat ..&amp;amp; flying the plain solo ..मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ - एक दिन रात का भोजन, निपटा के, मैँ ,कम्प्युटर पे बैठी थी और गुगल पे ब्लोग बनाने की सूचनाएँ पढते हुए मैँने मेरा प्रथम ब्लोग " अन्तर्मन " बना दिया जो अँग्रेज़ी मेँ था और तभी से ," सोलो प्लेन" समझिये," इन ट्रेँनीँग" - सीखते हुए, चला रहे हैँ :-)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत में किसे पढ़ना पसंद करती है आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; मैँने प्रयास किया था इस पोस्ट मेँ कि जितने भी जाल घरोँ का नाम एकत्रित करके यहाँ दे सकूँ - वो करूँ अब कोई नाम अगर रह गया हो तो क्षमा करियेगा पर मुझे सभी का लिखा पसँद है सिवा उसके जो पढनेवाले का दिल दुखा जाये बाकि कई नये ब्लोग पर रोचक और ज्ञानवर्धक सामग्री भी मिल ही जातीँ हैँ,सभी को मेरी सच्चे ह्र्दय से , शुभ कामनाएँ दे रही हूँ - स्वीकारियेगा !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृपया, यहा क्लिक करे&lt;br /&gt;http://www.lavanyashah.com/2008/06/blog-post.html&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या आप किसी कम्यूनिटी ब्लॉग पे भी लिखती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; नहीँ तो ...ये अफवाह किसने उडायी ? :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बाकी सवालो का सिलसिला आगे बढ़ते हुए पीते है गरमा गरम कॉफी ये लीजिए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt;वाह मैं तो इसी के इंतेज़ार में थी.. बढ़िया कॉफी है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगिंग के लिए इतना वक्त कैसे निकाल पाती है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; घर के काम शीघ्रता से करने की आदत हो गई है अब और काफी समय , जितना वक्त है उसे , सही तरीके से&lt;br /&gt;उपयोग मेँ लाने की कोशिश करती हूँ और हाँ, यहाँ (अमेरिका मेँ) बिजली कम ही जाती है :-)..घर मेँ , आधुनिक उपकरण ही ज्यादातर काम पूरा करते हैँ ..पर, खाना,अब भी , मैँ ही बानाती हूँ ! क्यूँके ,अभी ऐसा कोई "रोबोट= यँत्र मानव " मिला ही नहीँ !! :-))&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शुरुआत में ब्लॉगिंग के वक़्त कुछ तकनीकी समस्याए भी आई होंगी उन्हे कैसे दूर किया करती थी आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; तकनीकी मामलोँ मेँ अभी सीख रही हूँ ...नहीँ तो एक बार समीर भाई से नारद, चिठ्ठा जगत और ब्लोगवाणी मेँ रजिस्टर करवाया था - भला हो उनका ..ये अह्सान कभी नहीँ भूलूँगी ..और दिनेश भाई जी ने रवि रतलामी जी से फोन्ट भिजवाये थे ..सब की मेहरबानी है ..आपने " कोफी वीथ कुश " पे बुलाया,, तरुण भाई ने " आमने -सामने " मेँ और अजित भाई ने " बकलमखुद " मेँ और सभी का शुक्रिया !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लोग जगत मेरे भारत की माटी से जुडा हुआ है- कयी सतहोँ पर जहाँ आपको मनोरँजन भी मिलेगा, ज्ञानपूर्ण बातेँ भी, राजनीति से लेकर,शब्दोँ की व्युत्त्पति या खगोल शास्त्र, पर्यटन, सदाबहार नगमे, या नये गीत,एक से एक बढकर गज़ल, शायरी, गीत और नज़्म्, व्यँग्य,विचारोत्तेजक लेख,एक छोटे से कस्बे मेँ जीता भारत या विदेश का कोई कोना, यादेँ, सँस्मरण सभी कुछ पढने को मिअ जाता है जो नावीन्य से भरपूर होता है, जिसका मूल कारण है व्यक्तित्व की स्वतँत्रता और अनुभवोँ को दर्शाने की आज़ादी ( Freedom of expression ) जो एक लोकताँत्रिक विधा है - यही ब्लोगिंग की प्राण शक्ति और उसमेँ समायी उर्जा है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; एक बार आप पार्क में खो भी गयी थी ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; ३ साल की एक नन्ही लडकी , शिवाजी पार्क की भीडभाड मेँ , शाम के धुँधलके मेँ , अब लोग घर वापस जाने के लिये,पार्क के दरवाजोँ से बाहर यातायात के व्यस्त वाहनोँ के बीच से रास्ता ढूँढते निकल लिये हैँ और ये लडकी , अपने आपको अकेला,असहाय पाती है ..घर का नौकर शम्भु, बाई बहनोँ को लेकर,कहीँ भीड मेँ ओझल हो गया है और अपने को अकेला पाकर,जीवन मेँ पहली बार डर का अहसास हुआ है .. उसे देख २ नवयुवक रुक जाते हैँ और पूछते है, " बेबी, क्या तुम घूम गई हो ? अकेली क्यूँ हो ? " थरथराते स्वर मेँ अपनी ढोडी उपर किये स्वाभिमान से उत्तर देती हुई वो कहती है," मैँ नहीँ हमारा शम्भु भाई घूम गया है ! और वो ३ बरस की नन्ही कन्या, मैँ ही थी :-)ईश्वर कृपा से वे दोनोँ युवक, मेरे रास्ता बताने से ,मुझे घर तक छोड गये और दरवाजा खुलते ही," अम्मा .." की पुकार करते ही अममा की गोद मेँ मैँ फिर सुरक्षित थी और उन दोनोँ युवको ने अम्म को खूब डाँटा था और अम्मा ने उनसे माफी माँगते खूब अहसान जताया था, आज सोचती हूँ अगर मैँ घर ना पहुँची होती तो ?!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कॉलेज की कोई बात जो अब तक याद हो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; अगर बचपन के दिन सुबह हैँ तो कोलिज के दिन मध्याह्न हैँ -एक दिन कोलिज मेँ अफघानिस्तान से आये एक नूर महम्मद ने,मेरे सहेली रुपा के लिये, दूसरे लडके को कोलेज के बाहर सडक पर, चाकू से घायल कर लहू लुहान कर दिया था - हम लडकियाम सहम गईँ थीँ - घर गये तब १०१ * ताप ने आ घेरा !दूसरे दिन एक मित्र जिसका नाम अनिल था और वो सबसे सुँदर था उसका दोस्त आया और बतलाया कि अनिल ने खुदकुशी कर ली ! शायद उसके पर्चे ठीक नहीँ गये थे और फेल होने की आशँका से उसने ऐसा कदम उठाया था, ये दोनोँ किस्से मुझे आज तक भूलाये नहीँ भूलते -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Do see this link below ~&lt;br /&gt;http://www.lavanyashah.com/2007/04/blog-post.html&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अपने परिवार के बारे में बताइए ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; मेरे परिवार मेँ हैँ - मेरी बिटिया सिँदुर, दामाद ब्रायन, नाती नोआ और बेटा सोपान और बहु मोनिका देव मेरे पति दीपक और मैँ !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जीवन की कोई अविस्मरणिय घटना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; मेरी पहली सँतान बिटिया सिँदुर का ९ वाँ महीना चल रहा था उसे शाम के खाने पे बुलाया तो वो सेल फोन से नर्स को पूछ रही थी " क्या मैँ मेरा फेवरीट शो देखने के बाद वहाँ आ सकती हूँ ? " नर्स ने कहा नहीँ जी फौरन आओ और दूसरे दिन हम भी वहाँ गये ..उसका लेबर पेन चल रहा था और मैँ प्रभु नाम स्मरण करते जाप कर रही थी, मन मेँ एक डर था कि अभी नर्स , डाक्टर आकर कहेँगेँ कि हम इसे ओपरेशन के लिये ले जा रहे हैँ परँतु,हेड नर्स ने हमेँ कहा, " आप लोग बाहर प्रतीक्षा कीजिये..अब समय हो रहा है " हम बाहर गये और मानोँ कुछ पल मेँ , मुस्कुराती हुई वो लौट आई और कहा, " अब आप लोग आ सकते हैँ " भीतर सिँदुर थी और मेरा नाती " नोआ" Noah था उस सध्यस्नात, नवजात शिशुको हाथोँ मेँ उठाया तो वह पल मुझे मेरे जीवन का सबसे अविस्मरीणीय पल लगा..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है आपकी ब्लॉग पर कुछ लोगो के बारे में लिखे जाने पर उनके रिश्तेदारो ने आपसे संपर्क किया था?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; हम जब ब्लोगिँग करते हैँ तब निताँत एकाँत मेँ, अपने विचारोँ को की बोर्ड के जरिये , खाली पन्ने पे उजागर करते हैँ, उसके बाद आपका लिखा कौन , कहाँ पढता है इस पे आपका कोई अधिकार नहीँ - इस नजर से ये सर्व जन हिताय हो गया एक पोस्ट श्रध्धेय अमृतलाल नागर जी ( मशहूर कथाकार हैँ ) उन के पापाजी पे लिखे सँस्मरण को पोस्ट करने से पहले,उनपे नेट पर सामग्री ढूँडते , रीचा नागर के बारे मेँ पता चला और सँपर्क हुआ जिसकी खुशी है -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और कवि प्रदीपजी वाली पोस्ट को उनकी बिटिया ने पढकर मुझे ई मेल भेजा उसकी भी खुशी है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप अब तक कई बड़े बड़े लोगो से मिल चुकी है, किसका आपके जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव पढ़ा?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; पापा जी के गुरु थे ~ महर्षि धुरँधर विनोद जी ! " " धवलगिरि " पुस्तक के लेखक ~ प्रकाँड पँडित,पहुँचे हुए महायोगी, पुणे निवासी, सँस्कृत के मर्मज्ञ,त्रिकालदर्शी कवीँद्र रविन्द्रनाथ की हुबहु शक्लवाले, धवल दाढी, गोरे,रहस्यमय, विलक्षणात्मा थे वे..मुझे उनके दर्शन हुए तब मैँ, १८ साल की रही होउँगी ..उन्होँने मुझे देखते ही कहा, " ये मानसिक रुपसे २८ वर्ष की है ! " माने उम्र से १० साल ज्यादा ..राज कपूर जी की बडी बिटिया ऋतु भी साथ थी उसे बतलाया, " हम लोग पहले वियेना ( युरोपे का एक शहर ) मेँ मिले थे ! " वो घबरा के बोली, " मैँ तो वहाँ गई ही नहीँ ! " तो वे सिर्फ मुस्कुरा दिये ..कैयोँ के असाध्य रोगोँ को उन्होँने ठीक किया था ..उनहेँ कभी भूल न पाऊँगी ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप ही की लिखी हुई आपकी कोई पसंदीदा रचना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; रात कहती बात प्रियतम,&lt;br /&gt;तुम भी हमारी बात सुन लो,&lt;br /&gt;थक गये हो, जानती हूँ,&lt;br /&gt;प्रेम के अधिकार गुन लो !&lt;br /&gt;है रात की बेला सुहानी,&lt;br /&gt;इस धरा पर हमारी,&lt;br /&gt;नीँद से बोझिल हैँ नैना,&lt;br /&gt;नमन मैँ प्रभु मनुज के!&lt;br /&gt;रात कहती है कहानी,&lt;br /&gt;थीस्वर्ग की शीतल कली,&lt;br /&gt;छोड जिसको आ गये थे-&lt;br /&gt;उस पुरानी - सखी की !&lt;br /&gt;रात कहती बात प्रियतम !&lt;br /&gt;तुम भी सुनो, मैँ भी सुनुँ !&lt;br /&gt;हाथ का तकिया लगाये,&lt;br /&gt;पास मैँ लेटी रहूँ !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कोई ऐसी फिल्म है जो बहुत पसंद हो आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; " मुगल - ए - आज़म " मेरी पसँदीदा फिल्म है मधुबाला दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर दुर्गा खोटे और अन्य सभी सह कलाकारोँ का उत्कृष्ट अभिनय, नौशाद साहब का सुमधुर , लाजवाब सँगीत और एक से बढकर एक सारे गाने, वैभवशाली चित्राँकन, कथा की नायिका की मासूमियत और खूबसुरती जो उसके जीवन का अभिशाप बन गई और अनारकली का त्याग ..प्रेम के लिये आत्म समर्पण , बहुत सशक्त भावोँ को जगाते हैँ बस्स वही सब पसँद है ~~&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि आपको आपकी पसंदीदा फिल्म मुग़ले आज़म बनाने का मौका मिले तो आप ब्लॉग जगत में से किसे मुख्या किरदार देगी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; आपको ही दूँगीँ ..अनारकली / माने मधुबाला आप चुन लीजियेगा :-)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या पढ़ना पसंद करती है आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; वैसे तो लम्बी लिस्ट है ..पर सच मेँ " सुँदर काँड " मेँ चमत्कारी शक्ति है ! हनुमान जी का सीता मैया को रावण की अशोक वाटीका मेँ खोजना और पाप का नाश और सत्य पर विजय हमेशा नई आशा का सँचार करता है ~और एक पुस्तक है " शेष - अशेष "मेरे पापाजी पर बहुत सारे सँस्मरणात्मक लेखवाली ..उसे पढते समय , अक्सर, छोड देती हूँ क्यूँकि ..आँसू आ ही जाते हैँ उनकी और अम्मा की यादेँ तीव्र हो उठतीँ हैँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ठमको आँटी के बारे में बताइए ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी:&lt;/strong&gt; हमारे सामने एक आँटीजी आगरा से रहने बम्बई आयीँ थीँ ..रोज ही सिनेमा देखने चल देतीँ थीँ हम लोग उन्हेँ "ठमको आँटी " प्राइवेट मेँ बुलाते थे ..ना जाने एक दिन क्या सूझी कि उनके घर कुँकु से लिपटा नारीयल, फूल और डाकू भैँरोँ सिँह के नामवाली चिठ्ठी छोड आये ...खत का मजमूँ था .... "घर मेँ रहा करो नहीँ तो तुम्हारे जान की खैर नहीँ ! " आँटीजी ने पुलिस बुलवाने का उपक्रम किया तब जाकर अम्मा के सामने डाकूओँ ने आत्म समर्पण कर दिया था !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या अमेरिका में आपको भारतीय माहौल की याद नही आती?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; याद तो बहुत आती है..कैसे ना आये ?भारत मेरी आत्मा से जुडा हुआ जो है !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अमेरिका में आप भारत की कौनसी चीज़ सबसे ज़्यादा मिस करती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; बेतकल्लुफ होकर जीना..किसी के घर पर फोन किये बिना जा धमकना..गर्मियोँ मेँ आम ..शाम को ताज़ा मोगरे के गजरे..और मघई पान का जोडा&lt;br /&gt;आहा ....sigh...sigh......कितनी चीजेँ गिनाऊँ कुश भाई ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप को किस विषय पर लिखना सबसे अधिक प्रिय है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; भ्रमण, व्यक्ति विशेष, धर्म, समाज ..ये ज्यादा हैँ मेरे जाल घर पे , so i guess they are a recurring theme &amp;amp; part of the patten.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ये बताइए कोई नयी पोस्ट डालते वक़्त आप किन बतो का ध्यान रखती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; मुझे सुँदर, अलग जरा हटके दीखेँ वैसे चित्र मेरी पोस्ट के साथ लगाना अच्छा लगता है..एकाध दफे चित्र को देखकर भी लेखन सूझा था जैसे " हम पँछी एक डाल के "वाली पोस्ट या अमरीका के शहरोँ मेँ घुमते हुए जो देखती हूँ वैसे चित्र ! और फिर लिखती हूँ , हमेशा ये सोच कर कि पढनेवालोँ को कुछ नया लगे और अच्छा भी लगे ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या कोई ऐसी जगह है जो आपको दिली सुकून देती हो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; इत्ते बरस हो गये ..वो जगह मेरी अम्मा की गोद ही थी जिस पे सर रखते ही, दुनिया भर के गम हवा हो जाते थे ! आज, मेरे बच्चोँ को वही देने का प्रयास करती हूँ घर पर इसी तरह का सुकुन बकरार रहे उसी के लिये, मेरा समस्त जीवन अर्पित है --&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; किस तरह का संगीत सुनती है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; ज्यादातर, हिन्दुस्तानी सँगीत ही सुनती हूँ ...ब्लोग जगत के शायद सभी गीतोँ के लिन्क और युट्युब पर भी , बहुत से गीत खोजने पे मिल जाते हैँ और एक मित्र हैँ वे बहुत उम्दा गीतोँ को चुनकर सी.डी. बनाकर भेजते हैँ ..सुबह पँडित जसराज जी ,पँडित भीमसेन जोशी जी जैसे शास्त्रीय गीत ~ और मेरी लतादीदी की बहुत बडी फेन हूँ उनको भी सुनती हूँ !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉग पर होने वाली बहस को आप कितना उचित मनती है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; कभी बहस से, जानकारियाँ मिलतीँ हैँ तो कभी बहस से किसी के दिल को जबर्दस्त ठेस भी पहुँचती है...हरेक को आज़ादी है ना, जो चाहे लिखे अपने ब्लोग के सभी "मालिक " हैँ !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत बढ़िया जवाब रहे आपके.. चलिए अब बारी है हमारे पाठको के सवालो की आइए देखे हमारे पाठको ने आपके लए क्या सवाल भेजे है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप इतने लंबे समय से ब्लॉग पर सक्रिय है ,नए ब्लोगर्स के बारे में आपका क्या कहना है ?&lt;br /&gt;आपकी सोच में कौन सा ऐसा प्रयास नये पुराने ब्लोगर्स को जोड़ सकता है ? - &lt;strong&gt;अनुराग जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; अनुराग भाई, आप पुराने ब्लोगरोँ से किस प्रकार का सहयोग चाहते हैँ ? इसके लिये तो दोनोँ को एक एक कदम आगे बढना होगा और दोस्ती का हाथ बढाना होगा तभी तो ये सँभव होगा --&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अपनी दिनचर्या के बारे में कुछ बताइए - &lt;strong&gt;मीनाक्षी जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; सुबह, सैर, फिर चाय,नाश्ता, दिनके लँच के लिये प्रबँध, फिर न्युज , फिर थोडा टीवी , फिर नेट पे , दुपहर तक ईश्वर पूजा फिर पेट पूजा, आराम और फिर शाम की तैयारी , टहलना और न्युज देख के भोजन, कीचन समेटना, फिर सुस्ताना ..ये तो घर पर रहूँ तब, जब बाहर काम से जाते हैँ तब यात्रा और बाहर ही खा लेते हैँ ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या आप फिर से भारत आकर बसना चाहेंगी या आभासी सम्पर्कों के जरियेही भारत को महसूस&lt;br /&gt;करके संतुष्ट हैं - &lt;strong&gt;अजीत जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; अजित भाई, १९७४, ७५, ७६ हम युवावस्था मेँ लोस एन्जिलिस रहे और फिर परिवार के बडोँ के आग्रह से भारत लौट आये ..१४ वर्ष बीते और अचानक सँजोग ही ऐसे बने कि दुबारा अमरीका आकर बसे ..मेरा मन तो आज भी भारत मेँ है परँतु ऐसा लगता है कि नसीब मेँ जहाँ रहना लिखा है वही होके रह्ता है - पूरे परिवार का निर्णय रहेगा ये तो - आगे की क्या खबर क्या हो !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि आपके 'वो' नाराज़ हो जाए तो आप उन्हे मनाने के लिए कौनसा गाना गाएँगी? - &lt;strong&gt;अभिजीत जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; !" हमेँ तुमसे प्यार कितना ये हम नहीँ जानते ..मगर जी नहीँ सकते, तुम्हारे बिना " फिल्म : कुदरत का गीत कैसा रहेगा अभिजीत भाई चलेगा ना ? ;-)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलिए अब चलते है रॅपिड फायर राउंड की ओर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अमेरिका - भारत&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; मेरा भारत&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अमिताभ बच्चन - अभिषेक बच्चन&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; अमित भैया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;सोच में बदलाव - बदली हुई सोच&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; सोच के बतलायेँगे :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मिठाई - नमकीन&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; नमकीन&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पुरानी फ़िल्मे - नयी फ़िल्मे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; Both / दोनोँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चलिए अब चलते है हमारे वन लाइनर राउंड की तरफ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;हिन्दी ब्लॉग जगत -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; ज़िँदाबाद ...ज़िँदाबाद&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;मीनाक्षी जी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; सेहरा मेँ गँगा की धारा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;भारत -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; नित प्रियम भारत भारतम&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;नोआ-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; My सोनु, मोनु / Sonu Monu :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;कुश की कॉफी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी &lt;/strong&gt;: बस पीते ही रहो ऐसी दिलकश और लज़ीज !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब बारी है हमारी खुराफाती कॉफी की.. तो हम पूछेंगे आपसे कुछ खुराफाती सवाल जिनके खुराफाती जवाब आपको देने होंगे..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;यदि एक दिन के लिए सभी ब्लॉग्स की कमांड आपके हाथ में आ जाए तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; कमाँडो बन जायेँ सभी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;चंदा को मामा क्यो कहते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; माँ के जैसा शीतल , चमकीला और प्यारा है ना चँदा मामा इसलिये&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;सियार रात में रोते क्यो है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; सारे नेता ऊँघते हैँ तो वे अपने भाइ लोगोँ को "मीस" जो करते हैँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश &lt;/strong&gt;:पानी हमेशा गीला क्यो होता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; सूखे दिलोँ को भिगाने की कोशिश करता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि रेल गाड़ी में से आख़िरी डिब्बा हटा दिया जाए तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी : &lt;/strong&gt;तो बेचारे यात्री ईँजनवाले हिस्से मेँ , सबसे आगे बैठ जायेँगेँ !गड्डी छोट्टी हो जाईगी पुत्तर ! LOL&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत अच्छे जवाब रहे है आपके लावण्या जी, मुझे बहुत अच्छा लगा आज आपसे बात करके.. ये लीजिए हमारी तरफ से एक गिफ्ट हेम्पर..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; Wow ! Let me open it ...अरे वाह ! इतनी बेशकिमती Gifts आपने रखीँ हैँ कुश जी की ...I'm speechless !! Thank you sooo very much ,appreciate your kindness Sir !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; चलते चलते ..एक प्रशन मेरा भी : "कुश जी " आपको भी ये खेल खेलना होगा -&lt;br /&gt;बतायेँ , "कोफी वीथ कुश " मेँ आप को कोफी कौन पीलाये ? हम सभी मिलकर या आप चुनेगेँ ? We all want "Kush ji " to play this game too very soon ~~&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा मुझे बहुत खुशी होगी.. खैर अंत में हमारे ब्लॉगर मित्रो को क्या कहना चाहेंगी आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लावण्या जी :&lt;/strong&gt; " बने चाहे दुशमन जमाना हमारा ..सलामत रहे...दोस्ताना हमारा " ..खुश रहो, मौज मनाओ, अपने भीतर के शिशु को हमेशा हँसता रखो thanx for your patience . God Bless you all.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का एक ओर एपिसोड .. ज़रूर बताएगा कैसा लगा आपको.. फिर मिलेंगे इस ब्लॉग पर अगले सोमवार हमारे ही बीच के एक ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए शुभम&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-2620978163420878003?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/2620978163420878003/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_18.html#comment-form' title='42 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2620978163420878003'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2620978163420878003'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_18.html' title='कॉफी विद कुश.. (सातवाँ एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>42</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-404534730132787585</id><published>2008-07-14T00:04:00.003+05:30</published><updated>2008-07-19T16:49:59.447+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (छेंटा एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;नमस्कार दोस्तो,&lt;br /&gt;स्वागत है आपका &lt;strong&gt;कॉफी विद कुश&lt;/strong&gt; के छठे एपिसोड में.. आज के जो हमारे मेहमान है.. उनके बारे में कहा जाता है की उन्हे पंगे लेने का बड़ा शौक है.. &lt;strong&gt;अजीत जी&lt;/strong&gt; के ब्लॉग शब्दो का सफ़र में तो आप इनके बारे में बहुत कुछ जान ही चुके है... बचा खुचा हम यहा पूरा किए देते है.. तो दोस्तो दिल खोलकर स्वागत कीजिए ब्लॉग &lt;strong&gt;पंगेबाज&lt;/strong&gt; वाले &lt;strong&gt;अरुण पंगेबाज जी&lt;/strong&gt; का...&lt;br /&gt;स्वागत है आपका अरुण जी कॉफी विद कुश में&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सबसे पहले तो ये बताइए कैसा लगा आपको यहा आकर?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;इस पर तो जाने के बाद ध्यान दिया जायेगा, तभी बताया जा सकता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए हम इंतेज़ार करेंगे, ये बताइए क्या वजह रही ब्लॉग का नाम पंगेबाज रखने की ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;अरे भाई ये मत पूछिये ये बडी दुख भरी कहानी है, सुन कर आपकी भी कपकपी लग जायेगी, मेरे ब्लोग को नारद जी ने नारद मे शामिल करने से मना कर दिया था. लिहाजा हमने भी उसे डीलीट मार दिया. एक दिन दो पैग लगाने के बाद याद आई की एक नारद महोदय है, उन्होने हमसे पंगा लिया है,उनसे हमे पंगा बराबर करना है . लिहाजा हमने पंगेबाज नाम से दुबारा ब्लोग बना डाला . फ़िर से भेजा और नारद जी भी घबरा गये और बिना किसी पंगे के नारद पर दिखा दिया गया . रवी रतलामी जी ने स्वागत टिप्पणी दी, बस वो दिन है आज का दिन है. हम यहा जमे है और पंगे पे पंगा लिये जा रहे है :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगर्स में किसे पढ़ना पसंद करते है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी &lt;/strong&gt;:ऐसे पंगे वाले सवाल के बारे मे आपने सोच कैसे लिया की हम फ़स जायेगे जी और खुद के लिये पंगा खडा करलेगे . एक दम गलत सवाल,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ओहो! आप तो बड़े पंगे वाले मूड में लग रहे है.. ये लीजिए आपकी कॉफी हो सकता है आपका मूड थोड़ा शांत हो जाए..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; ये कॉफी तो चकाचक है जी..जाते समय रास्ते के लिये थरमस मे डाल दीजीयेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप तो स्वयं पंगेबाज है, ये बताइए पंगे की परिभाषा क्या है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; पंगा,यानी "बेमतलब दूसरे के उंगली करना " सच मे तो यही है पंगे की परिभाषा&lt;br /&gt;पर हमारे हिसाब से जो आपके सुई चुभाने की सोच भी रहा हो उसके कम से कम भैस वाला इंजेकशन लगाना , ताकी अगला दुबारा हम से पंगा लेने का ख्याल करने से पहले भी १०० बार सोचे :) इसी लिये तो हम ब्लोगजगत के सबसे बडे और महान पंगेबाज कहलाते है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो ब्लॉगिंग में पहली बार किस से पंगा लिया था?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;श्रीश जी से , आखिर इस ब्लोग दुनिया मे हमे धकेला उन्होने ही था&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप खाली ब्लॉग्स पर ही पंगे लेते है या निजी जीवन में भी पंगेबाज़ है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; दोस्त ये जीवन ही पंगो से भरा है आप नही लोगे तो दूसरे आपसे लेंगे इसलिये अच्छा यही है "जो मारे सो मीर" यानी पहले आप ही ले डालो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कोई सबसे बड़ा पंगा&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;हम छोटे मोटे पंगे लेते ही कब है जी सारे सरासर बडे ही होते है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अपने परिवार के बारे में बताइए ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;एक बीबी दो बच्चे बस छोटा सा परिवार ही है हमारा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; एक दफ़ा स्कूल से भाग कर पिक्चर भी देखी थी आपने ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; स्कूल से भाग कर देखी गई इकलौती पिकचर " मुकद्दर का सिकंदर " मे हम भी मुकद्दर के सिंकदर निकले , हमे हमारे बापू हमसे अगली सीट पर अपने दोस्तो के साथ बैठे दिखाई दे गये थे, और हम तडी हो लिये जी :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो मतलब आप अपने पिताजी से बहुत डरते थे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;जी बहुत !, वो इस कमरे मे तो हम उस कमरे मे , एक बार तो उन्होने हमे जब पढाई के लिये गाजियाबाद रवाना किया तो उन्होने पूछा कितने पैसे मे काम चल जायेगा . मेरे कुछ ना बोलने पर उन्होने फ़िर पूछा पचास रुपये मे काम चल जायेगा. पूरा महीना काटना और कमरे का किराया और खाना भी . लेकिन मैने जवाब दिया जी चल जायेगा. मन ही मन बुडबुडाता रहा. याखीन करो जब ट्रेन चलदी. तब उन्होने पैसे दिये वरना मै पचास रुपये लेकर नई जगह नये शहर के लिये रवाना हो चुका था .:) े&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; साइकल बहुत चलाई है आपने?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; बहुत चलाते थे जी ३०/३५ किलोमीटर रोज.. पढने इसी से जाते थे ना.. पक्की याद भी छोड गई थी साईकल .अगले तीन दात चिमटा अचानक टुटने से बाहर निकल आये थे , लेकिन डाकटरो ने वापस लगा दिये थे जी ,अभी भी फ़ुल स्विंग मे काम करते है :) आप चाहे तो काट कर दिखा सकता हू&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ना ना, अच्छा ये बताइए पहली बार किस पर दिल आया था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी &lt;/strong&gt;:हेमा मालिनी पर लेकिन उसने धर्मेंद्र से शादी करली , फ़िर स्मिता पाटिल पर ,पर उसने भी राजबब्बर को चुन लिया तब हमने भी बिना दिल लगाये शादी करली जी , आजकल दिल अपने बच्चो की अम्मा कॊ ही दिया हुआ है . ना हमारे पास होगा ना हम किसी को देगे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लिखने का शौक कब से हुआ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;किसको कौन लिखता है जी आपको गलत बताया किसी ने . हम तो बस पंगा लेते है खामखा हमारी रेपुटेशन खराब ना करे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : कभी ना भुलाया जा सकने वाला पल ?&lt;br /&gt;अरुण जी : जब आखिरी बार पिताजी को हस्पताल लेकर गया था , आज भी कई बार लगता है कि वो कार मे मेरी सीट के ठीक पीछे उसी दिन की तरह बैठे है और मुझे दिलासा दे रहे है कि मै ठीक हू&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : कुछ ऐसा भी है खाने में जो आपको पसंद नही ?&lt;br /&gt;अरुण जी : तेज मसाले घी तैरता हुआ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : इतनी व्यस्त दिनचर्या में ब्लॉगिंग के लिए वक़्त कैसे निकल पते है?&lt;br /&gt;अरुण जी : वही तरीका जो समीर भाइ अपनाते है उनकी ब्लोगिंग बत्ती ट्रेन मे बैठते ही जलती है . हमारी सुबह सुबह एफ़ टीवी देखकर या फ़िर आफ़िस आते हुये रास्ते मे देख कर , अब ये मत पूछ बैठना क्या देखकर . वो नही बतायेगे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : खाली समय में आप क्या करते है ?&lt;br /&gt;अरुण जी : जी ब्लोगिंग&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : जीवन की कोई ऐसी घटना जिससे मन विचलित हुआ हो?&lt;br /&gt;अरुण जी : ामपुर का दिसंबर १९८८ के अंतिम दिन का वाकया है , हम कुछ दोस्तो ने एक दोस्त खुराना के घर नये साल के जश्न मनाने का प्रोग्राम बनाया था. लेकिन उसके संबंधियो के आ जाने से कैंसिल हो गया. हम सभी अपने अपने घर चले गये . थोडी देर बाद खुराना जी सम्बंधियो को गोली देकर दोस्तो के साथ मेरे पास फ़िर नमूदार हो गये बोले चलो सिविललाईन चलते है , रामसिंह के ढाबे पर बैठेगे, लिहाजा हम भी चल दिये ,अब हम एक और दोस्त भूटानी के यहा पहुचे और उन्हे आवाज लगाई . लेकिन बाहर आये उनके मकान मालिक एडवोकेट गुप्ता जी .कहा जा रही है टीम ? कोई नये साल का प्रोग्राम शोग्राम है क्या ? यार कभी हमे भी बुला लिया करो . लिहाजा उन्हे भी आंमत्रित कर लिया गया .वैसे मै खाना खा चुका हू लेकिन तुम लोग इतना ज्यादा प्रेस कर रहे हो तो मै चलता हू . अभी आया जरा पार्टी के लायक कपडे पहन आऊ. जब तक भूटानी जी आते वकील साहेब नया सूट टाई शाई पहन कर साथ हो लिये . सबसे ज्याद वही चमक रहे थे , खूब जमी वो पार्टी शाम आठ लेकर रात १२ बजे तक . सबसे ज्यादा चहकने वाले थे वकील साहब , और सच मे उस दिन उस पार्टी की रौनक भी वही थे . हर थोडी देर बाद रामसिंह को गले लगाते और अपने घर आने की दावत देते. रामसिंह भी उस दिन अपना गल्ला छॊड हमारे साथ ही जम गया था. रात अपने शबाब पर थी , घडी ने नये साल के आने की सूचना दी सभी लोगो ने एक दूसरे को जम कर गले लग लगा कर नये साल की शुभ कामनाये दी और सबसे ज्यादा वकील साहेब ने अगले पाच मिनिट मे हरएक के साथ डांस भी कर डाला .इसी के साथ खुराना और संजीव ने रामसिंह को बिल चुकाया और पार्टी स्माप्ती की घोषणा भी करदी . हम सभी लोग निकल कर बाहर आये कुछ अपने स्कूटर स्टार्ट कर रहे थे कुछ पीछे बैठने लगे थे . वकील साहब ने संजीव से सिगरेट ली बडी शान के साथ धुआ छॊडा और सडक पार चल दिये , कि मै अभी आया . सडक पार कर उन्होने रेलेवे स्टेशन के साथ बनी हुई दीवाल पर लघुशंका की , आने के लिये वापिस मुडे ... . और और बस हमने एक धडाम की आवाज सुनी एक ट्रक को हवा की स्पीड से जाते महसूस किया . जब तक समझ मे आया पता चला कि वकील साहब अपना आखिरी जश्न मना चुके थे . दोस्त फ़िर कौन सा नया साल किसका नया साल , वो रात शायद आज तक गुजरी तमाम रातो मे सबसे भारी रात थी. नये साल के पहले दिन का हर गुजरता पल हथोडे की चोट दे रहा था , वकील साहब दो बेटियो ७ साल ,५ साल को बेसहारा छॊड कर जा चुके थे , साल का पहला ही दिन था जब हम, वकील साहब को नये सूट के बजाय सफ़ेद कफ़न पहना उन्हे अंतिम विदाई दे रहे थे ,वो दिन है और आज का दिन हममे से कोई नये साल की पार्टी मे नही जाता&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : समीर जी ने अपने पिछले इंटरव्यू में कहा था की यदि ब्लॉग जगत में से करदरो लेकर यदि शोले बनानी होती, तो वो आपको 'सूरमा भोपाली' का रोल दिया था.. आपका क्या कहना है उस बारे में?&lt;br /&gt;अरुण जी : बिलकुल तैयार जी लेकिन साईनिंग एमाऊंट तो दिलवाईये, उसके बिना तो अपन बिलकुल काम नही करेगे जी अगर फ़्री मे काम करना होता तो मै रामू की सरकार अमिताभ के लिये क्यू छोडता क्यो छॊडता ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुश : यदि आप स्वयं अपने लिए फिल्म शोले का कोई किरदार चुनना चाहे तो क्या चुनेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; सांभा का आराम से उपर बैठकर खैनी खाऊंगा, और बाकियो से पंगे लूंगा .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत अच्छे जवाब रहे आपके.. चलिए अब शुरू करते है हमारा रॅपिड फायर राउंड&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कॉफी - चाय&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;चाय पर काफ़ी के रंग की ( ब्लैक टी)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बसंती - धन्नो&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;धन्नो पर नाम बसंती रखेगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; काली आँखे - काली जुल्फे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;काली आंखे पर काली जुल्फ़ो से झाकती हुई&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अख़बार - न्यूज़ चैनल&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;न्यूज चैनल पर अखबारो की खबरे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक लाइन में जवाब देना है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; राज ठाकरे -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;लडाकू मुर्गा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; नारद-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;कौन सा ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; द ग्रेट खली-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;आदिमानव&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; संजय बेंगाणी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;एक प्यारा सा दुलारा सा गुज्जू भाई&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुश की कॉफी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;एक कप और&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी कोई विश -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt;हा मेरे खुदा मुझे तुरंत एक ऐसी लडकी बनादे जिस पर राहुल लट्टू हो. मै भी भारत का भाग्य विधाता बनना चाहता हू..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए अब वक़्त है हमारे यहा की स्पेशल 'खुराफाती कॉफी' का जिसे पीकर आपको देने होंगे खुराफाती सवालो के खुराफाती जवाब&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर घी सीधी उंगली से भी ना निकले तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; गलतफ़हमी है जी आपको घी आज तक सीधी उंगली से नही निकला.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पोस्ट बॉक्स का रंग लाल ही क्यो होता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; ताकी आप को याद रहे कि चिट्ठी डालनी है इस डिब्बे मे , जेब मे नही.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि राखी सावंत से पंगा हो जाए तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; खामखा क्यो हमे लाईम लाईट मे लाना चाहते हो.जो इतनी गंभीर स्थिती पैदा होने के बारे मे सोच रहे हो ? बाढ का मौसम है हम किसी भी तरह कही भी आने वाली बाढ के लिये जिम्मेदार नही दिखना चाहते&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर काली बिल्ली आपका रता काट ले तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; तो इसके लिये वो खुद ही जिम्मेदार होगी हम नही..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर आपको कोई चिराग का जिन्न मिले और तीन काम करने को तैयार हो जाए तो वो तीन काम कौन से होंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; ये हम आपको काहे बताये जी , सिक्रेट भी कोई शब्द होता है ना ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलते चलते एक प्रश्‍न और, हिन्दी ब्लॉगिंग का भविष्य कैसा देखते है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अरुण जी :&lt;/strong&gt; चकाचक जी,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत बढ़िया जवाब रहे आपके अरुण जी.. आशा है आपको भी आनंद आया होगा कॉफी विद कुश में आकर.. इस बातचीत को यही विराम देंगे हम.. लेकिन जाने से पहले ये एक गिफ्ट हैम्पर हमारी तरफ से..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का छटा एपिसोड जिसमे मिलवाया हमने आपको छठे हुए पंगेबाज अरुण जी से.. आशा है आपको ये एपिसोड पसंद आया होगा.. लिख भेजिया कैसा लगा आपको इस बार का एपिसोड.. अगले साप्ताह इसी दिन इसी ब्लॉग पर फिर मिलेंगे हम हमारे ही बीच के एक और ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए.. शुभम&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-404534730132787585?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/404534730132787585/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_14.html#comment-form' title='34 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/404534730132787585'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/404534730132787585'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post_14.html' title='कॉफी विद कुश.. (छेंटा एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>34</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-7170984707192828254</id><published>2008-07-07T08:30:00.004+05:30</published><updated>2008-07-07T18:22:14.276+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (पाँचवा एपिसोड)</title><content type='html'>नमस्कार दोस्तो,&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कॉफी विद कुश&lt;/strong&gt; के पाँचवे एपिसोड में आप सभी का स्वागत है.. आज हम आपको मिलवाने वाले है एक ऐसी ब्लॉगर से जो एक नही, दो नही पूरी पंद्रह ब्लॉग्स पर लिखने वाली लेखिका से.. इनका अमृता जी, मीना कुमारी जी और गुलज़ार प्रेम तो हम इनकी ब्लॉग्स पर देख ही चुके है.. आइए जानते है कुछ और खास बाते इनके बारे में.. तो दोस्तो स्वागत कीजिए &lt;strong&gt;कॉफी विद कुश&lt;/strong&gt; के आज के एपिसोड में ब्लॉग &lt;a href="http://ranjanabhatia.blogspot.com/"&gt;'कुछ मेरी क़लम से'&lt;/a&gt; की लेखिका &lt;strong&gt;रंजना जी (रंजू)&lt;/strong&gt; से..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;स्वागत है रंजू जी आपका कॉफी विद कुश में... कैसा लग रहा है आपको यहा आकर ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt; अच्छा!! माहोल अच्छा है यहाँ का..काफी पीते हुए कुछ लिखा जा सकता है :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;सबसे पहले तो ये बताइए ब्लॉग्गिंग में कैसे आना हुआ आपका ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;अपनी छोटी बेटी की वजह से ..उसके ब्लॉग को देख कर अपना ब्लॉग बनाया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;हिन्दी ब्लॉग जगत में किसे पढ़ना पसंद करती है आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;बहुत हैं सब के नाम लेने यहाँ बहुत मुश्किल होंगे ..सब अपने तरीके से अच्छा लिखते हैं .समीर जी का ब्लॉग और उनकी लिखी पुरानी कई पोस्ट मैं अक्सर पढ़ती रहती हूँ खासकर जब मूड बहुत ऑफ़ होता है .कुश जी .अनुराग जी ,ममता जी हिंद युग्म लावण्या जी सागर नाहर जी ,बालकिशन जी ,संजीत ,मोहिंदर ,दिव्याभ [यह अब आज कल नही लिख रहे हैं ] अभिषेक ओझा अल्पना अनीता रचना शोभा .महक .बहुत हैं किसका नही पढ़ती मैं :) सभी पसंद है सिर्फ़ बहस वाले कुछ ब्लॉग छोड़ कर :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;काफ़ी सारे नाम लिए आपने.. इसी बात पर ये लीजिए हमारी स्पेशल कॉफी आपके लिए..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; वाह!बहुत ही बेहतरीन और मजेदार कॉफी..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;अच्छा ये बताइए हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;यहाँ अपने दिल की बात अपनी भाषा में बहुत ही सहज रूप से कही जा जा सकती है और बहुत से विषय हैं यहाँ पढ़ने को जो मुझे बेहद पसंद हैं ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;सुना है आपकी लंबाई की वजह से आप कॉलेज में चर्चित थी ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;जम्मू का वूमेन कालेज था मेरा कद बहुत लंबा है पेपर चल रहे थे .और मैं आराम से अपना पेपर कर रही थी तभी एक्जामिनर सामने से जोर से बोला "हे यू लास्ट बेंच गर्ल बैठ जाओ क्यूँ खड़ी हो ? " मैंने कहा "सर मैं तो बैठी हूँ" उसने विश्वास नही किया और वहां आ कर देखा और मुस्करा के कहा ठीक है .असल में उस से पहले में सर झुका कर शराफत से अपना पेपर कर रही थी पीठ सीधी की तो उसको लगा कि मैं खड़ी हो कर नक़ल करने की कोशिश कर रही हूँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आपके बचपन की कोई बात जो अभी तक याद हो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;बहुत हैं और याद भी सभी है ..पर सबसे ज्यादा याद आता गर्मी कि छुट्टियां होते ही नानी और दादी के घर जाना .और नानी जो कि अपने पानी के घडे को किसी को हाथ नही लगाने देती थी .जान बूझ कर उन्ही के घडे से ठंडा पानी पीना हालाँकि वहां जाते ही वह हम सब बच्चो को अलग अलग सुराही दे देती थी पर जो मजा उनके अपने रखे घडे से पानी पीने में था वो और कहाँ :)और दादा जी के साथ गांव में बाग़ की सैर को जाना और खूब सारे फालसे तोड़ कर लाना .सच में आज भी बहुत याद आता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;कैसी स्टूडेंट थी आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;एक गणित को छोड़ कर बाकी सब में अच्छी थी ..दसवीं तक था यह कमबख्त मेरे साथ ..और सिर्फ़ इसकी वजह से पापा से पढ़ाई में मैंने मार खायी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;जीवन की कोई अविस्मरणिय घटना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;जीवन का हर पल याद रखने लायक है और सुख दुःख का नाम ही जिंदगी है वैसे तो पर माँ का बहुत छोटी उम्र १० साल में साथ छोड़ जाना बहुत दुःख देता है आज भी ..और बहुत छोटी उम्र १९ साल में शादी हो जाना हंसा देता है आज भी :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;अपने परिवार के बारे में बताइए ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;परिवार में दो प्यारी सी बेटियाँ है पति है ससुर हैं&lt;br /&gt;बेटियाँ दोनों नौकरी करती है बड़ी बेटी एच आर इन पटनी कम्प्यूटर्स में है दूसरी इकोनोमिक्स टाईम्स में जर्नलिस्ट है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;सुना है ब्लॉगिंग की वजह से लोगो ने आपका ऑटओग्रॅफ भी लिया था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;जब हिंद युग्म का बुक फेयर में स्टाल लगा था और इस बात का प्रचार हम सबने अपने अपने ब्लॉग पर किया, उसको पढ़ कर जब कुछ पाठक जो मेरा लिखा निरन्तर पढ़ते हैं मेरा आटोग्राफ लेने उस स्टाल पर आए थे .तब लगा लिखना सार्थक हो गया और मेरी अब अपनी एक पहचान है :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आप ही की लिखी हुई आपकी कोई पसंदीदा रचना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;सभी बहुत पसंद है ..पर याद है अपनी पहली कविता जिस पर शायरी नेट का पहला इनाम मिला था वोह थी "'कल रात की खामोशी'' और अपनी लिखी कविता तोहफा बहुत पसंद है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;कोई फिल्म जो आपको बेहद पसंद हो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;यह तो बहुत मुश्किल सवाल है जी ..पिक्चर बहुत कम देखती हूँ पर जो देखी हैं वह पसंद की ही देखी है :) एक बतानी है तो इजाजत पिक्चर अपनी कहानी और सबके किए गए उस फ़िल्म में सहज अभिनय के कारण पसंद है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;बचपन में आप बहुत जासूसी करती थी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;हा हा हा! करती नही थी जी एक बार की थी, तब मैं कोई १४ साल कि हूंगी तब दीवाना और लोट पोट चंदामामा बच्चो की किताबे आती थी उस में कहीं जासूसी कहानी पढ़ कर छोटी बहनों को डराने की सूझी और पापा का ओवर कोट ,हेट और उनके गम शूज पहन कर दरवाज़े के पीछे छाता तान कर खड़ी हो गई और जैसे ही वह दोनों अन्दर आई छाता उनकी तरफ कर दिया और जब वह दोनी चीखी तो उनकी चीखे सुन कर मैं ख़ुद डर गई और जो हम तीनों चीखे तो सारा मोहल्ला वहां पर जमा हो गया और पापा ने जो शामत बनाई मेरी की आजतक जासूस बनने की सोचना तो दूर कोई किताब नही पढ़ती इस विषय पर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;क्या कोई ऐसी आदत है आपमे जो आप बदलना चाहेंगी ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;नही मैं बहुत अच्छी बच्ची हूँ :) एक आदत मुझे लगता है कि शायद मुझे बदल देनी चाहिए मैं विश्वास करती हूँ डू आर डाई मतलब करो या मरो शायद आर्मी माहोल में रहने के कारण यह आदत मुझ में आज भी मौजूद है पर घर में सबको लगता है कि यह आदत मुझे बहुत जल्दबाजी की ओर ले जाती है ..और इस से परेशानी हो जाती है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;किताबो से काफ़ी प्यार लगता है आपको?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;किताबे तो मेरी लाइफ लाइन हैं :) अमृता प्रीतम की सभी किताबे कई बार पढ़ चुकी हूँ सबसे ज्यादा पसंद है उनकी नागमणि [३६ चक ] और रसीदी टिकट पसंद इसलिए है उनका लेखन क्यूंकि वह दिल सेलिखा हुआ हैऔर सच के बहुत करीब है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है आपकी लिखी एक पुस्तक भी आ रही है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; 'साया' मेरी वह ड्रीम बुक है जिसको मैंने अपनी कविता लेखन के साथ साथ बड़ा होते देखा है और फ़िर यही सपना मेरी छोटी बेटी की आँखों में भी पलने लगा और आज उसकी वजह से मेरा यह सपना जल्द ही पूरा होने वाला है मेरा प्रथम काव्य संग्रह साया जल्दी ही आने वाली है ..उस के बाद बच्चो को एक किताब पर काम कर रही हूँ जिस में उनकी बाल कविताएं और रोचक जानकरी सरल लफ्जों में लिखने की कोशिश है ताकि आने वाली पीढी सहजता से अपनी भाषा से जुड़ सके और किताबो को पढने की रूचि बनी रहे .. किसी अच्छे पब्लिशर से मिलते ही यह सपना भी जल्द पूरा हो जायेगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप नारी विमर्श जैसी कई ब्लॉग्स पे भी लिखती है, क्या वजह रही उससे जुड़ने की?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; नारी से जुड़ना अकस्मात ही हुआ ..लगा कि कुछ बातें जो अब तक सिर्फ़ सोचती हूँ नारी को लेकर उनको अब लफ्ज़ देने चाहिए&lt;br /&gt;पर यहाँ कोई आन्दोलन नही है सिर्फ़ अपनी बात है हर नारी के दिल की जो दिल में सब वही लिखते हैं&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;क्या आप मानती है की नारी को आज भी मुक्त होने की ज़रूरत है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;नारी को नही उसके विचारों को सम्मान देने की ज़रूरत अभी भी है.. नारी कोई बँधी हुई नही हुई अब&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;कहा जाता है की नारी विमर्श जैसी कई ब्लॉग्स पर एक ही तरह की बात होती है, लोग अब उससे उबने लगे है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;उब तब होती है ..जब लगता है की कुछ कहने की जो कोशिश हो रही है वो कामयाब है...पर जिस रोज़ किसी स्त्री की कामयाबी देखते हैं.. ठीक उसी दिन कोई नया रेप या पढ़ी लिखी नारी को पीटती हुए देख लेते हैं तब लगता है की कहना बहुत हद तक सफल नही हो रहा है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;लेकिन इसे यू भी तो देख सकते है की किसी दिन रॅप या किसी नारी को पीटने की खबर मिले.. उसी दिन उसकी कामयाबी भी पढ़ने को मिले तो लग सकता है की अब सब बदल रहा है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;हाँ यूँ भी सोचा जा स्कता है ..पर शायद अभी समाज को पोज़ेटिव कम और नेगेटिव देखने की ज़्यादा आदत है, और उसी समाज में हम भी है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;तो इसका मतलब नारी ब्लॉग में नेगेटिव नज़रिए से लिखा जाता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;मैं नेगेटिव नही लिखती.. बाकी जो लिखते हैं लिखे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;जब एक कम्यूनिटी ब्लॉग में लिखा जाता है तो वहा व्यक्तिगत सोच क्या मायने रखती है? क्या आपके विचार वहा के बाकी लोगो से अलग है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;हाँ विचार सबके व्यक्तिगत हो सकते हैं ..वैसे मेरे अपने ख्याल पोज़ेटिव सोच से ज़्यादा मिलते हैं.. मुझे कामयाबी पर लिखना जयदा पसंद है जिससे औरो को सीख मिल सके..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;क्या वजह है की नारी मुक्ति या स्त्री विमर्श की बात करने वाले ब्लॉग पर अक्सर कमेंट नही देखे जाते जबकि उसी ब्लॉग के लेखको की व्यक्तिगत ब्लॉग पर कमेंट होते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; आपको समीर जी की हिन्दी चिट्ठाकारी पोस्ट याद है :) बस वही हाल है जब कई एक साथ मिल कर लिखते हैं तो शायद सामने वाले को पिटने का डर ज्यादा होता है :) मजाक कर रही हूँ ...मेरे ख्याल से सबके अपने व्यक्तिगत विचार है इस बारे में ,,जब जब नारी विमर्श की बात होती है तो अक्सर न ख़तम होने वाली बहस शुरू हो जाती है और हल तो सबने अपनी समस्या का ख़ुद  ही तलाश करना है जबकि व्यक्तिगत ब्लॉग में शायद बात दिल तक जाती है और विषय में अलग होते हैं ..तो पढने वाले पाठक भी अधिक मिल जाते हैं ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो क्या इसका मतलब नारी विमर्श वाले सभी ब्लॉग्स सिर्फ़ बहस करने के लिए है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; नही यह वह मंच है जहाँ समस्याओं का हल आपसी बातचीत से निकाला जा स्कता है&lt;br /&gt;एक संदेश तो उन नारियों तक देने की कोशिश होती है जो इस वक़्त किसी दुविधा से गुजर रही हैं&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यह तो बड़ी अच्छी बात है, अब तक कितनी समस्याओ का हाल निकाला जा चुका है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;हल कितना निकला पता नही पर नारी ब्लॉग में निरन्तर सदस्यों की बढ़ती संख्या बताती है की वह यहाँ सार्थक बातचीत कर सकती है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो आपके अनुसार किसी ब्लॉग की सफलता का मापदंड उसके सदस्यो की संख्या है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt; कुश तुम तो मुझे पिटवाओगे, बहुत शरारती सवाल पूछ रहे हो..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुश : हा हा हा! तो अब समझ में आया आपके.. खैर हमारे पाठको ने आपसे इतने अच्छे अच्छे सवाल पूछे है तो आप भी अच्छे से उनका जवाब दीजिएगा.. आइए चलते है हमारे पाठको के सवाल की ऑर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आपके जीवन का कोई ऐसा वाक़या जिसे याद करके किसी की गमी में बैठे बैठे भी हसी आ जाए? - &lt;strong&gt;पल्लवी जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; जम्मू में हमारे मकान मालिक जिन्हें उनके बच्चे बाबू जी और हम लोग डब्बू  जी कहते थे  उनकी एक आदत बहुत अजीब थी वह तेज बारिश आने पर छाता ले कर अपने घर  के आँगन में लगे निम्बू ,अमरुद और बाकी पौधो को पानी देते थे ..और मैं यदि घर में हूँ तो अपने निम्बू के पेड़ पर लगे निम्बू गिनना नही भूलते थे जिन्हें में उनकी नजर बचा कर चुरा लिया करती थी ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;आपको लिखने की इतनी ऊर्जा कौन प्रदान करता है? &lt;strong&gt;नीरज जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;मेरे लिखे को पढने वाले पाठक .जब उनकी ढेरों मेल मेरे पास आती है ..:) जनून भी है कुछ न कुछ हर वक्त पढने लिखने का ....अच्छा है न ...कहते हैं कि खुराफाती दिमाग को खाली नही रहना चाहिए :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कोई ऎसा वाक़या, जो आप भूलना चाहती हों ? &lt;strong&gt;डॉ अमर कुमार &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; हाँ एक वाकया जब मेरी बड़ी बेटी जब ४ साल  की  थी तो  दूसरी मंजिल से गिर गई थी और उसके बाद के ७२ घंटे मेरे लिए जीवन मरण का प्रश्न बन गए थे ..ईश्वर की असीम कृपा रही कि वही ७२ घंटे हम पर भारी पड़े उसके बाद वह ठीक हो गई ..जाको राखे साईँ मार सके न कोय ...:)उस हादसे को मैं जिंदगी में कभी याद नही करना चाहती ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;आपको किन किन लेखक या फिर किन किन किताबों ने बिगाड़ा? - &lt;strong&gt;सुशील जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; हा हा सही है यह भी .बहुत से लेखको का लिखा पढ़ा है   धर्मवीर भारती ,इस्मत चुगताई ,आबिद सुरती पर .मुझे सबसे ज्यादा बिगाडा अमृता जी ने  फ़िर शिवानी , .गुलजार और मीना जी की लिखी नज़मो ने मेरे सपनो को वो आसमान दे दिया जहाँ आज भी मेरा खुराफाती दिमाग अपनी उड़ान भरता रहता है :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर अमृता जिंदगी में ना आयी होती तो क्या तब भी आप ऐसी ही होती ? - &lt;strong&gt;अनुराग जी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; ऐसी होती से क्या मतलब है आपका :) अच्छी या बुरी ? मतलब कैसी हूँ मैं?&lt;br /&gt;हा .हा अनुराग जी पहले आप जवाब दे&lt;br /&gt;फ़िर मैं बताती हूँ  कि मैं क्या हूँ और क्या हो सकती हूँ :) ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कुश :&lt;/span&gt; मुझे किसी ने बताया था कि एक अच्छा रिपोर्टर अच्छा लेखक नहीं हो सकता है। कविता तो उसके बस की ही नहीं है, क्या यह सही है? &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;-मन्विन्दर जी&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;रंजना जी :&lt;/span&gt; जिसने भी कहा वह उसका अपना ख्याल होगा :) ऐसा कोई जरुरी नही है, कविता दिल की हालात की भावना से जन्म लेती है और वह जब दिल में उमड़ती है तो यह नही देखती की उसको लिखने वाला रिपोटर है या कवि लेखक&lt;br /&gt;जिस भाषा में हम बात करते हैं ,उसी भाषा में साहित्य सृजन करना कहाँ तक तर्क-संगत है ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;यह तो बड़े बड़े लेखक  गण ही बता सकते हैं .:) मैं अदना सी कुछ भी लिखने वाली क्या कह सकती हूँ इस विषय में .....मुझे तो अपनी उसी भाषा में लिखना अच्छा लगता है जो आम बोल चाल की है क्यूंकि मुझे लगता है वही सहज है लिखने में अपनी लगती है और दिल की बात दिल तक पहुँच जाती है ...&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="Ih2E3d"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt; कविता और गजल में कोई एक चुनना हो, तो कविता लिखना पसंद करेंगी अथवा गजल?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;अशोक जी मैं कविता लिखनी पसंद करुँगी ..गजल लिखने में अभी बहुत छोटी कक्षा की  विद्यार्थी हूँ ..सीख रही हूँ अभी लिखना इसको ..:)&lt;/b&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; १.अगर आपको अपने से कोई एक सवाल पूछना हो तो क्या पूछेंगी?anup ji&lt;br /&gt;२.उस सवाल का संभावित जबाब क्या है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;:) मैं तो रोज़ ख़ुद से कई सवाल करती हूँ ..शायद आपने पढ़ा नही मेरे ब्लॉग के परिचय में ख़ुद से बात करने की बुरी आदत है मुझे :) चलिए आपको भी बता देते हैं की रंजू ख़ुद से क्या सवाल पूछती है :) कि क्या आज रंजू ने कोई एक ऐसा काम किया जिस से किसी को खुशी मिली ..या कोई ऐसा काम जिस से किसी को दुःख पहुँचा हो ? यदि खुशी दी है तो जिंदगी का एक दिन जो आज है वह सफल हो गया और नही तो जिंदगी का एक दिन जो  बीत गया वह बेकार हो गया :) &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;  &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;   ब्लाग जगत को महिलाएं क्या दे रही हैं और महिलाओं को ब्लाग जगत से क्या मिल रहा है। &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;abraar ahamd &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;&lt;div&gt;मैं आपका प्रश्न शायद सही से समझ नही पा रही हूँ ..यदि आप एक ब्लागर की हेसियत से पूछ रहे हैं तो जो एक पुरूष ब्लाग जगत से हासिल कर रहा है वही महिला भी कर रही है ..क्यूंकि ब्लॉग स्त्रीलिंग या पुलिंग लेखन में अलग अलग नही बँटा है ...पर यदि आप आज की महिला के बारे में पूछ रहे हैं तो यह तो सब जानते हैं कि कंप्यूटर की दुनिया ने सब तरफ  क्रान्ति  ला दी है ..एक महिला जो अभी तक सिर्फ़ घर में गृहणी  थी वह   घर में ही रह कर घर की चार दिवारी से निकल कर तकनीकी जानकारी से परिचित हो रही है दुनिया को जान रही है अपनी नजर से पढ़ कर लिख कर ... .और इस से  उसको भी आत्मसंतुष्टि मिल रही है जो एक पुरूष ब्लागर को :)&lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कौन कौन से ब्लॉग पढ़ना नहीं पसंद, जरा दो तीन नाम तो बताईये?? और क्यूँ?SAMEER JI &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;समीर जी आप को तो मैं ब्लाग जगत का हनुमान समझती हूँ ..जो पलक झपकते ही संकट मोचन बन कर सबका संकट हर लेते हैं ..पर लगता है आपकी ड्यूटी बदल गई है यह प्रश्न लिखते वक्त ..नारद मुनि लग रहे हैं इस वक्त आप मुझे :) नारायण नारायण !!&lt;br /&gt;तो सुनो प्रभु जी मुझे राजनीति बिल्कुल पसंद नही है ,इस लिए उस से सबंधित ब्लाग भी नही पढ़ती हूँ ..और यह क्या अनर्थ कर रहे हैं प्रभु ..नाम में क्या रखा है :) &lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/b&gt;&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे किसी ने बताया था कि एक अच्छा रिपोर्टर अच्छा लेखक नहीं हो सकता है। कविता तो उसके बस की ही नहीं है, क्या यह सही है?&lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;&lt;b&gt;जिसने भी कहा वह उसका अपना ख्याल होगा :) ऐसा कोई जरुरी नही है ..कविता दिल की हालात की भावना से जन्म लेती है और वह जब दिल में उमड़ती है तो यह नही देखती की उसको लिखने वाला रिपोटर है या कवि ..लेखक &lt;/b&gt;&lt;br /&gt;मेरा दूसरा सवाल,&lt;br /&gt;क्या यह सच है कि दर्द से गुजर कर ही लेखनी में निखार आता है? दर्द की स्याही  से ही गजल लिखी जाती है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;b&gt;किसी ने कहा है ..&lt;br /&gt;खाली जगहें भरते रहना अच्छा है&lt;br /&gt;कागज काले करते रहना अच्छा है !:)&lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;दर्द और खुशी तो साथ साथ चलते हैं जिंदगी के ...कौन किस हालत में क्या लिख कर कमाल कर जाए कौन जाने :) पर मेरा अपना ख्याल है की दर्द में लिखा दिल के हर ज़ख्म को भर देता है ...मेरी ही लिखी कुछ पंक्तियाँ है ..जिनको मैं  हजल कहती हूँ :)&lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;दर्द के प्याले में डूबा हर लफ्ज़ अच्छा लगा&lt;br /&gt;यही है  ढंग जीने का तो सनम ,अच्छा लगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इक कोहरा सा बिछा है हर रिश्ते के दरमियाँ&lt;br /&gt;इनको उम्मीद के उजाले में देखना अच्छा लगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हर तरफ़ यहाँ कहने को इंसान ही है  सारे&lt;br /&gt;     इस बस्ती में सबको आइना दिखाना अच्छा लगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाकी फ़िर कभी :)&lt;/b&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बढ़िया जवाब रहे आपके.. अब वक़्त है रॅपिड फायर राउंड का. शुरू करते है हमारा रॅपिड फायर राउंड&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; रंजना - रंजू&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; रंजू&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; एकता कपूर - करीना कपूर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; दोनों बर्दाशत नही&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ज़्यादा पैसा - थोड़ा प्यार&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; थोड़ा प्यार ...थोड़े से पैसे के साथ ..महंगाई बहुत है भाई :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; घर की दाल - बाहर की मुर्गी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; घर की दाल .शुद्ध शाकाहारी हूँ :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए अब बारी है हमारे वन लाइनर राउंड की&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अमृता प्रीतम&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; बिंदास मोहब्बत का एक नाम&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अनुराग आर्य&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; एक बेहतरीन संवेदन शील इंसान जिस से हर कोई दोस्ती करना चाहता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगिंग&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; दिल की बात दूसरों तक पहुंचाने का बेहतरीन जरिया ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुश की कॉफी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; बहुत अच्छी संतुलित मिठास लिए जो आपनी बातो के झाग से होंठो पर मुस्कान चिपका देती है :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; काफ़ी बढ़िया राउंड रहा. अब बारी है हमारी खुराफाती कॉफी की जिसे पीकर आपको देने होंगे खुराफाती सवालो के खुराफाती जवाब&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;अगर आप पुरुष होती तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt;तो मैं इमरोज़ की तरह किसी अमृता से मोहब्बत करती ..हा हा :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;नाच नही जानने पर आँगन टेढ़ा ही क्यो होता है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;रंजू कैन डांस :) जिन्हें नही आता उनसे पूछो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश जी: &lt;/strong&gt;अगर आप 1 करोड़ रुपया जीत जाए तो सबसे पहला काम क्या करेंगी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt;वाह कुश जी लिफ्ट होने के सपने दिखा रहे हैं :):) थोडी सी तो लिफ्ट ...तो आधा मैं जो बच्चे देख नही सकते [मैं एक अंध महाविद्यालय में समय मिलने पर जाती हूँ ] उन बच्चो के इलाज मैं लगा देती ताकि वह यह खुबसूरत दुनिया देख सके और आधा घूमने और किताबे खरीदने पर लगा देती&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;बिना दूध, पत्ती और शक्कर की चाय कैसे बनाएँगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी : &lt;/strong&gt;कुश आप काफ़ी बनाते पिलाते चाय बनाना भूल गए हैं शायद :)तो कहवा या टी बेग्स उबले पानी में डाल कर बना लो लगता है आपने कभी फौजी चाय नही पी :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अगर पार्ट्नर फिल्म आपको लेकर बनाई जाए तो आप ब्लॉग जगत में से किसे अपना पार्ट्नर चुनेंगी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt;अगर यह सवाल स्त्रीलिंग या पुल्लिंग के बीच का चुनाव होता तो खुराफाती होता ..:) मैं घाघुती जो को अपना पार्टनर चुनती .उनके साथ बीते पल मैं भूल नही पाती :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलते चलते कुछ ऑर सवाल, हिन्दी ब्लॉगिंग का भविष्य कैसा देखती है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; बहुत उज्जवल ..आने वाला वक्त अच्छा होगा हर लिहाज से हिन्दी ब्लागिंग में .साहित्य .कविता और अन्य विषय पर अच्छी जानकारी मिलेगी .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;हमारे ब्लॉगर मित्रो से क्या कहना चाहेंगी आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंजना जी :&lt;/strong&gt; बस यही की हिन्दी भाषा को बढावा दे सार्थक लिखे ...बेकार की बहस में न पड़े ..वैसे यह एक परिवार है और सबके विचार मिले यह जरुरी नही पर उसको सभी सभ्य भाषा से सुलझाए   और नए हिन्दी ब्लागेर्स का उत्साह बढाए वैसे यहाँ सब बहुत ही समझदार  इंसान है पर अध्यपिका होने की आदत से एक छोटा सा लेक्चर मौका मिलते  ही मैंने दे दिया इसको अन्यथा न ले :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत अच्छे जवाब रहे आपके रंजना जी.. मान तो नही है लेकिन इस इंटरव्यू को अब यही विराम देना पड़ेगा.. हमे बहुत अच्छा लगा आप यहा आई और आपने अपने जीवन की कई अच्छी बुरी बाते हमारे साथ शेयर की. .बहुत बहुत धन्यवाद आपका.. &lt;br /&gt;रंजना जी : मुझे भी बहुत अच्छा लगा.. यहा की कॉफी वाकई में बहुत बढ़िया है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शुक्रिया रंजू जी. तो ये लीजिए ये है आपका गिफ्ट हैम्पर..&lt;br /&gt;रंजना जी : शुक्रिया कुश! बहुत बहुत शुक्रिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का पाँचवा एपिसोड.. रंजना जी के साथ, आशा है आपको पसंद आया होगा.. अपने विचार लिख भेजिएगा हमे.. अगली मुलाकात में हम फिर हाज़िर होंगे अपने ही बीच के एक ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए नमस्कार&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-7170984707192828254?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/7170984707192828254/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post.html#comment-form' title='54 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/7170984707192828254'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/7170984707192828254'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/07/blog-post.html' title='कॉफी विद कुश.. (पाँचवा एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>54</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-2456269401485956721</id><published>2008-06-27T09:20:00.012+05:30</published><updated>2009-01-07T15:55:49.925+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (चौथा एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;नमस्कार दोस्तो,&lt;br /&gt;स्वागत है आपका &lt;strong&gt;'कॉफी विद कुश'&lt;/strong&gt; के चौथे एपिसोड में.. आज के जो हमारे मेहमान है वो ब्लॉग जगत की ऐसी हस्ती है, जिनसे शायद ही कोई अपरिचित हो.. नये हिन्दी ब्लॉग्स लाने की एक मुहिम छेड़ रखी है इन्होने.. विदेश में रहते हुए भी ये हिन्दुस्तान के दिल में रचे बसे है.. दुनिया के किसी भी कोने में ये पलक झपकते ही जा सकते है होकर के सवार अपनी.. ऊडन तश्तरी में.. जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू ब्लॉग &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;&lt;strong&gt;ऊडन तश्तरी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt; क लेखक &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;&lt;strong&gt;'श्री समीर लाल जी'&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt; की .. &lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; समीर जी, स्वागत है आपका कॉफी विद कुश में! सबसे पहले तो ये बताइए कैसा लगा आपको यहा आकर?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बिल्कुल वैसा ही, जैसा आपको मेरे आने से लग रहा है. आप बताईये न!! आपको कैसा लग रहा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ओहो आप तो बड़े मूड में लगते है,&lt;br /&gt;उड़नतश्तरी बड़ा दिलचस्प नाम है.. &lt;a href="http://khetibaari.blogspot.com/"&gt;अशोक पांडे&lt;/a&gt; जी का कहना है की समीर मतलब हवा और उड़नतश्‍तरी तो है ही हवा में उड़नेवाली तश्‍तरी। क्या इसीलिए आपने भी अपने ब्लॉग का नाम उड़न तश्तरी रखा या कोई खास वजह अपने ब्लॉग का ये नाम रखने की ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; अनजान ख्वाबों की बेलगाम उड़ान के लिए इससे बेहतर वाहन और कौन सा हो सकता था.. बढ़ते वजन को लम्बे समय तक ढो सकने के लिहाज से भी यही वाहन उचित लगा. इसीलिए रख लिया और तो कोई खास वजह नहीं थी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपको तो हर कोई पसंद करता है अब आज आप बताइए आप ब्लॉगर्स में किसे पढ़ना पसंद करते है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; हम्म!! मुझे मालूम था कि यह प्रश्न तो जरुर ही पूछा जायेगा. परिवार के किस सदस्य को आप कम या ज्यादा प्यार कर सकते हैं. सबकी अपनी अपनी कुछ खास विशेषताऐं हैं और सबका अपना विशिष्ट स्थान है मेरी इस बड़ी सी काया के छोटे से दिल में.. अच्छा हुआ, आपने यह नहीं पूछा किसे पसंद नहीं करते हैं? बहुत छोटी सी खास लिस्ट थी मेरे पास, मगर अब नहीं बताऊँगा और जबाब की तरह ही, प्रश्न बदलना अलाऊड नहीं है इस खेल में.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी प्रोफाइल में लिखा है "समीर लाल की उडन तश्तरी... जबलपुर से कनाड़ा तक...सर्रर्रर्र... " उड़न तश्तरी के इस सफ़र के बारे में बताइए ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; जबलपुर की मिट्टी में पला बढ़ा हूँ. वहाँ की गलियाँ, सड़कें, दीवारें सब मुझे मेरी अपनी लगती हैं. जिन्दगी के सफर में चलते चलते न जाने कब कनाडा में आ गिरा कि अरर्र..अरर्र...करने का तक मौका नहीं मिल पाया-तब सरर्र..सरर्र ..ही कहलायेगी ऐसी स्पीड तो, जिससे मैं जबलपुर से कनाडा आ गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या वजह है की आप रहते कनाडा में है और लिखते भारत की बात है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; किसी ने सही ही कहा है कि आप भारत से भारतीय को तो बाहर ला सकते हैं मगर एक भारतीय में से भारत नहीं निकाल सकते.यही वजह भी है कि कलम तो कनाडा में चलती है मगर बात भारत और जबलपुर की ही होती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बिल्कुल दुरुस्त फरमाया आपने! इसी बात पे लीजिए आपकी कॉफी, बताइए कैसी लगी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; वाह, बहुत बेहतरीन! आनन्द आ गया. (रेडीमेड टिप्पणी का एक नमूना)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा हा!, बचपन में की गयी कोई शरारत जो अब तक याद हो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; ढ़ेरों हैं-शरारतें ही शरारते हैं. बताने में तकलीफ तो तब होती जब आप पूछते कि बचपन में कोई कायदे का सलीके से किया गया काम?? सुनिये: स्कूल जाने की उम्र में अभी एक साल बाकी ही था मगर बड़े भाई को और दीदी को जाता देख मैं रो रो कर जिद्द करता कि मैं भी जाऊँगा.. तब हम रावतभाटा, राजस्थान में रहते थे..(जी हाँ, &lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;बेजी&lt;/a&gt; का शहर) मगर तब न तो &lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;बेजी&lt;/a&gt; थी(वो तो पैदा ही नहीं हुई थी), अब हमसे ज्यादा अच्छा लिखती है तो हमसे बड़ी थोड़े न हो जायेगी. रहेगी तो छोटी ही) और न हम लिखते थे, तो पहचान नहीं थी. छोटी जगह..सब एक दूसरे को पहचानते थे इस लिये स्कूल की हेड टीचर पीटर मैडम नें मम्मी से कहा कि भेज दिया करो. हम भी स्कूल जाने लगे बड़े भाई के साथ. पीटर मैडम की कुर्सी के पीछॆ बैठा खेलता रहता और वहीं जमीन पर दूध पीकर सो जाता बीच क्लास में. एक दिन उनकी कुर्सी के पीछे बैठे बैठे उनकी साड़ी के पल्ले के, जो कुर्सी के पीछे लटक रहा था, सारे सलमे सितारे, जो शायद मुझे बहुत लुभावने लगे होंगे(क्यूँकि आज भी लगते हैं), धीरे धीरे करके उखाड़ लिए. उनको पता भी नहीं लगा. क्लास खत्म होने पर बड़ी मासूमियत से उन्हें सौंप भी दिये. पूरे एक मुट्ठी इक्कठे किये थे. वो सर पकड़ कर बैठ गई..हाय!! उनकी इतनी मंहगी साड़ी..क्या पता कितनी मंहगी थी मगर अगले दिन से हमारा स्कूल जाना बंद हो गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कैसे स्टूडेंट थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; किसके नजरिये से पूछ रहे हैं आप? खुद के हिसाब से तो बेहतरीन सुपर डुपर शाईनिंग स्टूडेंट, मास्साब के नजरिये से महा बदमाश, जो कभी सुधर ही नहीं सकता और रिजेल्ट के दृष्टिकोण से स्कूल में मिडियॉकर, कालेज में अच्छा और सी ए में सुपर, साढे तीन साल में ही पास कर लिया था सी ए जो हमारे समय में सबसे कम अवधि होती थी जिसमें आप पास कर सकते थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है आप राजनीति में भी रहे थे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; जी हा!! सी ए करते हुए बम्बई में स्टूडेंट एसोसिएशन की नेतागीरी भी खूब की. जनरल सेक्रेटरी रहे और बाद में पैनल लड़वाई. शिव सेना से भी जुड़ा फिर कांग्रस में मूव कर गया, नेतागीरी में महत्वाकांक्षा धारकों की एक स्वभाविक प्रक्रिया के तहत..यूथ कांग्रेस, बड़ी कांग्रेस, चैम्बर ऑफ कामर्स आदि में बहुत सक्रियता से जुड़ा रहा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; गणित की क्लास में अप्लिकेशन देकर छुट्टी लिया करते थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; हैन्ड राईटिंग अच्छी थी और गणित कमजोर. तो बस अंग्रेजी में एक छुट्टी की अप्लिकेशन नोट करके रख ली थी. लिखकर मास्साब को पकड़ा देते, हिन्दी मिडियम में पढते थे तो मास्साब भी अंग्रेजी में अप्लिकेशन देखकर सोचते रहे होंगे कि पिता जी से लिखवा कर लाया है, हमेशा सफलतापूर्वक बिना शक सुबहे के छुट्टियां ली. फिर क्या, दिन भर खेलना, तालाब में दोस्तों के साथ तैरना और मटर गश्ती.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कभी स्कूल भी बंक किया है आपने ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; खूब किया, मगर ११ वीं में आकर. उसके पहले तक बड़े भाई साहब जो मात्र १ साल बड़े थे मगर जो कि जरुरत से ज्यादा शरीफ और थोड़ा सिरियस टाईप के वाकई बड़े थे, उनके रहते कभी बंक नहीं मार पाये. खूब सिनेमा देखा स्कूल से भाग भाग कर. उनके स्कूल से निकलते ही हम बादशाह हो गये और फिर ११वीं के बाद हम बी कॉम करने लगे और वो इन्जिनियरिंग करने राउरकेला चले गये..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जब स्कूल से भाग कर जाते थे तो कभी पकड़े नही गये आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; स्कूल से भाग कर मूवी जाते तो लोग समझ न पायें कि स्कूल से भाग कर आयें है तो बस्ते में कॉपी किताब की जगह उस दिन दूसरी शर्ट पेन्ट रख कर ले जाते थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है कालेज में बेस्ट अटेंडेन्स का अवॉर्ड भी जीता आपने ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; कालेज में भी हमारी बादशाहत कायम रही. कॉलेज की तो ३ साल की सारी अटेडेंस एक डाक टिकिट के पीछे नोट की जा सकती है , फिर भी जगह खाली बच ही जायेगी. साईकिल स्टैंड से लेकर रजिस्ट्रार ऑफिस तक के बाबू सब सेट रहते थे, उनकी मेहरबानियों से बेस्ट अटेडेंस का अवार्ड भी ले आये. याने अवार्ड लूटने के हम शुरु से शौकिन थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पहली बार सिनेमा में फिल्म कब देखी आपने ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; पहली बार तो छुटपन में स्कूल की तरफ से, नीली हॉफ पेन्ट और सफेद कमीज पहनकर, सारे बच्चे लाईन में लगकर पूरा स्कूल से सिनेमाघर तक पैदल (५-७ मिनट का रास्ता था) जागृति फिल्म देखने ले जाये गये थे. ११ वीं में जब बंक मारना शुरु हुआ तो पहली सिनेमा चाचा भतीजा (धमेन्द्र और रणधीर कपूर वाली) देखी..फिर तो अमिताभ और रेखा की फिल्म लगे और हम पहले दिन पहले शो में हाजिर न रहें तो समझो फिल्म बॉक्स ऑफिस में ही पिट गई. वहीं से रेखा से इश्क का आगाज हुआ.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; साइकल बहुत चलाते थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; खूब चलाई और जम कर चलाई. कितनी चलानी है यह इस पर निर्भर रहता था कि जिस लड़की की साईकिल के पीछे पीछे जा रहे हैं, वो कहाँ तक जाती है. खुद का तो कोई कार्यक्रम ही नहीं रहता था. निपट फुरसतिया. फिर कॉलेज में सेकेन्ड ईयर से सुवेगा मिल गई थी. शायद घर वालों को शाम को हमें कॉलेज से थका हारा लौटते देख दया आ गई होगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है आप आम तोड़कर खाते थे, कभी पकड़े नही गये?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; ११ वीं बोर्ड एक्जाम की तैयारी चल रही थी. रात भर पढ़ाई चलती. १-२ बजे रात सारे दोस्त घूमने निकलते चुपके से.हमारा मित्र संजीव नहीं आता था साथ में. बहुत डरता था अपने पिता जी से. एक मेहता जी थे और उनके घर पर आम के पेड़ पर आम खूब लदते थे मगर दिन भर उनके पिता जी निगरानी करते और हम ललचाई दृष्टी से देखकर मन मसोस कर रह जाते. एक रात उनके घर में बाऊन्डरी वाल कुड कर हम सब आम तोड़ने घुसे. संजीव हमेशा की तरह साथ नहीं था और मैं गैंग का सरगना. न जाने कैसे, पत्तों की खड़ खड़ से या किसी और सुरसुराह से मेहता जी जाग गय और चिल्ला कर बोले. कौन है, बे!! सब के सब भागे..मगर मैने भागते समय चिल्ल दिया कि संजीव, भाग!!!..बस, फिर मेहता जी ने पीछा नहीं किया और अगले दिन संजीव को उसके पिता जी ने खूब मारा. उसके बाद संजीव हम लोगों के साथ रोज रात को चुपके से आ जाता. बिना आये भी मार तो पड़ ही चुकी थी फिर आनन्द काहे खोना. :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सुना है बचपन में जादू टोना भी किया है आपने? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; हा हा हा! एक बार मोहल्ले के एक परिवार ने रावण बनाने का चंदा नहीं दिया. हम सब बच्चों ने उन्हें मजा चखाने के लिए रात में उनके दरवाजे पर एक नारियल, हल्दी, कुमकुम, चूड़ी टूटी हुई, चावल के दाने और एक अगरबत्ती आधी जली हुई गोबर में गड़ा कर रख कर चले आये. सुबह उनके यहाँ हाहाकार मच गया. उन्होंने सोचा कोई टोना टोटका कर गया. फिर उन्होंने हवन पूजन करवाया और बाल भोज आयोजित किया. हम सब दोस्तों ने खूब जम कर प्रसाद और बाल भोज दबाया और खूब हंसे. इससे कहीं सस्ते चंदा देकर छूट जाते वो... :)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पहली बार किस पर दिल आया था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; पहली बार तो बहुत ही बचपन में पड़ोस की लड़की पर दिल आ गया था. कक्षा दूसरी या तीसरी में रहा हूँगा..किसी को पता ही नहीं चला,यहाँ तक की उसको भी. बहुत गोरी थी इसलिये मैंने भी मूँह दूध की मलाई लगा कर बहुत प्रयास किया कि गोरा हो जाऊँ मगर मायूसी ही हाथ लगी दोनों जगह. एक तो उसके पिताजी का ट्रांसफर हो गया तो वो चली गई और दूसरा, हम जरा भी गोरे नहीं हो पाये. जस के तस...आज तक.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप बचपन से ही इतने पतले थे या इसके लिए कठिन परिश्रम किया है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बचपन से ही अपनी उम्र के हिसाब से हमेशा मोटा रहा. बहुत छोटे में लोग मुझको गाल खींच खींच कर खिलाते थे.. ...गब्दू गब्दू--क्यूट क्यूट!! अल्ल्ले ले..मेरा ब्लैक रोज..और न जाने क्या क्या कह कर. खैर, तब मैं गोद में खेला करता था तो कह गये...कोई बात नहीं.. अब कह कर देखें जरा. पूरा लेख लिख कर हंसाते हंसाते ऐसी खिंचाई करुँगा उड़न तश्तरी पर कि जमाना याद रखेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बचपन में किस बात से डरते थे आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; अरे, हम काहे का किसी से डरते. लोग डरते थे जी हमसे. बस एक बात का डर रहता था कि किसी बदमाशी की खबर घर न पहुँच जाये पिता जी तक. हालांकि मार ज्यादा मम्मी से खाई मगर डर पिता जी से ही लगता था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पिताजी का मिज़ाज़ कैसा था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बहुत ही मजाकिया और उनके सेन्स ऑफ ह्यूमर के लिये अपने पूरे विभाग के चहेते अधिकारी रहे और बहुत नाम कमाया.मगर हम दोनों भाई उनके गुस्से से डरते भी बहुत थे और समय समय पर मार भी खाई.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लिखने का शौक कब से हुआ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; नियमित लेखन तो अभी दो ढ़ाई साल से करने लगे. उसके पहले १० या १२ साल की आयु में बच्चों वाली तीन चार कहानियाँ लिखीं और उस वक्त पर बाल स्तंभों में छपी भी. मगर फिर चरम बदमाशी, फिर पढ़ाई, सी ए की प्रेक्टिस और साथ ही नेतागीरी के चक्करों में समय ही नहीं निकला कि इस तरफ देखा जाये. कनाडा आने के इतने सालों बाद अब छिपा शौक फिर से उभरा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कभी ना भुलाया जा सकने वाला पल ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; जीवन के कई वाकये ऐसे हैं जो आज भी एकदम ताजे अंकित हैं मानस पटल पर दृश्य दर&lt;br /&gt;दृश्य.उन्हीं में से एक है जिस रात मेरा रेजेल्ट आया और मैं सी ए पास हो गया. घर पर कोई था नहीं, सब घूमने गये थे. एक दोस्त ने बम्बई से फोन करके बताया था. मैं अकेला ही बड़ी देर तक बिना संगीत के फोन के पास ही नाचता रहा मूँह से डींग डांग बजाते हुए और नाच जाकर तब रुका जब घर वाले लौट आये.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कौनसी डिश देखकर मूह में पानी आ जाता है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; कसटर्ड&lt;br /&gt;..मेरी कमजोरी. बस, मैं इसे देख रोक नहीं पाता और यही वजह है कि हमारे घर में इसका बनना बहुत कम होता है कि कहीं और मोटा न हो जाऊँ. यह उनकी साकारात्मक सोच है. कई बार पत्नी को समझाया कि मुर्दे पर क्या नौ मन माटी और क्या दस मन माटी. मानती ही नहीं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुछ ऐसा भी है जो खाना पसंद नही ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; सी फूड, पता नहीं क्यूँ उसका टेस्ट और उससे उठती महक कभी झेल ही नहीं पाया. बाकी तो सब चल जाता है. कुछ दिन पहले तक बताता था कि लौकी, तुरई, करेला बहुत पसंद है मगर कुछ लोगों ने बताया कि यह सब पसंद आना बुढापे में शुरु हो ही जाता है, तब से नाम लेना बंद कर दिया. क्यूँ सब्जी के नाम के कारण अपनी जवानी पर तोहमत लगवायें.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप हमेशा से विदेश में बसना चाहते थे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बसना?? हम तो आज भी इसे सरायी पड़ाव मानते हैं. जितनी जल्दी संभव हो पायेगा, घर लौट जायेंगे. उसी श्रृंखला की पहली कड़ी थी पिछली बार का छः मासी भारत प्रवास&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप बीन भी बड़ी अच्छी बजाते है.. ये हुनर कहा से सीखा ? पहली बार लाईव पॅर्फॉर्मेन्स कब दी आपने?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; कलम से तो मौके के हिसाब से सारे ही वाद्य बजा लेते हैं फिर बीन क्या चीज है मगर असलियत में ताली छोड़ कोई अन्य वाद्य नहीं बजा पाते. कभी ऑरकेस्ट्रा में बांगो ड्रम बजाया करते थे. अब तो जमाने से उसे छुआ भी नहीं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ताली से याद आया.. वॉशिंग्टन में हुए कवि सम्मेलन में आपने ताली पर एक कविता सुनाई थी.. हम उसका वीडियो यहा देते है.. आप कुछ बताइए उस कवि सम्मेलन के बारे में ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;object width="425" height="344"&gt;&lt;param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/_4673qhM6MI&amp;amp;hl=en"&gt;&lt;embed src="http://www.youtube.com/v/_4673qhM6MI&amp;amp;hl=en" type="application/x-shockwave-flash" width="425" height="344"&gt;&lt;/embed&gt;&lt;/object&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; मेरे गुरु, गाईड और भ्राता प्रियवर राकेश खण्डॆलवाल जी ने उस कवि सम्मेलन में बुलवाया था. बड़ा ही सक्सेसफुल और अविस्मरणीय रहा. लोगों द्वारा खूब सराहना मिली. अब तो फिर फिर बुलाये जाने लगे हैं. राकेश जी का बहुत स्नेह मिलता रहा है हमेशा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी एक पोस्ट थी वर्ड वेरिफिकेशन के बारे में "टिप्पणी कर और&lt;br /&gt;गाली खा" उसके बारे में क्या कहेंगे..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी : &lt;/strong&gt;&lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/2008/04/blog-post_21.html"&gt;"टिप्पणी कर और गाली खा"&lt;/a&gt; एक संदेशात्मक पोस्ट थी और बाकि सारे ताने बाने उसके इर्द गिर्द काल्पनिक बुने गये थे. उसका उद्देश्य मात्र हास्य हास्य में लोगों को यह बताना था कि वर्ड वेरिफिकेशन की हिन्दी में कोई उपयोगिता नहीं है. मॉडरेशन लगा लेना ही समस्या का समाधान है. वर्ड वेरिफिकेशन से मात्र टिप्पणी करने में तकलीफ बढ़ जाती है और हम जैसे टिप्पणी पीरों के लिए काम तो बढ़ता ही है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी नज़र में एक सफल ब्लॉगर बनने के लिए क्या ज़रूरी है? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; सफलता के सबके अलग अलग मापदण्ड हैं किन्तु मेरे विचार में आप खूब पढ़ें, किताबें पढ़ें, पत्रिकाऐं पढ़े और बस इमानदारी से अच्छा और नियमित लिखते जायें, फालतू की बेवजह बहसों में न पड़ें, थोड़ा समय तो लगता है पर धीरे धीरे आप सफल हो ही जायेंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप सबका उत्साह बढ़ाते हैं, वाह, बहुत बढ़िया आदि कह कर. क्या ऐसा सिर्फ ब्लॉग पर ही है या निजी जीवन में भी इसी तरह लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; अरे, यह तो बचपन की आदत है, छूटती ही नहीं. एक वाकया सुनाता हूँ-स्कूल में नौवीं या दसवीं कक्षा में हिन्दी की क्लास में मास्साब मैथली शरण गुप्त की पंचवटी पढ़ा रहे थे. जैसे ही उन्होंने दो पंक्तियां पढ़ी-चारु चन्द्र की चंचल किरणें.......-मैं क्लास में बोल उठा, वाह वाह, बहुत खूब, एक बार और. बस, फिर क्या था, ऐसी बेंत से पिटाई हुई कि कई दिन तक दर्द रहा. आज भी जब किसी की कविता पर लिखता या कहता हूँ कि वाह वाह, बहुत खूब..एक बार को पिटाई याद आ जाती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुछ हफ़्तो पहले आपके भारत आगमन पर आप कई ब्लॉगर्स से मिले थे कैसा रहा ये अनुभव ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; उन अनुभवों को शब्दों में बांधना शायद अनुभवों की मिठास को कम करना होगा&lt;br /&gt;. अलग अलग शहरों में ७५ से ज्यादा ब्लॉगरों से मिला. आनन्द का सागर बह निकला. कभी न भूलाये जा सकने वाला अति सुखद अनुभव रहा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपने एक &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/2008/03/blog-post.html"&gt;पोस्ट&lt;/a&gt; में "रीता" का ज़िक्र किया था, उनके बारे में बताना चाहेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; आह्ह! किस रग पर हाथ रख दिया आपने..रीत्त्त्ताआआ!!! हाय!! रीता का तो क्या बताऊँ वो तो....!!! अरे अरे, एक मिनट..एक मिनट!! यह आप कॉफी पीने बुलवाये हैं कि घर में बीबी से पिटवाने का इन्तजाम करवाने. ख्याल आ गया समय पर..वरना हम तो धारा प्रवाह में बताने ही जा रहे थे.. अब जाग गया हूँ, संभल कर जबाब दूँगा तो सुनिये..फॉर रिकार्ड..काल्पनिक चरित्र है. यही छापियेगा. क्यूँकि यह इन्टरव्यू बीबी जरुर पढेगी...आप इतनी डुगडुगी जो पीट चुके हैं कि आ रहा है ..आ रहा है...सरर्र...सरर्र..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; देखा जाता है लगभग हर नयी पुरानी ब्लॉग पर समीर जी की टिप्पणी होती है? इतना समय कैसे निकलते है? क्या इसमे भी आप वही &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/2007/10/blog-post_30.html"&gt;"१.३० घंटे मे ५० चिट्ठे मय टिप्पणी निपटायें"&lt;/a&gt; वाली नीति अपनाते है..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; पूरा राज तो क्या खोलें, कुछ तो बंद पिटारा रहने दें मगर सत्य यह है कि मात्र चार घंटे सोता हूँ..इस वजह से पढ़ने लिखने का समय बहुत मिल जाता है. अतिरिक्त कोशिशें तो करनी ही होती हैं मगर एक प्रयास जरुर रहता है कि जो भी पढूँ उस पर उपस्थिती जरुर दर्ज करा दूँ. प्रोत्साहन की तो हमें और सभी को जरुरत रहती है और टिप्पणियाँ उसी का काम करती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;&lt;a href="http://rajeshroshan.com/"&gt;राजेश रोशन जी&lt;/a&gt; ने अपनी पोस्ट में आपको &lt;a href="http://rajeshroshan.com/2008/06/17/sameer-lal-udantashtari/"&gt;ब्लॉग जगत का सचिन तेंदुलकर&lt;/a&gt; कहा.. क्या कहेंगे आप इस बारे में ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; इस बारे में तो क्या कहें! राजेश जी हमारे शुभचिंतक है और हमारे प्रति स्नेह रखते हैं तो इस तरह कहते हैं. सभी मित्रों से ऐसा ही स्नेह मिलता रहता है. कितने ही प्रियवर हम पर लिख चुके, बड़ा अच्छा लगता है. बस, एक ही प्रयास रहता है कि सबका स्नेह ऐसे ही बना रहे इसलिए और ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है कि उनकी अपेक्षाओं पर कुठाराघात न हो जाये और मैं खरा उतरुँ. हर बार कुछ बेहतर करने का हौसला इन्हीं सब बातों से तो मिलता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अच्छा ये बताइए की अगर आपको हिन्दी ब्लॉगर्स को लेकर शोले फिल्म बनाने को कहा जाए तो आप कौनसा किरदार किसे देंगे ? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी &lt;/strong&gt;: हा हा!! बड़ा ही रोचक प्रश्न है. तीन किरदार तो फिट हैं. ठाकुर बनाऊँगा &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञानदत्त जी&lt;/a&gt; को, सूरमा भोपाली &lt;a href="http://pangebaj.com/"&gt;पंगेबाज&lt;/a&gt; और हम डबल रोल में, एक तो अंग्रेजों के जमाने के जेलर खुद बन जाऊँगा और दूसरा कालिया. मौसी हमारी &lt;a href="http://ghughutibasuti.blogspot.com/"&gt;घूघूति जी&lt;/a&gt;. बाकी के सारे किरदारों को अभी सिक्रेट ही रखते हैं वरना घमासान मच सकती है. यहाँ तक की सारे डाकुओं के घोड़े, धन्नो, वो मालगाड़ी जिससे जय वीरु की एन्ट्री होती है, सब हिन्दी ब्लॉगर्स में से ही लिए जायेंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अब चलते है हमारे पाठको के सवाल की तरफ.. &lt;br /&gt;साधना भाभी जी से आपकी पहली मुलाकात कब और कैसे हुई ? - &lt;a href="http://www.lavanyashah.com/"&gt;लावण्या जी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; एक हसीन लम्हे में दिल के दरवाजे पर घंटी बजी और दरवाजा खुलते ही वो दाखिल हो गई..दाखिल हुई तो ऐसी कि स्थापित ही हो गई.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप सोच कर लिखते हैं या लिख कर सोचते हैं? - &lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/"&gt;नीरज जी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बस, लिख कर लोगों को सोचने के लिए मजबूर करते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; समीर जी को ख़ुद को एक शब्द में बताये ? - &lt;a href="http://ranjanabhatia.blogspot.com/"&gt;रंजू जी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी : &lt;/strong&gt; हा हा!! इतनी बड़ी काया..और एक शब्द में समेटना चाहती हैं. कई वाल्यूम का ग्रंथ बन जायेगा वो एक शब्द. पक्का आप मजाक कर रही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि समीर जी को कोई सवाल पूछना होता तो वे क्या पूछते? - &lt;a href="http://ghughutibasuti.blogspot.com/"&gt;घुघूती जी&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; आपसे?? तब पूछता-कैसे लिख लेती हैं इतना बेहतरीन आप?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब वक़्त है रॅपिड फायर राउंड का.. इन दोनो में से कोई एक चुनना है आपको&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जबलपुर - कनाडा&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; जबलपुर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पतली आवाज़ - पतली कमर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; पतली आवाज...जिसे सुनकर पतली कमर बल खा जाये.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; समीर लाल - ऊडनतश्तरी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; ऊड़नतश्तरी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अरुणा रॉय - लवली कुमारी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; लवली अरुणा (एक हमारी मास्टरनी हैं html पढ़ाती है और दूसरी प्योर कवियत्री-दोनों अपनी अपनी जगह विशिष्ट हैं इसीलिए दोनों का नाम लेना पड़ा-वरना मास्टरनी जी छड़ी दिखाती और अरुणा का पुलिसिया डंडा तो पड़ता ही पड़ता)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बीवी - बच्चे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; बीबी याने पहले आज के खाने का तो जुगाड़ हो जाये फिर बुढ़ापे में बच्चों से कह देंगे कि कुश से टाईपो हो गई थी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए शुरू करते है अब हमारा वन लाइनर राउंड.. आपको एक लाइन में जवाब देना है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लालू प्रसाद यादव&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; राजनिति का जादूगर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार मिश्रा&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; मेरे प्रिय अनुज एक बेहतरीन इन्सान एवं उच्च दर्जे के व्यंग्यकार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; वर्ड वेरिफिकेशन&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; स्पीड ब्रेकर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; टिप्पणी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; ब्लॉग का च्यवनप्राश.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कुश की कॉफी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; मजेदार बखिया उधेडू कॉफी-नार्को वाला ट्रूथ सीरम-पी कर सब सच उगल दो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब वक़्त है हमारी खुराफाती कॉफी का. हम आपसे पूछेंगे कुछ खुराफाती सवाल जिसके जवाब भी आपको खुराफात से देने होंगे.. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर आपको भारत की महँगाई कम करनी हो तो क्या करेंगे ? &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी : &lt;/strong&gt; महँगाई को उड़न तश्तरी में बैठा कर मंगल पर भेज देंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ऊडन तश्तरी को अगर बच्चा हो तो उसका नाम क्या होगा ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी : &lt;/strong&gt; ऊडन कटोरी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर मल्लिका शेरावत आपसे आपका मोबाइल नंबर माँगे तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; ऑफिस का नम्बर दे दूँगा. मोबाईल तो बीबी भी उठा लेती है कभी कभी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर कभी सचमुच में कोई ऊडन तश्तरी आपके घर उतार जाए तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; भाग खडा होऊँगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; दूल्हा हमेशा घोड़े पर ही क्यो बैठता है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; गधे पर गधा कैसे बैठ सकता है, इसीलिये!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलते चलते कुछ और सवाल.. &lt;br /&gt;हिन्दी ब्लॉगजागत का भविष्य कैसा देखते है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; सुनहरा..बड़ी तेजी से हम उस ओर बढ़ रहे हैं&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हमारे ब्लॉगर मित्रो से क्या कहना चाहेंगे आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; सब आपसी स्नेह बनाये रखें. मजेदार अच्छा लेखन नियमित करते रहे. खूब पढ़े, खूब लिखें और हमेशा ध्यान रखें कि हमें और बेहतर करना है हर बार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप यहा आए और हमारे साथ कॉफी शेयर की.. ये वाकई बहुत बढ़िया अनुभव रहा.. ये लीजिए हमारी और से एक गिफ्ट हेम्पर और साथ में ये कुछ सलमे सितारे..  &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;समीर जी :&lt;/strong&gt; सलमे सितारे तो पीटर मैडम को दे दूँगा और गिफ्ट हैम्पर को एक सुखद यादगार बना कर दिल की अल्मारी में सजा लेता हूँ. बहुत आभार, आपने हमें आमंत्रित किया और तबीयत से बखिया उधेड़ी. बहुत शुभकामनाऐं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो दोस्तो ये था हमारा 'कॉफी विद कुश' का चौथा एपिसोड समीर जी के साथ.. उम्मीद है आपको पसंद आया होगा.. ज़रूर बताईएगा कैसा लगा आपको इस बार का एपिसोड.. अगले सप्ताह फिर मिलेंगे हम इसी जगह पर हिन्दी ब्लॉग जगत के एक और ब्लॉगर के साथ तब तक के लिए.. नमस्कार!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-2456269401485956721?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/2456269401485956721/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_27.html#comment-form' title='60 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2456269401485956721'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2456269401485956721'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_27.html' title='कॉफी विद कुश.. (चौथा एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>60</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-6250194785169324254</id><published>2008-06-19T08:56:00.001+05:30</published><updated>2009-01-07T15:55:10.609+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (तीसरा एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;नमस्कार दोस्तो, स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' के तीसरे एपिसोड में.. आज की जो हमारी मेहमान है उनके बारे में एक बात कहना बहुत मुश्किल है. की उनकी कलम उर्दू में बेहतर लिखती है या हिन्दी में.. उनके पसंदीदा गीत तो हम उनके ब्लॉग पर सुनते ही आए है.. साथ ही उनकी अपनी आवाज़ में भी हमे काफ़ी गीत मिल चुके है.. जी हा दोस्तो में बात कर रहा हू.. ब्लॉग &lt;a href="http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/"&gt;'पुखराज का चाँद'&lt;/a&gt; वाली &lt;strong&gt;पारूल जी&lt;/strong&gt; की..&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आप कॉफी विद कुश के तीसरे एपिसोड की गेस्ट है.. कैसा लग रहा है आपको यहा आकर ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; सच कहु तो बहुत खुशी है लेकिन थोड़ा डर भी लग रहा है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सबसे पहले तो ये बताइए ब्लॉग्गिंग में कैसे आना हुआ आपका ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; ओर्कूट,राहे अदब मे युही मस्ती मज़ाक मे लिखती थी,एक दो बार आवारा बंजारा वाले संजीत जी ने उनके अपने ब्लाग के बारे मे चर्चा की्। बस वही से शौक़ जग गया ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; ब्लॉग का नाम चाँद पुखराज का रखने की कोई खास वजह ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; गुलज़ार का लिखा एक शेर मुझे बहुत पसंद है&lt;br /&gt;“एक सबब मरने का ,एक तलब जीने की&lt;br /&gt;चाँद पुखराज का रात पश्मीने की “&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत में किसे पढ़ना पसंद करती है आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; अनगिनत नाम हैं- &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञान जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;बेजी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://pratyaksha.blogspot.com/"&gt;प्रत्यक्षा&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://meenakshi-meenu.blogspot.com/"&gt;मीनाक्षी दी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://www.lavanyashah.com/"&gt;लावण्या दी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/"&gt;नीरज जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://azdak.blogspot.com/"&gt;प्रमोद जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://radiovani.blogspot.com/"&gt;यूनुस&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://kanchanc.blogspot.com/"&gt;कंचन&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://bakaul.blogspot.com/"&gt;मनीष जोशिम&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://ek-shaam-mere-naam.blogspot.com/"&gt;मनीष [एक शाम मेरे नाम]&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://mamtatv.blogspot.com/"&gt;ममता&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;शिव कुमार जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://nahar.wordpress.com/"&gt;सागर नाहर जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://shabdavali.blogspot.com/"&gt;अजीत जी&lt;/a&gt;, प्रियंकर जी, राकेश खंडेलवाल जी, &lt;a href="http://boondiendilki.blogspot.com/"&gt;सई&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://meets-lajja.blogspot.com/"&gt;मीता&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://apnikhabar-priyesh.blogspot.com/"&gt;प्रियेश&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://www.kushkikalam.blogspot.com/"&gt;रामलाल(कुश)&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://manishi11.blogspot.com/"&gt;मनीषा&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://anuragarya.blogspot.com/"&gt;अनुराग&lt;/a&gt;,  कबाड़खाना के गीत और &lt;a href="http://www.kisseykahen.blogspot.com/"&gt;मीत&lt;/a&gt; । अरे बाबा कितने नाम लिखूं ? सभी प्रिय हैं, सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है । जिन मित्रों के नाम छू्ट गये हैं उनसे माफ़ी चाहूंगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; इतने सारे नाम!! एक सही पाठक मालूम होती है आप.. खैर! बातो का सिलसिला बढ़ाने से पहले ये लीजिए आपकी गरमा गर्म कॉफी..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश! मैं इसी का इंतेज़ार कर रही थी की कब तुम कॉफी के लिए बोलो... ह्म्म कॉफी वाकई अच्छी है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉग जगत की क्या खास बात लगी आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; मुझे ब्लाग जगत से बहुत स्नेह मिला । जैसे &lt;a href="http://meenakshi-meenu.blogspot.com/"&gt;मिनाक्षी दी&lt;/a&gt; कहती है कि अब ये परिवार सा लगता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सबसे पहले आपके बचपन से शुरू करते है.. ये बताइए कैसी स्टूडेंट थी आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; 8th तक गणित के साये तले दबी कुचली –9th से अंको से मुक्ति मिली तो नाम सदा टापर्स मे रहा ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सुना है स्कूल जाते वक़्त बहुत रोती थी आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; अरे पूछो मत!! स्कूल से बहुत डर लगता था । जो घर का बंदा मुझे पहुंचाने जाता था उसके साथ ही रो धो कर वापस आ जाती थी । और जिस दिन रुक गयी तो क्लास टीचर के प्यार से बुलाने पर मै उनहे चिकोटी काटने लगती थी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आप शरारती भी बहुत रही बचपन में.. बहनो के साथ खूब मस्ती किया करती थी ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; जी हाँ!! बाबा की गोल्ड फ्लेक चुपके से पीते थे.. कभी कभी तो धोबी से बीड़ी माँग कर बहनो के साथ बीड़ी पिया करते थे.. अब तो बस यादें बाकी रह गयी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपने संगीत सीखा है.. क्या कोई डिग्री ली है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; मैने संगीत गायन मे एम. ए. किया है, वैसे निज़ी तौर पे मेरा मानना ये है की संगीत की रूह तक पहुँचने के लिए किसी डिग्री की ज़रूरत नही होती.. ये तो नूर की बूँद है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सुना है कॉलेज में संगीत सीखते वक़्त आप काफ़ी धार्मिक हो गयी थी ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; कॉलेज मे संगीत की गुरू थोड़ी गर्म मिज़ाज की थीं । गुस्सा आने पर तबला दुरूस्त करने वाली हथौड़ी तक खीँच कर हम सब की तरफ़ फ़ेंक देती थी । इसलिये क्लास से पहले हमेशा हनुमान जी का ध्यान कर के जाते थे हम सब ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आपके परिवार में बहुत दिलचस्प बाते होती थी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; जी हा बहुत सारी.. बल्कि कुछ समय पहले तक तो हमारे यहां 40 लोगों की रसोई एक साथ बनती थी । पूरा का पूरा मेला ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; क्या कोई ऐसी बात है जो अब तक आप भूल नही पाई हो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; मेरी एक बेहद करीबी मित्र का निधन । जिससे मैने जीवन जीना सीखा..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; ओह!&lt;br /&gt;अपनी बीती हुई ज़िंदगी में अगर कुछ बदलने का मौका मिले तो क्या बदलना चाहेंगी आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; बी ए के लिये घर मे ज़िद कर के दया्लबाग यूनिवर्सिटी आगरा मे दाखिला लिया था और होम सिक्नेस की वजह से वापस लौट आयी थी ---वो मलाल आज तक है दिल में और हसरत भी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सुना है जब आपने ब्लॉगिंग शुरू की तो कई समस्याए आई थी..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; क्या क्या बताऊ.. सबसे ज़्यादा मुश्किले तो चिट्ठाजगत में पंजीकरण के वक़्त आई संत्राभ,चटकायें,अधिकृत , आदि शब्दों ने शुरूआत मे बहुत सताया । अभी भी सोच कर पसीना आ जाता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; कैसा लगता है जब लोगो की टिप्पणिया मिलती है.. शानदार पोस्ट ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; संशय होता है । फ़िर उपर वाले का शुक्रिया करती हूं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हमारे पिछले एपिसोड के गेस्ट और उम्दा लेखन के धनी अनुराग जी आपको "लेडी गुलज़ार" कहते है, क्या कहेंगी आप इसके बारे में ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; अनुराग बहुत अच्छे और पुराने दोस्त हैं ..और दोस्तों को मज़ाक़ करने का पूरा हक़ होता है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आज से दस साल पहले की पारूल में ओर आज की पारूल में क्या फ़र्क़ है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; वजन और अनुभव...दोनो बढ़ गये है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आप ही की लिखी हुई आपकी कोई पसंदीदा रचना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; यू तो सारी ही पसंद है.. मगर &lt;a href="http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/2008/02/blog-post_04.html"&gt;"प्रीत को बनवास क्यो"&lt;/a&gt; मुझे अधिक पसंद है.. ये मेरे दिल के करीब सी लगती है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; आप अपनी आवाज़ में संगीत के सुरो को भी सिखाती है.. &lt;a href="http://parulchaandpukhraajka.blogspot.com/"&gt;सरगम ब्लॉग&lt;/a&gt; पर.. उसकी आवश्यकता क्यो महसूस हुई?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; बस कुछ मित्रों का सुझाव था की ऐसा ब्लॉग बनाया जाए तो मैने शुरू किया…संगीत मे रूचि है और अगर अंतरजाल पर शास्त्रीय संगीत की छोटी छोटी परिभाषाएँ आदि हिन्दी मे मिल जाएँ तो ये बहुत अच्छा काम होगा.. मेरा प्रयास होगा की इस ब्लॉग को आगे बढ़ाऊं…&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; कोई फिल्म है जो आपको बहुत पसंद हो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; खामोशी (वहीदा रहमान की) क्यों बता पाना मुश्किल है । बाज़ बाते सिर्फ़ महसूस की जा सकती हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; क्या कोई ऐसी पुस्तक भी है जो दिल के करीब हो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; जी हा! आशापूर्णा देवी की सिरीज़ थी –प्रथम प्रति्श्रुति,स्वर्णलता,बकुल कथा ।मुझे बहुत पसंद आई..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; क्या कोई ऐसी आदत है आपमे जो आप बदलना चाहेंगे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; मैं लोगो पर विश्वास बहुत जल्दी कर लेती हू।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; जब आपकी शादी होने वाली थी तो आपको क्या कोई डर लगा था.. ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; सोचा अगर बार इस होम सिकनेस हुई तो क्या करूँगी?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; बहुत अच्छा लगा पारूल जी आपके बारे में इतनी सारी बाते जानकार.. चलिए अब शुरू करते है एक रॅपिड फायर राउंड&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; ससुराल - मायका&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt;मायके जैसा ससुराल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; गोल्ड फ्लेक - धोबी की बीड़ी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; बीड़ी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; लिखना - गाना&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; खुद का लिखा गुनगुनाना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; लव मैरिज - अरेंज मैरिज&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; अरेंज मैरिज&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; सास बहू - रियलिटी शो&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; सारेगामा पा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; हिन्दी लेखन - उर्दू लेखन&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल&lt;/strong&gt;: दोनो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; चलिए अब चलते है हमारे वन लाइनर राउंड की तरफ मैं एक शब्द दूँगा और आपको उसका जवाब एक लाइन में देना है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; दाल, रोटी, चावल -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; पसंदीदा ब्लॉग है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; नारी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; बहस का मुद्दा नही&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; गुलज़ार -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; खूबसूरत आवाज़,नायाब अंदाज़&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; पातिदेव -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; श श श!!!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; गणित की क्लास -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; नाइट मेर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; कुश की कॉफी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारुल:&lt;/strong&gt; लाजवाब मगर चीनी कम है.. हा हा हा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश:&lt;/strong&gt; अब वक़्त है हमारे यहा की स्पेशल 'खुराफाती कॉफी' का.. इस कॉफी के साथ चलेगा कुछ खुराफाती सवालो का दौर.. आइए शुरू करते है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर ब्लॉग जगत में भी हड़ताल होने लगे तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt; यहाँ सब नशे मे हैं ..हड़ताल करेगा कौन?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि सारे न्यूज़ चैनल बंद हो जाए तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt; सनसनी फैलाने वाले दूसरे चैनल्स उग आएँगे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कभी आपको रियलिटी शो में जज बनाया जाता तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt; मै जजमेंट क्या खाक करती ..प्रतिभागियों के साथ सुर मे सुर मिला कर गा रही होती..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि ऐश्वर्या की शादी सलमान से हो जाती तो?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt;ऐश ग़लत फ़ैसले नही लेती ...उसने मुझे फोन पर बताया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए पारूल जी.. हमे बहुत अच्छा लगा आप यहा आयी.. ये लीजिए आपके लिए 'कॉफी विद कुश' की तरफ से गिफ्ट हैम्पर और ये एक बीड़ी का बंडल.. उमीद है आपको यहा आकर उतनी ही खुशी हुई होगी..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पारूल :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश! मुझे भी बहुत अच्छा लगा यहा आकर.. कॉफी वाकई अच्छी थी चलते चलते 'बशीर बद्र' साहब का एक शेर अर्ज़ करना चाहूँगी..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;सितारों को आँखों मे महफूज़ रखना&lt;br /&gt;बड़ी देर तक रात ही रात होगी...&lt;br /&gt;मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी&lt;br /&gt;किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी..&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शुक्रिया पारूल जी.. बहुत बहुत शुक्रिया.. तो दोस्तो ये था हमारा 'कॉफी विद कुश' का तीसरा एपिसोड ज़रूर बताईएगा कैसा लगा आपको.. अगले सोमवार को फिर मिलेंगे हमारे ही बीच के और ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए अलविदा..&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-6250194785169324254?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/6250194785169324254/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_18.html#comment-form' title='39 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/6250194785169324254'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/6250194785169324254'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_18.html' title='कॉफी विद कुश.. (तीसरा एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>39</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-2526365677334924943</id><published>2008-06-13T14:36:00.001+05:30</published><updated>2009-01-07T15:54:39.189+05:30</updated><title type='text'>'कॉफी विद कुश' (दूसरा एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;blockquote&gt;दोस्तो स्वागत है आपका 'कॉफी विद कुश' के दूसरे एपिसोड में...&lt;br /&gt;आज के जो हमारे मेहमान है वो ब्लॉग जगत की एक बहुत ही जानी मानी सख्शियत है.. जिनकी ब्लॉग पे हमेशा नयी पोस्ट का इन्तेज़ार लगा रहता है.. इनकी यादो की दराज खुलती है तो बहुत ही रोचक होती है... बीते दिनो के किससे खूबसूरती से बयान करने में इन्हे महारत हासिल है.. जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू पेशे से डरमेटॉलजिस्ट ओर ग़ैरपेशेवर थोड़े से इंसान... ब्लॉग &lt;a href="http://anuragarya.blogspot.com/"&gt;दिल की बात&lt;/a&gt; वाले &lt;strong&gt;डा. अनुराग जी&lt;/strong&gt; की..&lt;/blockquote&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आप &lt;strong&gt;'कॉफी विद कुश'&lt;/strong&gt; के दूसरे गेस्ट है.. कैसा लग रहा है आपको यहाँ आकर ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जर्रानवाज़ी है आपकी हजूर..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शुक्रिया,सबसे पहले ये बताइए आपको ब्लॉग बनाने की प्रेरणा कहा से मिली ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; मनीषा पाण्डेय जी कुछ लेख लिखती है 'नया ज्ञानोदय' मे हिन्दी ब्लोग्स पर ,वही पढ़ा ,उत्सुकता हुई फ़िर खुजली होने लगी ..पहले सोचा अपने लिखे को संभाल कर रखने के लिए एक डायरी जैसा है ,फ़िर कुछ दोस्तो जैसे &lt;a href="http://abhijitlekhni.blogspot.com/"&gt;अभिजीत&lt;/a&gt; ओर &lt;a href="http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/"&gt;पारुल जी&lt;/a&gt; के ब्लॉग देखे तो हम भी शुरू हो गये&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉग का नाम 'दिल की बात' रखने की कोई खास वजह ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; नही कोई ख़ास नही.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कहते है डॉ के पास दिल नही होता ओर आप दिल की बात करते है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; हमारे पास दिमाग नही है इसलिए इससे दोनों काम ले रहे है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉगर्स में किसे पढ़ना पसंद करते है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; ढेरों लोग है ,किस किस का नाम लूँ ?&lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;ज्ञानदत्त पाण्डेय जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;मिश्रा जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://ranjanabhatia.blogspot.com/"&gt;रंजना जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/"&gt;पारुल जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://ngoswami.blogspot.com/"&gt;नीरज गोस्वामी जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://bal-kishan.blogspot.com/"&gt;बाल किशन जी,&lt;/a&gt; &lt;a href="http://shabdavali.blogspot.com/"&gt;अजीत जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://pratyaksha.blogspot.com/"&gt;प्रत्यक्षा जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://ojha-uwaach.blogspot.com/"&gt;अभिषेक&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://prashant7aug.blogspot.com/"&gt;पी.डी.&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;बेजी जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://kuchehsaas.blogspot.com/"&gt;पल्लवी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://abhijitlekhni.blogspot.com/"&gt;अभिजीत&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://alpana-verma.blogspot.com/"&gt;अल्पना जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://mehhekk.wordpress.com/"&gt;महक&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://kanchanc.blogspot.com/"&gt;कंचन&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://poemsnpuja.blogspot.com/"&gt;पूजा&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://rakhshanda-prettywoman.blogspot.com/"&gt;रक्षनान्दा&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://ghughutibasuti.blogspot.com/"&gt;घूगती&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://meenakshi-meenu.blogspot.com/"&gt;मीनाक्षी जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://rajnigandhaa.blogspot.com/"&gt;रजनी जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://pangebaj.blogspot.com/"&gt;पंगेबाज&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://www.lavanyashah.com/"&gt;लावण्या जी&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://ek-shaam-mere-naam.blogspot.com/"&gt;मनीष&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://neelima-mujhekuchkehnahai.blogspot.com/"&gt;नीलिमा अरोरा&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://mamtatv.blogspot.com/2008/02/blog-post_23.html"&gt;ममता जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://rajeshroshan.com/"&gt;राजेश रोशन जी&lt;/a&gt;,महेन्द्र जी.&lt;a href="http://teesarakhamba.blogspot.com/"&gt;द्रिवेदी जी&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://parayadesh.blogspot.com/"&gt;राज जी&lt;/a&gt;...&lt;a href="http://boondiendilki.blogspot.com/"&gt;सई&lt;/a&gt;,&lt;a href="http://meets-lajja.blogspot.com/"&gt;मीता&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://ranjanpriyesh.wordpress.com/"&gt;प्रियेश&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://manishi11.blogspot.com/"&gt;मनीषा&lt;/a&gt; ,&lt;a href="http://www.kushkikalam.blogspot.com/"&gt;कुश&lt;/a&gt; ओर ढेर सारे लोग ..किसी का नाम भूल जाऊ तो मुआफी ...,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; इतने सारे लोगो का नाम लेकर आप थक गये होंगे.. आपकी थकान हम अभी दूर किए देते है.. ये लीजिए 'कॉफी विद कुश' की स्पेशल कॉफी.. अब आगे बातो का सिलसिला कॉफी की गर्माहट के साथ चलेगा..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा. अनुराग :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश! कॉफी वाकई लाजवाब है.. इस बारिश के मौसम में ऐसी कॉफी मिल जाए तो क्या बात है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चलिए बात आगे बढ़ाते हुए आप ये बताइए हिन्दी ब्लॉग जगत की सबसे बढ़िया बात क्या लगी आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; इक ऐसी दुनिया जिसकी कोई भौगोलिक सीमा नही....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अच्छा ये बताइए, लिखना पढ़ना कैसे शुरू हुआ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; चंपक,नदन,लोटपोट इंद्रजाल कोमिक्स से शुरुआत हुई...पिता जी के एक जिगरी दोस्त है जिन्होंने बंगलादेश युध्बंदियो पर एक काफ़ी प्रसिद्ध किताब लिखी है ओर जिनकी कई किताबे छपी है उनसे ढेरों किताबे पढी तो डायरी बना ली की अच्छी अच्छी चीजे नोट करके रखेगे फ़िर पता नही कब अपना भी लिखने लगा..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपके बचपन की कोई बात जो अभी तक याद हो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; दिल्ली मे ट्रेड फेयर लगता है ,हम स्कूल की तरफ़ से जाया करते थे ,सारे बच्चे एक तरफ़ ओर मैं एक तरफ़ पुरा दिन बुक स्टाल मे गुजार देता था ,उन दिनों रस्सियन(russian) बुक स्टाल लगता था जिसमे रूसी कहानियो ओर नोवल हिन्दी अनुवादित मिलती थी तो मम्मी चलते वक़्त अलग से पैसे देती थी की ये खाने के लिए बाकियों की मैं किताब खरीद लाता था..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हमेशा से आप डाक्टर ही बनना चाहते थे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जब ५वीं क्लास मे था तो किसी दुर्घटना मे बड़े भाई की म्रत्यु हो गई थी तभी उनका एडमिशन मेडिकल मे हुआ था ,पापा को रोते देखा था तभी से पापा का सपना कब मेरा बन गया ..मालूम नही&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि डाक्टर नही होते तो क्या होते ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; मालूम नही कभी सोचा नही ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अच्छा ये बताइए पहली बार आपका दिल किस पर आया था ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; अपनी नर्सरी की टीचर पर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बहुत खूब! आजकल किस पर आया है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; अपने बेटे की नर्सरी की टीचर पर ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा हा...सुना है कॉलेज के दिनों मे आप मंच पर काफी सक्रिय थे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जी हाँ,ख़ुद नाटक लिखता था ओर निर्देशित करता था ,एक दो मे बुरी एक्टिंग भी की थी,dumb-sharade मे हमारी टीम चैम्पियन थी ,बाद मे ख़ुद ही आयोजित करने लगा..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; और गाना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; हा हा हा...एक लड़की को इम्प्रेस करने के लिए ४ दिन तक एक गाना रिहर्स किया था ..लड़की तो इम्प्रेस नही हुई पर अपन पार्टियों के गवियिये बन गये..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा ये भी खूब रही.. सुना है आप भूख हड़ताल पर भी बैठे थे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जी हाँ पी.जी के stipend बढ़ाने के लिए हम लोगो की स्ट्राइक हुई थी ,तब हम ५ लोग भूख हड़ताल पर बैठे थे .. उस वक़्त गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री अशोक भट्ट हमसे वार्ता के लिए आये थे ,माहोल काफ़ी तनाव पूर्ण हो गया था हमारी गिरफ्तारी के वारंट तक ज़ारी हो गये थे ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;कही हवालात की सैर तो नही हुई ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;नही शुक्र है हवालात की सैर नही हुई..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;कोई ऐसा पंगा जो अभी तक पोस्ट ना किया हो&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग : &lt;/strong&gt;हमारे होस्टल मे एक बेहद शरीफ लड़का था राम सिंह ,हम किसी भी हॉल मे पिक्चर देखने घुसते सारे जोर से चिल्लाते "राम सिंह ...राम सिंह .अगले कई सालो मे हमने सारे सिनेमा हॉल मे उसे फेमस कर दिया ..आजकल वो दिल्ली मे है न्यूरोलॉजिस्ट है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जीवन की कोई अविस्मरणिय घटना ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; ढेरों है पर अपनी बेस्ट फ्रेंड को कैंसर से खोना ....उस दौरान जीवन के प्रति सारी सोच बदल गयी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ओह!&lt;br /&gt;ब्लॉगिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प अनुभव ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; कॉलेज की हमारी सीनियर &lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;बेजी जी&lt;/a&gt; से दुबारा यहाँ मिलना एक सुखद संयोग है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कैसा लगता है जब लोग कमेंट करते है की दिल को छू गयी आपकी पोस्ट ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; .. अच्छा लगता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;"यू आर आउट एण्ड आउट एन इमोशनल जेम - पूरी तरह एक संवेदनशील हीरा!"&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;पांडे जी&lt;/a&gt; की ये टिप्पणी पाकर कैसा लगा आपको ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; पांडे जी विद्वान आदमी है ,मेरे मन मे उनके लिए गहरा सम्मान है ...ये उनका बड़प्पन है मेरे दोस्त इसे मेरी कमजोरी मानते है ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; इतनी व्यस्त दिनचर्या में लिखने का वक़्त कैसे निकालते है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; सुबह सुबह या देर रात लिखता हूँ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपके ब्लॉग की सबसे लोकप्रिय पोस्ट &lt;a href="http://anuragarya.blogspot.com/2008/05/1.html"&gt;जाट&lt;/a&gt; के बारे में बताइए.. क्या अभी भी मिलते है आप लोग ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जाट मेरी जान है ..लगभग तीन महीने मे एक बार हम मिल ही लेते है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अच्छा ये बताइए आज से 10 साल पहले के अनुराग में ओर आज के अनुराग में क्या फ़र्क़ है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; हर उम्र का एक जुदा आसमान होता है, अब वहा ज़िम्मेदारिया है तब वहा सपने टाँगे होते थे..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश : &lt;/strong&gt;हाल फिलहाल मे कभी पुराना अनुराग जागा है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग &lt;/strong&gt;: अक्सर जागता है एक दिन हाल मे घुसते ही मैंने टार्च जला ली ओर अन्दर आने वालो को इधर उधर भेजकर चुप -चाप अपनी सीट पर बैठ गया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा हा! बहुत खूब! आपके ब्लॉग की कौनसी पोस्ट आपको सबसे ज़्यादा पसंद है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग:&lt;/strong&gt; यू तो अब तक जो लिखा वो सभी मेरी पसंदीदा है फिर भी मेरी एक पोस्ट है &lt;a href="http://anuragarya.blogspot.com/2008/04/blog-post_9335.html"&gt;"रेलवे स्टेशन"&lt;/a&gt; जो मुझे बेहद पसंद है... ये मैने करीब 11 साल पहले की एक रात दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर लिखी थी..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; क्या बात है!!!, कहते है अक्सर आपकी पोस्ट पढ़कर आँखे नाम हो जाती है.. ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; वाकई? जो रात मे लिखता हूँ वो शायद ज्यादा भावुक होती है पर जाट एपिसोड ओर कॉलेज के पुराने किस्सों पर काफी मेल आये ..आपका भी तो वही पसंदीदा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; जी हा सही फरमाया आपने.. अच्छा ये बताइए कोई फिल्म जो बहुत पसंद हो आपको ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; "फाइंडिंग निमो" और "आइस एज" कार्टून फ़िल्म है “ तकरीबन ८० बार देख चुका हूँ..शोले से भी ज्यादा बार एक एक डाइलोग याद है ,एक ज़माने तक मेरा बेटा उन्हें देखते हुए खाना खाता था..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अब जब आपके बेटे की बात चली ही है तो हम पाठको को मिलवा ही देते है ''छोटे अनुराग" से.. दोस्तो हमारे डा. साहब की तरह ही बड़े चंचल है ये छोटे नवाब..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SFXvWpshfGI/AAAAAAAAAaM/uIpR2a9C_g0/s1600-h/junanu..jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5212335316179975266" style="margin: 0px 10px 10px 0px; float: left; width: 455px; height: 127px;" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SFXvWpshfGI/AAAAAAAAAaM/uIpR2a9C_g0/s320/junanu..jpg" width="408" border="0" height="91" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हमने सुना है आप पिक्चर देख कर रोते भी है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;जी हाँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कौन सी पिक्चर है जिसमे रोने के रिकार्ड टूट गये ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;तारे जमीन पर ..ये एक बेहद संवेदनशील फिल्म है..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; कोई ऐसी किताब जिसने आपको बैचैन किया हो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; नाथूराम गोडसे की "मैंने गाँधी को क्यों मारा ' उस रात ४.३० बजे सोया था&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आपकी कॉलेज की मित्र &lt;a href="http://bejijaison.blogspot.com/"&gt;डा. बेजी&lt;/a&gt; भी है ब्लॉग जगत में क्या कहना चाहेंगे उनके बारे में ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; वे मेरी सीनियर है ,वो बेहद प्यारी ओर जिंदादिल इंसान है ,मैंने उनसे उस जमाने मे एक किताब उधार मांगकर पढी थी "नोट्स टू माइसेल्फ" बहुत प्यारी किताब थी...जिस तरह आप मुझसे सवाल पूछ रहे है उन दिनों मैं भी कॉलेज मे एक प्रोग्राम करता था "आइये कुछ देर रूबरू बैठे " उसमे जहीन लोगो को बुलाया जाता था ,बेजी जी उनमे से एक थी ,मेरी ओर जाट की काफ़ी हरकतों से वे वाकिफ है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; आज बहुत कुछ नया पता चला आपके बारे में.. और काफ़ी मज़ेदार भी रहे जवाब आपके.. चलिए अब रॅपिड फायर राउंड शुरू करते है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अमिताभ बच्चन -शत्रुघ्न सिन्हा&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;धर्मेन्द्र&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अपनी नर्सरी की टीचर -बेटे की नर्सरी टीचर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;दोनों&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; शाहरुख-आमिर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;आमिर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तुलसी -पार्वती&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; बा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; पिज़्ज़ा - पपड़ी चाट&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; पपड़ी चाट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; बीवी की चाय - कुश की कॉफी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; बीवी की चाय घर जाना है भाई... ….&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; मेरठ - सूरत&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जानता था ये सवाल पूछेंगे …मेरठ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; लेखक ..डॉ&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; डॉ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; वाह काफ़ी बढ़िया जवाब रहे आपके... अब चलते है वन लाइनर राउंड की तरफ... आपको एक लाइन में जवाब देना है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लॉग -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; दिल की बात&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ऊडन तश्तरी –&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; ब्लॉग रतन&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चियर लीडर्स –&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; आइ लव क्रिकेट मैन&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; चिट्ठाजगत -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; खींचो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; ब्लोग्वानी -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; फटाफट&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; खबरिया चैनल -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; ब्रेकिंग न्यूज़&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; सस्ता शेर -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; बस शेर ही सस्ता मिलेगा आजकल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अब वक़्त है एक अलग तरह की कॉफी का इस कॉफी की किक बड़ी मज़ेदार है ...हमारे यहा की स्पेशल 'खुराफाती कॉफी' ताकि आप हमारे इन खुराफाती सवालो का जवाब दे सके.. तो शुरू करते है खुराफाती सवालो का दौर ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अगर कभी इन्कम टैक्स वाले छापा मारे तो ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt;कुछ पैसे दे जायेंगे कि डॉ साहब कुछ तो स्टेटस रखो...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; यदि किसी दिन गूगल से मेल आए की आपका ब्लॉग, बेस्ट ब्लॉग चुना गया है तो कैसा महसूस करेंगे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; मजाक समझकर भूल जाऊँगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;अगर आपकी कोई पुरानी गर्लफ्रेंड रास्ते मे मिल जाये तो क्या करेंगे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग : &lt;/strong&gt;मुझे क्या करना है ?जो करेगा उसका हसबैंड करेगा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;सलमान खान की कौन सी चीज़ ज्यादा पसंद है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; कैटरीना कैफ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :"&lt;/strong&gt;रामू की आग " का सबसे पसंदीदा भाग&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; इंटरवेल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;कभी एकता कपूर से मिले तो क्या पूछेंगे ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग : &lt;/strong&gt;उस प्लास्टिक सर्जन का अड्रेस जो इतनी सफ़ाई से चेहरे बदलता है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; हा हा हा! आपके जवाब तो बड़े खुराफाती रहे.. जाते जाते आपसे कुछ और सवाल...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;आपके मुताबिक एक अच्छा ब्लॉगर होने के लिए क्या होना आवश्यक है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; सेंस ऑफ़ ह्यूमर, ईमानदारी भरा लेखन, बाकि ब्लोग्गार्स से संवाद..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt;कोई उदाहरहण देना चाहेंगे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; जैसे की &lt;a href="http://pangebaj.blogspot.com/"&gt;अरुण पंगेबाज &lt;/a&gt;ओर &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर 'उड़न तश्तरी' जी&lt;/a&gt; उनका सेंस ऑफ़ ह्यूमर गजब का है ..ओर संवाद प्रक्रिया भी .....कुछ स्थापित ब्लोगर्स दूसरे चिट्ठो पर टिपियाते कम है इससे ये मेसेज जाता है की वे दूसरे के चिट्ठे नही पढते है..&lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;पांडे जी&lt;/a&gt; ओर &lt;a href="http://shiv-gyan.blogspot.com/"&gt;मिश्रा जी&lt;/a&gt; भी अच्छे व्यंगकार है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; अंत में आप 'कॉफी विद कुश' के पाठको से क्या कहना चाहेंगे?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; यहाँ की काफी बहुत अच्छी है ..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; डा. साहब सच कहु तो आपसे इतनी बढ़िया बाते करने के बाद मन नही कर रहा की ये एपिसोड यही ख़त्म कर दे.. वाकई बहुत बढ़िया लगा आप यहा आए और आपने हमारे साथ अपने जीवन से जुड़ी दिलचस्प बाते शेयर की.. बहुत बहुत शुक्रिया आपका.. ये हमारी तरफ से एक गिफ्ट हैमपर आपके लिए और ये टिश्यू पेपर का बॉक्स भी दोबारा जब आप फिल्म देखकर रोए तो ये आपके काम आएगा.. एक बार फिर बहुत बहुत शुक्रिया यहा आने के लिए..&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डा.अनुराग :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश.. बहुत बहुत शुक्रिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुश :&lt;/strong&gt; तो दोस्तो ये था हमारा कॉफी विद कुश का दूसरा एपिसोड एक डाइनमिक पर्सनॅलिटी डा. अनुराग के साथ.. उमीद है आपको पसंद आया होगा.. अपने विचार ज़रूर बताईएगा.. अगले सप्ताह इसी जगह पर हम फिर मिलेंगे हमारे ही बीच के एक और विशिष्ट ब्लॉगर के साथ.. तब तक के लिए विदा चाहूँगा.. ख्याल रखिएगा..&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-2526365677334924943?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/2526365677334924943/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_13.html#comment-form' title='40 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2526365677334924943'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/2526365677334924943'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post_13.html' title='&apos;कॉफी विद कुश&apos; (दूसरा एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/SFXvWpshfGI/AAAAAAAAAaM/uIpR2a9C_g0/s72-c/junanu..jpg' height='72' width='72'/><thr:total>40</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6174657331291429293.post-6340464833717620826</id><published>2008-06-09T13:21:00.001+05:30</published><updated>2009-01-07T15:54:09.677+05:30</updated><title type='text'>कॉफी विद कुश.. (पहला एपिसोड)</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;नमस्कार दोस्तो &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;कॉफी विद कुश के पहले एपिसोड में आपका स्वागत है.. उमीद है आपको पसंद आएगा.. आज के जो हमारे मेहमान है वो एक बहुत ही जाना माना नाम है.. उनकी ब्लॉग पे हम हमेशा से पढ़ते आए है कुछ गुदगुदाते व्यंग्य.. कुछ कविताए ...... &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;कुछ संवेदनशील लेख....... जी हा दोस्तो मैं बात कर रहा हू.. मिस &lt;a href="http://kuchehsaas.blogspot.com/"&gt;पल्लवी त्रिवेदी&lt;/a&gt; की.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;नमसकार पल्लवी जी.. आपका स्वागत है कॉफी विद कुश के पहले एपिसोड में ! &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी :&lt;/strong&gt; नमस्कार &lt;a href="http://www.kushkikalam.blogspot.com/"&gt;कुश&lt;/a&gt;.. शुक्रिया आपका&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप कॉफी विद कुश की पहली गेस्ट है कैसा लगा आपको पहले एपिसोड में होना &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; बहुत अच्छा लगा जी ...आपके गेस्ट और वो भी पहले। खुशी की बात है  ब्लॉग जगत में ये अपने तरह का पहला एक्सपेरिमेंट है और इसका हिस्सा होना मुझे भी अच्छा लगा.. &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप ब्लॉग्गिंग में कैसे आई ? &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; किसी का ब्लॉग देखा था... अच्छा लगा तो अपना भी बना लिया &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; किसका देखा था, याद है ? &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हाँ..." अभी जीना बाकी है" नाम का एक ब्लॉग था! उसके अंदर क्या था अब ये याद नही है। &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; ये बताइए हिन्दी ब्लॉग जगत की सबसे बढ़िया बात क्या लगी आपको ? &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; लगभग सभी विधाएँ पढ़ने को मिल जाती है..कविता हो, कहानी, संस्मरण, लेख ...मतलब सभी चीज़ें!&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कहते है पुलिस वालो से दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी क्या कहती है आप?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ह्म्म...ये तो तुम डिसाइड करो&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;में:&lt;/strong&gt; ना ना मैं अपनी बात नही कर रहा ......  सामान्यतया यही कहा जाता है॥&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; पता नही क्यो कहते हैं.... दोस्ती क्यो बुरी? वो कभी समझ नही आया दुश्मनी का कारण तो समझ आता&lt;span class=""&gt; है &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप कितने टाइम से है ब्लॉग्गिंग में&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; करीब चार महीने से &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आपको किसे पढ़ना ज़्यादा अच्छा लगता है ?  मेरा मतलब ब्लॉगर्स से है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://udantashtari.blogspot.com/"&gt;समीर जी&lt;/a&gt; ...&lt;a href="http://anuragarya.blogspot.com/"&gt;अनुराग&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://halchal.gyandutt.com/"&gt;पांडे जी&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://pratyaksha.blogspot.com/"&gt;प्रत्यक्षा&lt;/a&gt;, &lt;a href="http://doobeyji.blogspot.com/"&gt;डूबे जी&lt;/a&gt; और भी हैं कुछ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; जैसे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; तुम भी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; हा हा शुक्रिया.. मैं यही सुनना चाह रहा था&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; &lt;a href="http://www.kisseykahen.blogspot.com/"&gt;मीत&lt;/a&gt; के सॉंग्स बहुत अच्छे लगते हैं &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; ब्लॉगिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प अनुभव ? &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ह्म्म...सोच्ने दो..... अरे हा । ऐसे  ही ट्रायल  के लिए कोई बकवास सा गाना लिखकर पोस्ट किया था एक बार... सोचा था पोस्ट हो जाएगा तो देखकर हटा दूँगी.. पर पोस्ट करते ही नेट डिसकनेक्ट हो गया  दो घंटे बाद वापस आया..वो गाना दो घंटे ब्लॉग पर रहा... ना जाने कितने लोगों ने देखा होगापर थॅंक गॉड .. कॅमेंट एक भी नही आया&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; वाह ये भी खूब रही&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; गाना बताऊ कौन सा था ...? &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; जी ज़रूर&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; मर्द टांगे वाला मैं हूँ मर्द टांगे वाला&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; हा हा वैसे ये गाना इतना भी बुरा नही&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आपके ब्लॉग का नाम &lt;a href="http://kuchehsaas.blogspot.com/"&gt;कुछ एहसास&lt;/a&gt; रखने की कोई खास वजह ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; मुझे लगा की ब्लॉग में जो महसूस करती हूँ वही लिखूँगी तो कुछ एहसास से अच्छा क्या नाम होता &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; क्या आप किसी कम्यूनिटी ब्लॉग में भी है&lt;br /&gt;पल्लवी: हाँ एक  &lt;a href="http://sandoftheeye.blogspot.com/"&gt;चोखेर बाली&lt;/a&gt; नाम के ब्लॉग में भी हूँ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कैसा लगता है वहा लिखना&lt;br /&gt;पल्लवी : ह्म... अच्छा लगता है! आज की महिलाओं के लिए जो मैं सोचती हूँ... और एक महिला होने के नाते जो मैंरे विचार हैं ...वहा व्यक्त करती हूँ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; आप हमारे पहले एपिसोड की पहली मेहमान है॥ और ये लीजिए आपकी पहली कॉफी तैयार है.. &lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; थॅंक्स! नाइस कॉफी &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; आपकी पसंदीदा कॉफी कौनसी है&lt;br /&gt;पल्लवी: केफे कॉफी डे की कॅपेचिनो और मेरे हाथ की नेस्केफे क्लॅसिक &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; ओह तो आप कॉफी भी बनाती है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; जी हाँ ...वो भी बहुत अच्छी &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप हमेशा से पुलिस में ही जाना चाहती थी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; नही ... कभी नही सोचा था वो तो एग्ज़ाम दिया और हो गया यू केन से डेस्टिनी&lt;/p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; तो अब कैसा लगता है पुलिस में आकर क्या डेस्टिनी ने जो किया सही था ?&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; अच्छा तो लगता है...लेकिन शायद अगले जन्म में मैं किसी नौकरी में नही आना चाहूंगी &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कोई खास वजह? &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; खास तो नही पर एक तरह की गुलामी लगती हैं मुझे... कुछ इनडिपेंडेंट वर्क करना ज़्यादा पसंद है मुझे॥ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप अभी भी तो छोड़ सकती है नौकरी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ना॥ अभी मेरे पास कोई टॅलेंट नही है। नौकरी छूट गयी तो खाने के भी लाले पड़ जाएँगे &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; अरे टॅलेंट तो है ना॥ आप इतना बढ़िया लिखती है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हे हे...इस से जिंदा नही रहा जा सकता॥ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; शादी कब कर रही है आप… फिर तो ये समस्या भी नही रहेगी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ह्म्म...मुश्किल सवाल, पता नही &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; अभी आप करना नही चाहती ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; नही ॥ ऐसा नही है। कोई मिल जाए तो कल कर लू &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt;अभी तक कोई मिला नही या आपने ढूँढा नही &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; सीरियस्ली ढूँढा भी नही... जो प्रपोज़ल आए तो मुझे लड़के पसंद नही आए &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; पुलिस वाले से ही करना चाहती है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; न॥ऐसा कुछ नही है॥&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt;सुना है आपको सिंगिंग का भी शौक है और आप गिटार भी बजाती है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हाँ है मैंने क्लॅसिकल सिंगिंग सीखी &lt;span class=""&gt;है. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; किस उम्र में?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; कॉलेज में ....हाँलाकि अब छोड़े हुए काफ़ी साल हो गये हैं &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कॉलेज लाइफ से जुड़ी कोई बातजो आपको अभी तक याद हो ।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; बहुत सारी हैं ॥एक बार हमारे कॉलेज में रोज़ डे मनाया गया .... सारे लड़के गुलाब के फूल लाने वाले थे... मंडला बहुत छोटा शहर था,,गुलाब ज़्यादा नही मिले तो आधे से ज़्यादा लोग गैंदा ले आए... गैंदा डे मन गया कभी किसी को देखा है...गैन्दे का फूल देते ? &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आपको क्या मिला ? ग़ुलाब या गैंदा&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; कुछ नही... मैं शायद किसी को प्रिय नही थी &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कभी आपका भी कोई प्रिय रहा है ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लावी:&lt;/strong&gt; नही॥ मेरा कोई ख़ास दोस्त भी कभी नही रहा &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कोई खास वजह&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; नही ॥वजह तो कुछ भी नही। कभी किसी से दोस्ती ही नही हुई &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आपको बॅडमिंटन खेलना भी पसंद है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हाँ॥ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; क्या कभी कोई प्राइज़ जीता है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; नही॥ कभी किसी कॉंपिटेशन में पार्ट नही लिया... ऐसे ही शौकिया खेलना अच्छा लगता है&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आपकी एक पोस्ट थी &lt;a href="http://kuchehsaas.blogspot.com/2008/05/blog-post_16.html"&gt;बेशर्म की सॅंटी &lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ह्म&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; सॅंटी के बारे में बताइए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हा हा हा मत पूछो... स्कूल की सबसे डरावनी चीज़ थी सब बच्चे मार खाते थेमैं क्लास में बात बहुत करती थी घर पर भी कंप्लेंट्स आती थी &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; आप कैसी स्टूडेंट थी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; पढ़ने में तो अच्छी रही हमेशा &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; फिर तो आपके पेरेंट्स हमेशा खुश रहते होंगे&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हां ...खुश तो लगते&lt;span class=""&gt; थे &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; बचपन में क्या आप भी दूसरी लड़कियो की तरह थी या उनसे कुछ अलग महसूस करती थी?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; कुछ बातों में तो सचमुच अलग फील करती थी... जैसे मेरी बाकी फ्रेंड्स बाहर के काम जैसे बॅंक ,पोस्ट ऑफिस ,सब्ज़ी,किराना लाना या अकेले बस में सफ़र करना नही करती थी हमारा कोई भाई नही है... तो हम सारे काम खुद ही करते थे बहुत इनडिपेंडेंट फील होता था । &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; क्या आप मानती है की आज की लड़किया ये सब काम कर लेती है आज की लड़किया ज़्यादा स्ट्रॉंग है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हा॥बहुत हद तक अब तो लड़कियाँ सब करती है ..उन परिवारों की बात अलग है जहाँ आज भी माँ बाप लड़कियों को खाना बनाने तक सीमित रखते है&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; पल्लवी त्रिवेदी को क्या कहेगी आप ?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; खुशमिजाज़ इंसान जो अपने आसपास भी खुशियाँ फैलने की कोशिश करती है &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; आपकी पसंदीदा रचना कोई जो आपने ही लिखी हो:&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; अगेन टफ क्वेस्चन&lt;br /&gt;फिर भी एक मुझे हमेशा से प्रिय है॥ वही सुना देती हू.. &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;काश कभी ऐसा हो तुम और मैं डेट पर चलें... &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;दो रंगीन पतंगों पर बैठकर आसमान पे चलें &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;किसी बादल से लिफ्ट ले लें और &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;पैर लटकाकर उस पर बैठें फलक की सैर करें &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;उसके बाद चाँद की चटाई पर थोडा सुस्ताएं &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;और मुट्ठी भर भर कर तारों के चने खाएं... &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;सर्दी लगने लगे तो सोते हुए सूरज से चुपचाप &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;कुछ अंगारे उठा लायें अपने हाथ सेक लें... &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;रात भर हवाओं का मीठा गीत हम सुनें &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;और जब सुबह की ओस से चाँद गीला होने लगे &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;तो हम भी सूरज की किरणे पकड़कर &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;वापस अपनी छत पर उतर जाएं॥ &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;काश कभी हम डेट पर जाएं... &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; वाह मैने पहली बार आपके ब्लॉग पर यही पढ़ी थी॥ बहुत बढ़िया ख्याल है.. &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश.. ये मेरा एक सपना है.. जिसे मैं जीना चाहती हू&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt;पल्लवी&lt;/span&gt; जी काफ़ी कुछ पता चला आज आपके बारे में॥ चलिए अब एक रॅपिड फायर राउंड शुरू करते है॥ आप इन दोनो में से एक चुनिएगा &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आन्नद- पड़ोसन&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; फॉर मी ॥पड़ोसन &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; जगजीत सिंह - फरीदा ख़ानम&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; जगजीत &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; हरिशंकर परसाई - सिवाजी सावंत&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हरिशंकर &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; शिवपुरी – भोपाल&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; फुल वीक भोपाल ॥ वीकेंड शिवपुरी &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; एक चुनिए&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; भोपाल &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; एकता कपुर - बाबा रामदेव&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी :&lt;/strong&gt; सीरियस्ली दोनो में से कोई नही &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; हा हा ! अच्छा जवाब &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; और अब एक महत्वपूर्ण सवाल हू इस बेटर होस्ट ?&lt;br /&gt;कुश - करण&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हे हे... ऑवियस्ली कुश... स्मार्टर देन करण तभी तो अपनी तारीफ कराने के लिए ये क्वेस्चन पूछा ।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; हा हा शुक्रिया &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt;काफ़ी बढ़िया जवाब रहे आपके॥ अब चलते है वन लाइनर राउंड की तरफ॥ मैं एक शब्द दूँगा आपको एक लाइन में उसे डिस्क्राइब करना है.. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; चोखेर बाली -&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ऐश्वर्या राय और रायमा सेन की फिल्म डाइरेक्टेड बाइ रितुपर्णो घोष&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; हहा अनएक्सपेक्टेड आन्सर फिर भी बढ़िया&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; हा हा शुक्रिया&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; राखी सावंत -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; ब्रेकिंग न्यूज़&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; एम टीवी रोडीस -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; कुछ फालतू औट बेवकूफ़ लोगो का जमघट&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; भोपाल पुलिस - &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; बेस्ट ऑफ बेस्ट&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; हिन्दी ब्लॉगिंग-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; बेटर दॅन इंग्लीश ब्लॉग्गिंग &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं &lt;/strong&gt;: ओर्कूट &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; मेरी कविता की शुरुआत &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं:&lt;/strong&gt; कुश -&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; अच्छी कॉफ़ी पिलाता है &lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; अंत में आप ये बताइए की हिन्दी ब्लॉग्गिंग का भविष्य कैसा है क्या लगता है आपको ?&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी:&lt;/strong&gt; अभी तो उज्ज्वल दिखता है...क्योकि जो लोग स्थापित हैं उन्हे तो सब पढ़ते थे...लेकिन नये लोगों के लिए तो बहुत अच्छा प्लॅटफॉर्म &lt;span class=""&gt;है &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;मैं :&lt;/strong&gt; चलिए बहुत अच्छा लगा पल्लवी जी आज आपसे बात करे॥ कॉफी विद कुश के पहले एपिसोड को आपकी उपस्थिति ने यादगार बना दिया.. आशा है आप को भी पसंद आया होगा॥ &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश मुझे यहा बुलाने के लिए.. मुझे भी बेहद खुशी हुई है कॉफी विद कुश का हिस्सा बनकर.. मेरी शुभकामनाए आपके साथ है.. &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;मैं &lt;/span&gt;:&lt;/strong&gt; जाने से पहले ये लीजिए एक गिफ्ट हॅमपर हमारी तरफ से ऑल द बेस्ट.. और ये एक गैन्दे का फूल॥ &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;पल्लवी :&lt;/strong&gt; शुक्रिया कुश.. बहुत बहुत शुक्रिया &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;तो दोस्तो ये था हमारा आज का कॉफी विद कुश का पहला एपिसोड बताएगा ज़रूर कैसा लगा आपको॥ तैयार रहिएगा अगले एपिसोड में फिर मिलवाएँगे हम आपको अपने ही बीच के एक ब्लॉगर से॥ तब तक के लिए अलविदा.. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6174657331291429293-6340464833717620826?l=coffeewithkush.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/feeds/6340464833717620826/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post.html#comment-form' title='51 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/6340464833717620826'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6174657331291429293/posts/default/6340464833717620826'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://coffeewithkush.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='कॉफी विद कुश.. (पहला एपिसोड)'/><author><name>कुश</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_M6URJOwMRoo/Ss8OJxT8kSI/AAAAAAAABt0/X-ovbOkW-oc/S220/kush.jpg'/></author><thr:total>51</thr:total></entry></feed>
